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पौष अमावस्या: पितृ कृपा और सूर्य साधना का पावन संगम

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WD Feature Desk

, गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 (14:43 IST)
Paush Amavasya 2025: भारतीय कालगणना में पौष मास को आध्यात्मिक गहराई और आत्म-चिंतन का महीना माना जाता है। जब इस मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि यानी 'पौष अमावस्या' का आगमन होता है, तो यह अपने साथ पूर्वजों के आशीर्वाद और ग्रहों के दोष निवारण का एक सुनहरा अवसर लेकर आती है। इसे 'छोटा पितृ पक्ष' कहना भी गलत नहीं होगा, क्योंकि इस दिन की गई साधना सीधे हमारे पितरों तक पहुँचती है।
 
श्रद्धा और संकल्प: इस दिन क्या करें?
पौष अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि पितृ ऋण से मुक्त होने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। इस दिन की जाने वाली क्रियाएँ मनुष्य के जीवन में स्थिरता लाती हैं।
 
1. अमृत स्नान और अर्घ्य: ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान कर अपने दिन की शुरुआत करें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल पुष्प लेकर भगवान भास्कर (सूर्य) को अर्घ्य दें। यह न केवल स्वास्थ्य प्रदान करता है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।
 
2. पितृ तर्पण: पौष अमावस्या पर पितरों के निमित्त जल और तिल से तर्पण करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध पूर्वजों की आत्मा को असीम तृप्ति देता है।
 
3. दोष निवारण उपवास: यदि कुंडली में पितृ दोष या कालसर्प दोष जैसी बाधाएं हैं, या संतान प्राप्ति में विलंब हो रहा है, तो इस दिन का उपवास और दान किसी वरदान से कम नहीं है।
 
4. प्रकृति पूजन: इस पावन तिथि पर पीपल के वृक्ष का पूजन और तुलसी की परिक्रमा करना सौभाग्य की वृद्धि करता है।
 
पौष अमावस्या का विशेष महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों में इस अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इसकी महिमा कुछ विशेष कारणों से और बढ़ जाती है:
 
1. सर्वदेव तृप्ति: ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितरों के लिए किया गया व्रत न केवल हमारे पूर्वजों को बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, अग्नि और वायु जैसे देवताओं सहित समस्त जड़-चेतन जगत को संतुष्ट करता है।
 
2. दान का फल: किसी जरूरतमंद को गर्म कपड़े या अन्न का दान करना इस ठिठुरते महीने में अनंत फलदायी होता है।
 
3. भविष्य का संकेत: हमारे मनीषी पौष मास के मौसम और वायु की गति को देखकर आने वाले वर्ष की वर्षा और फसलों का अनुमान लगाते थे। यह तिथि प्रकृति और मनुष्य के गहरे संबंध को भी दर्शाती है।
 
4. महत्व: पौष अमावस्या हमें अपनी जड़ों (पितरों) से जुड़ने और सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने का संदेश देती है। यदि आप जीवन में मानसिक अशांति या कार्यों में रुकावट का सामना कर रहे हैं, तो इस अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक किया गया पूजन आपके जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोल सकता है।

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