Hindi Literature Poems 3
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संगत
जो शाश्वत प्रकृति है उसमें पहाड़ है
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आकाशगंगा को आवाज देती घास
धुँध से उठती धुन
हम पर पत्तियाँ गिर रही हैं
फूल को कुतरती है चिड़िया
रूदन जो पहुँचता है ऊपर ईश्वर के सिंहासन तक
प्रकृति कविता है, मनुष्य गद्य या कथा
सर्द सन्नाटा है, तन्हाई है, कुछ बात करो
जहाँ थोड़ा सा सूर्योदय होगा
छोटी-छोटी ख्वाहिशें हैं कुछ उसके दिल में
रात हमारी तो चाँद की सहेली है
उड़ चल कहीं, बह चल कहीं, दिल खुश जहाँ
जैसे चुपचाप बरसता है तसव्वुर तेरा
इस एक और रात में ये देखो तो क्या होता है
कोंपलों की उदास आँखों में आँसुओं की नमी
चाँद चुरा के लाया हूँ
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