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उदयपुर : राजस्थान की प्राचीन लोक परंपराएं आज भी लुभाती हैं देश-विदेश के पर्यटकों को

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- श्रीमती मैत्रेयी रत्नेश सिधये
 

उदयपुर : पर्यटकों के मन को मोह लेता है राजस्थान का यह ऐतिहासिक स्थान

 
'राजाओं की धरती' राजस्थान देश के पश्चिमोत्तर में स्थित भारत गणराज्य का सबसे बड़ा राज्य है। दूर तक फैला रेगिस्तान, विशाल दुर्ग, कई पौराणिक मंदिर, रंग बिरंगे परिधान, ऊंट की राजसी सवारी, प्राचीन लोक परंपराएं और समृद्ध हस्तशिल्प इस राज्य की पहचान है। राजस्थान का कण-कण अपने अंदर एक विशाल और गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है।
 
ऐतिहासिक रूप से राजस्थान मेवाड़, भरतपुर, कोटा, जयपुर, बूंदी, मारवाड़, अलवर आदि रियासतों में बटा हुआ है। अरावली की अभेद्य एवं मनमोहक पर्वत श्रृंखलाओं के बिच राजस्थान का मेवाड़ राज्य स्थित है। अभूतपूर्व शौर्य, त्याग, राजपूती प्रतिष्ठा के परिचायक मेवाड़ की वीर प्रसूता भूमि ने रावल बप्पा, राणा कुम्भा, राणा सांगा, राणा प्रताप जैसे वीरो को जन्म दिया। वही यह रानी कर्णावती, रानी पद्मिनी एवं पन्ना धाय जैसी वीरांगनाओं की भी भूमि रहा है। मेवाड़ पर मुख्यतः गहलोत राजवंश का शासन रहा।
 
चित्तौड़ कई वर्षों तक मेवाड़ की राजधानी रहा। लगातार मुगलों के आक्रमणों के चलते सुरक्षित स्थान पर राजधानी स्थानांतरित किए जाने की योजना के तहत राणा उदय सिंह ने 1559 ई। में उदयपुर नगर की स्थापना की और इसे मेवाड़ की नै राजधानी बनाया।
 
एशिया का वेनिस- उदयपुर :- 
 
झीलों के शहर उदयपुर को 'एशिया का वेनिस' भी कहा जाता है। स्थापत्य और वास्तुकला के यूं तो राजस्थान में कई उत्कृष्ट नमूने है लेकिन उदयपुर के सिटी पैलेस की बात ही निराली है। महाराणा उदय सिंह ने पिछोला लेक के किनारे इस महल को बनवाया था। यह महल 23 पीढ़ियों से राजपरिवार का निवास स्थान भी है। सिटी पैलेस का कुछ हिस्सा पब्लिक के लिए खुला हुआ है, कुछ हिस्से में होटल है और कुछ हिस्सा महाराजा का निवास स्थान है। 
 
सिटी पैलेस :- 
 
सिटी पैलेस मार्बल का बना हुआ है यह एक बड़ी-सी शिप के आकर का है। जो भाग पब्लिक के लिए खुला हुआ है उसके दो हिस्से हैं। मर्दाना महल और ज़नाना महल। मर्दाना महल मे कई संग्रहालय और दार्शनिक स्थल हैं जैसे, बड़ी पॉल, तोरण, त्रिपोलिया, मानक चौक, असलहखाना, गणेश देवडी, राई आंगन, प्रताप हल्दी घाटी कक्ष, बाड़ी महल, दिलखुश महल, कांच की बुर्ज और मोर चौक। जबकि ज़नाना महल में है, सिल्वर गैलरी, आर्किटेक्चर और कन्सर्वेशन गैलरी, स्कल्प्चर गैलरी, म्यूज़िक, फोटोग्राफी, पैंटिंग और टेक्सटाइल व कॉस्ट्यूम गैलरी। सिटी पैलेस और मेवाड़ के इतिहास से रूबरू होने में 2-3 घंटे का समय लगता है। सिटी पैलेस पर्यटकों के लिए सुबह 9:30 से शाम 5:30 तक खुला रहता है। यहां का प्रवेश शुल्क 30 रु. वयस्कों के लिए एवं 15 रु. अवयस्कों के लिए है। साथ ही यदि आप कैमरा अंदर ले जाना चाहते है तो आप को 200 रु. अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

 
पिछोला झील :- 
 
सिटी पैलेस के झरोंखो से विशाल पिछोला झील नज़र आती है। 1362 ईस्वी में महाराणा लक्ष के युग के दौरान पिचु बंजारा ने इस कृत्रिम झील का निर्माण करवाया था। झील अरावली पर्वत, महल और स्नान घाट से घिरी हुई है। पिछोला में नाव की सवारी सुबह जहां आनंद की अनुभूति कराती है वहीं ढलती शाम में पहाड़ों और महलों से घिरी यह झील रोमांच से भर देती है। पिछोला के अलावा उदयपुर की दूसरी बड़ी झील है फतेह सागर। इस झील का निर्माण 1678 में महाराजा जयसिंह द्वारा करवाया गया था लेकिन एक बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के कारण 1988 में महाराज फतेहसिंह ने इस झील का निर्माण पुनः करवाया था। फतेह सागर झील के किनारे लगी हुई सड़क पर शाम को स्थानीय व्यंजनों की दुकानें पर्यटकों के लिए ख़ास आकर्षण का केंद्र है। ढलती शाम में नौका विहार करते हुए झील का सौंदर्य पर्यटकों को बेहद लुभाता है।
 
 
फतेह सागर :- 
 
फतेह सागर झील के पास ही मोती मगरी स्थित है। स्थानीय भाषा में पहाड़ी अथवा ऊंचे भूभाग को मगरी कहा जाता है। इस पहाड़ी पर राणा प्रताप और उनके वफादार घोड़े चेतक का स्मारक है. बगीचे के बीचों-बीच चेतक पर सवारी करते हुए राणा प्रताप की 11 फीट ऊंची प्रतिमा है। इसके अलावा इसी पहाड़ी पर एक संग्रहालय भी स्थित है जो हल्दी घाटी के युद्ध की झलक प्रस्तुत करता है. इस पहाड़ी से अरावली रेंज और फतेह सागर झील के सुंदर दृश्य दिखाई देते है।

 
मोती मगरी :-
 
उदयपुर के मुख्य दर्शनीय स्थलों में सहेलियों की बाड़ी का भी प्रमुख स्थान है जैसा की नाम से समझ आता है सहेलियों की बाड़ी का निर्माण मेवाड़ के शासक महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710-1734) ने राजपरिवार की महिलाओं के लिए करवाया था। कहते है की महाराणा संग्राम सिंह जी ने इस उद्यान को बनवाने में स्वयं अत्यधिक रूचि ली थी। बाद में भी कई महाराणाओं ने इसके विकास में रूचि ली थी।
 
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सहेलियों की बाड़ी :- 
 
महाराणा फतेह सिंह जी ने इसमें लीवर पूल इंग्लैंड से फव्वारे मंगवा कर लगवाए थे और उन्हीं के शासन काल में उनकी रानी के कहने पर हरियाली अमावस्या के मेले में दूसरे दिन केवल महिलाओं का मेला इस उद्यान में लगने लगा था। ये उद्यान फतेह सागर तालाब के पास स्थित है तथा फतेह सागर से उद्यान तक भूमिगत पानी की पाइप लाइन बिछाई गई थी जिसके कारण उस काल में बिना बिजली तथा मोटर के बड़े जबरदस्त तरीके से फव्वारे चला करते थे। यह पूरा परिसर बेहद ही सुंदर उद्यानों और विभिन्न प्रकार के फूलों से सजा हुआ है। 
 
उदयपुर के भव्य एवं स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदहारण की बात करें तो जगदीश मंदिर का उल्लेख होना स्वाभाविक है। जगदीश मंदिर उदयपुर का बड़ा ही सुंदर, प्राचीन एवं विख्यात मंदिर है। यह मंदिर उदयपुर में रॉयल पैलेस के समीप ही स्थित है। यह मंदिर भारतीय-आर्य स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहण है। इसका निर्माण महाराणा जगत सिंह ने सन् 1651 में करवाया था, उस समय उदयपुर मेवाड़ की राजधानी था। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है यह उदयपुर का सबसे बड़ा मंदिर है। मंदिर में प्रतिष्ठापित चार हाथ वाली विष्णु की छवि काले पत्थर से बनी है। यह मंदिर 50 कलात्मक खंभों पर टिका है। मंदिर में दर्शन का समय प्रातः काल 4:15 से दोपहर 1 बजे तक, एवं सांयकाल 5:15 से लेकर रात्रि 8 बजे तक का है।

जगदीश मंदिर :- 
 
 
उदयपुर अपनी झीलों और महलों के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यहां के बाजार भी आपको खरीददारी के लिए लुभाते है। अगर आप खरीददारी के शौकीन है तो शिल्पग्राम अवश्य जाएं। यह फतेह सागर झील के नज़दीक उदयपुर के बाहरी इलाके में स्थित है, यहां एक पारंपरिक हाट (बाजार) है जिसमें मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी और टेराकोटा कारीगरी के सामान के साथ फर्नीचर और दूसरे सामान बेचे जाते हैं।

स्थानीय कारीगर और कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, इसके अलावा ऊंट और घोड़े की सवारी का भी मजा लिया जा सकता है। यहां एक खुली हवा में बना रेस्तरां भी है। इसके अलावा एक बहुत बड़ा बाजार आपको सिटी पैलेस के पास भी मिलेगा जो स्थानीय जेवरों, जूतियों, झोले, कपडें, घरों को सजाने वाली तरह-तरह की चीज़ों से भरा है। 
 
राजस्थान का महत्वपूर्ण शहर होने की वजह से उदयपुर सड़क, रेल एवं हवाई मार्ग से सभी महत्वपूर्ण स्थानों से जुड़ा हुआ है। उदयपुर बेहद खुशमिजाज और अपनेपन से भरा शहर है आपकी उदयपुर यात्रा निश्चित ही यादगार यात्राओं में से एक होगी।

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