Hindi Poems %e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%93%e0%a4%82 %e0%a4%95%e0%a5%87 %e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%9d%e0%a4%b0 %e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82 110082700031_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

आँसुओं के पतझर में

दीपाली पाटील

Advertiesment
प्रतिच्छाया
ND
नि:शब्द था पर एक अनुबंध था
हम नहीं बिछड़ेंगे कभी
आँसुओं के पतझर में
सुंदर स्मृतियों से भरकर
एक-दूसरे का दामन
हम कहेंगे अलविदा।
पर बस निमिष मात्र को
हमें मिलना था
इस जीवन से परे भी
विश्वास की अग्नि के समक्ष
हम चल रहे थे सात कदम
जन्म-जन्मांतर के लिए।
एक धुँधली-सी याद है
एक क्षण को बीच में थे
धर्म, समाज, नियम के बंधन
webdunia
ND
प्रेम की शक्ति से नियमों के द्वंद्व में
जब जीतने को था विश्वास
उसने जाने क्यों मान ली हार,
देखा नहीं मुड़कर कभी फिर
मैं युगों से प्रतिच्छाया-सी
चल रही हूँ
उसके कदमों पर रख कर कदम
भूलाकर अपने अस्तित्व का क्रंदन।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi