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कितनी पुरानी है भारत और चीन की रंजिश, जानिए कैसे बने दुश्मन

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 12 अगस्त 2025 (14:30 IST)
india china relations history: भारत और चीन, दो प्राचीन सभ्यताएँ जो सदियों से एक-दूसरे के पड़ोसी हैं। 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के नारे से शुरू हुआ रिश्ता आज कड़वाहट और सीमा विवाद से भरा है। लेकिन यह रंजिश शुरू कब हुई और इसके पीछे क्या ऐतिहासिक कारण हैं? यह समझना ज़रूरी है कि यह दुश्मनी अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि इसकी जड़ें ब्रिटिश काल और दोनों देशों के स्वतंत्र होने के बाद की नीतियों में छिपी हैं।
 
अंग्रेजों का 'शिमला समझौता' और मैकमोहन रेखा
भारत और चीन के बीच विवाद की शुरुआत मैकमोहन रेखा से होती है। यह एक सीमा रेखा है जो 1914 में ब्रिटिश सरकार, तिब्बत और चीन के प्रतिनिधियों के बीच शिमला में हुए एक समझौते के दौरान खींची गई थी। इस रेखा ने तिब्बत और ब्रिटिश भारत (आज का अरुणाचल प्रदेश) के बीच की सीमा को परिभाषित किया।
 
  • चीन की आपत्ति: 1947 में जब भारत को स्वाधीनता मिली और 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का गठन हुआ, तो चीन ने इस समझौते को मानने से इनकार कर दिया। उसका तर्क था कि यह समझौता ब्रिटिश सरकार और उस समय की तिब्बती सरकार के बीच हुआ था, जो एक स्वतंत्र देश नहीं था। चीन तिब्बत को हमेशा से अपना हिस्सा बताता था, इसलिए वह मैकमोहन रेखा को अवैध बताता रहा।
 
अरुणाचल प्रदेश का विवाद और चीन 
सीमा विवाद का एक और महत्वपूर्ण बिंदु अरुणाचल प्रदेश का दर्जा था। चीन ने हमेशा से अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिणी तिब्बत' का हिस्सा माना है।
भारत की प्रतिक्रिया: 20 जनवरी 1972 को भारत ने अरुणाचल प्रदेश को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाकर इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा'। भारत ने तिब्बत को भी एक अलग देश का दर्जा दिया, जिससे चीन और भी भड़क गया।
नक्शों का खेल: चीन ने मैकमोहन रेखा का उल्लंघन करना शुरू कर दिया। यही नहीं, 1958 में चीन ने एक नया आधिकारिक नक्शा प्रकाशित किया, जिसमें उसने न सिर्फ पूरे पूर्वोत्तर भारत (अरुणाचल प्रदेश सहित) पर, बल्कि लद्दाख, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को भी अपना बताया।
 
नेहरू का दृढ़ निश्चय और 1962 का युद्ध
चीन की इन हरकतों के जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाया। 14 दिसंबर 1958 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चीन की मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ये सभी क्षेत्र भारत के अभिन्न अंग हैं और इस पर कोई शंका नहीं होनी चाहिए।
1962 का हमला: नेहरू के इस जवाब के बाद, चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति के तहत 20 अक्टूबर 1962 को भारत पर अचानक हमला कर दिया। चीनी सेना ने एक साथ लद्दाख और मैकमोहन रेखा, दोनों जगहों पर आक्रमण किया। यह युद्ध 21 नवंबर 1962 तक चला और चीन ने खुद ही एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर अपने कदम पीछे खींच लिए।
 
आज भी जारी है तनाव
1962 के युद्ध के बाद से ही भारत और चीन के बीच सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है। सीमा पर दोनों ओर के सैनिकों में झड़पें होती रहती हैं, हालांकि हाल के दिनों में इसमें कुछ कमी देखने को मिली है। डोकलाम, गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो झील जैसे क्षेत्रों में हुई झड़पें इस बात का प्रमाण हैं कि यह रंजिश आज भी जीवित है।
 
यह ऐतिहासिक सफर बताता है कि भारत-चीन संबंधों में तनाव की जड़ें 20वीं सदी की भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं में निहित हैं। जहां एक ओर भारत अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं दूसरी ओर चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों को जारी रखे हुए है। यह रंजिश तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक दोनों देश एक स्थायी और शांतिपूर्ण सीमा समाधान पर नहीं पहुंच जाते।
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