जलने दो उसे फिदाई आतंकवाद की आग में।
धर्मांधता की खोह में मुंह ढंककर सोने दो।
आज के संसार में दोनों हैं आत्मघाती जहर।
उसे अपनी जिद पर अपने हाथों बर्बाद होने दो ।।1।।
फैक्टरियां सुस्त हैं वहां, अर्थव्यवस्था उतार पर।
कई मायनों में देश दिवालियेपन की कगार पर।
विकसित देशों के दरवाजे उनके लिए बंद हैं।
युवा हैं वहां दिग्भ्रमित, उनके करियर कुंद हैं ।।2।।
घुसपैठियों पर हमारी सख्ती ने पैदा कर दी है उनमें घुटन।
अमेरिका, मध्य-पूर्व से किए विश्वासघातों से पैदा अनबन।
प्रांतों के असंतोष से मंडरा रहा खतरा-ए-विघटन।
मतलबी चीन के शिकंजों में अब उसकी गरदन ।।3।।
जहां हो सर्वशक्तिमान वहां सिविल सत्ता कहां टिक पाएगी।
सेना तो भस्मासुर है, दूसरों को नहीं तो खुद को खाएगी।
(सत्ता/ सुविधा की कमी होते ही लाल-लाल आंखें दिखाएगी)।
सेना, धर्मांधता, आतंकवाद तो चक्रव्यूह हैं, भंवर हैं।
इनमें फंसे राष्ट्र को कोई दुआ न बचा पाएगी ।।4।।
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डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय....
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