क्या है शशि थरूर की किताब 'मैं हिन्दू क्यों हूं' में, जानिए यहां...

शशि थरूर की किताब 'मैं हिन्दू क्यों हूं' का होगा विमोचन...

वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित शशि थरूर की बहुचर्चित अंग्रेज़ी किताब का युगांक धीर द्वारा अनुवाद 'मैं हिन्दू क्यों हूं' का लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन 2 दिसंबर 2018 को सायंकाल 6:30 बजे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, मैक्स म्युलर मार्ग, मल्टीपर्पज हॉल में होगा। किताब पर चर्चा में भाग लेंगे देवी प्रसाद त्रिपाठी(पूर्व सांसद राज्यसभा), तसलीमा नसरीन(सुप्रसिद्ध लेखिका व विचारक) तथा राहुल देव (वरिष्ठ पत्रकार व भाषाविद्) 
 
इस अवसर पर चर्चा में शशि थरूर सक्रिय रूप से उपस्थित रहेंगे।
 
 
जानिए पुस्तक 'मैं हिन्दू क्यों हूं' के बारे में
 
शशि थरूर ने यह किताब तीन खंडों में प्रस्तुत की है। उनके अनुसार -
 
पहले खंड ‘मेरा हिन्दूवाद’ में मैंने हिन्दू धर्म के सभी पहलुओं को छुआ है-इसके प्रमुख पंथ, मत, गुरु और शिक्षाएं, और साथ ही इसकी कुछ ज़्यादा प्रश्न किए जाने योग्य प्रथाएं भी। 
 
दूसरे खंड ‘राजनीतिक हिन्दूवाद’ में मैंने राजनीतिक नेताओं, रणनीतिज्ञों, विचारकों और उनके धार्मिक सहयोगियों द्वारा अपने हितों के लिए हिन्दू धर्म को ‘हाइजैक’ करने की कोशिशों का वर्णन किया है। 
 
तीसरे खंड ‘सच्चे हिन्दूवाद की वापसी’ में मैंने हिन्दू धर्म को आज दिखायी देने वाली ज़्यादतियों और विकृतियों से मुक्त करके इसके सच्चे और मूल स्वरूप और मर्म को फिर से स्थापित करने के उपायों की चर्चा की है, जो कई पहलुओं से इक्कीसवीं सदी के लिए लगभग एक आदर्श धर्म हो सकता है।
 
वस्तुत: इस किताब में 'हिन्दुत्व' और ‘हिन्दूवाद’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए 'भारतीयता' के वास्तविक अर्थ को उद्घाटित किया गया है। शशि थरूर अपनी किताब में बताते हैं कि 1980 के दशक से हिन्दुत्व का जो असहिष्णु और प्राय: हिंसक स्वरूप जो भारतीय जनमानस पर हावी होने लगा है, वह हिन्दूवाद की भावना के बिल्कुल विपरीत है। निष्कर्ष रूप में वे यह स्थापित करते हैं कि हिन्दू धर्म विश्व का सबसे बहुलवादी, समावेशी, उदार और विस्तृत धर्म है।
 
लेखक इस स्थापना के लिए हिन्दू धर्म के अतीत और वर्तमान के ग्रन्थों, धारणाओं, आस्थाओं, मान्यताओं की गहन यात्रा के साथ सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं। यह किताब लेखक के आन्तरिक अध्ययन की आत्माभिव्यक्ति है।
 
शशि थरूर विख्यात आलोचक एवं स्तम्भकार होने के साथ-साथ 15 कथा-साहित्य एवं अन्य पुस्तकों के लोकप्रिय लेखक हैं। आपकी पुस्तकों में महत्वपूर्ण व्यंग्य पुस्तक ‘द ग्रेट इंडियन नॉवेल’ (1989), ‘इंडिया : फ्रॉम मिडनाइट टू द मिलेनियम’ (1997), ‘इंडिया शास्त्र :  रिफलैक्शन्स ऑन द नेशन इन आवर टाइम’ (2015) और हाल ही में ‘अंधकार काल : भारत में ब्रिटिश साम्राज्य’ (2017) ’शामिल हैं। 
 
वे संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और भारत सरकार के पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री और विदेशी मामलों के पूर्व राज्य मंत्री रहे हैं। वे तिरुवनन्तपुरम से दो बार लोकसभा सदस्य रहे हैं और संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। उन्हें ‘कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज़’ सहित अनेक साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं और एनडीटीवी द्वारा उन्हें ‘न्यू एज पॉलिटिशियन ऑफ़ द इयर 2010’  से सम्मानित किया गया। उन्हें विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘प्रवासी भारतीय सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।


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कौन हैं चर्चाकार देवी प्रसाद त्रिपाठी,  डी पी टी के नाम से लोकप्रिय।
 
जन्म: 29 नवंबर 1952, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश। कवि, साहित्यकार और लेखक हैं। साथ ही ‘थिंक इंडिया जर्नल’ के प्रमुख सम्पादक। कई भाषाओं में अनेक पुस्तकें प्रकाशित। राज्यसभा के पूर्व सांसद और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव व मुख्य प्रवक्ता हैं।
 
जानिए दूसरी चर्चाकार तसलीमा नसरीन को 
 
तसलीमा नसरीन का जन्म 25 अगस्त, 1962 को बांग्लादेश के मैमनसिंह क़स्बे में हुआ। मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. करने के बाद सरकारी अस्पतालों में नौकरी। नौकरी करनी है तो लिखना छोड़ना होगा’, इस सरकारी निर्देश पर नौकरी से इस्तीफ़ा। धर्म और पितृसत्ता, औरत की आज़ादी में सबसे बड़ी बाधा है- बेबाक लफ़्ज़ों में इस सच्चाई को उजागर करते हुए, धर्म, औरत की अवमानना कैसे करता है, इसका साफ़-साफ़ बयान। इसके लिए सिर्फ़ पुरातनपंथी धार्मिक लोगों के हमलों का ही शिकार नहीं हुईं, बल्कि देश-व्यवस्था और पुरुष-प्रधान समाज ने भी उनके खिलाफ़ जंग का ऐलान कर दिया। कट्टर धार्मिक मौलवी-मुल्लाओं ने भी उनकी फांसी की मांग करते हुए देश-भर में आंदोलन छेड़ दिया। उसके बाद से निर्वासन की ज़िंदगी बिता रही हैं। उन्होंने भारत में स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन किया है। आत्मकथा, उपन्यास, कहानी संग्रह, कविता संग्रह, निबंध और स्त्री विमर्श पर उनकी दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
 
मिलते हैं राहुल देव से 
 
राहुल देव पत्रकारिता में जाना-माना नाम है। उन्होंने ‘माया’, ‘जनसत्ता’ जैसे स्थापित पत्र-पत्रिकाओं में महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य करने के साथ ‘आजतक’, ‘दूरदर्शन’, ‘ज़ी न्यूज़’, ‘जनमत’, ‘इण्डिया न्यूज़’, आदि चैनलों में महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया है। ‘माधवराव सप्रे पत्रकारिता पुरस्कार’, ‘अवध रत्न’ जैसे अनेक पुरस्कारों के साथ उन्हें भारत के राष्ट्रपति जी द्वारा ‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हिन्दी भाषा के प्रति उनका समर्पण और स्नेह जगजाहिर है। 
 
वाणी प्रकाशन के बारे में 
 
वाणी प्रकाशन 55 वर्षों से 32 साहित्य की नवीनतम विधाओं से भी अधिक में, बेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा है। वाणी प्रकाशन ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। वाणी प्रकाशन ने देश के 3,00,000 से भी अधिक गांव, 2,800 क़स्बे, 54 मुख्य नगर और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। 

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