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Adi Shankaracharya: जयंती विशेष: आदि शंकराचार्य के बारे में 10 अद्भुत बातें जो हर हिन्दू को जाननी चाहिए

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आदि शंकराचार्य का फोटो
Adi Shankaracharya life story: आद्य शंकराचार्य भारतीय दर्शन और वेदांत के अद्वैत मत के महान शिक्षक और संत थे। वे केवल एक संत नहीं बल्कि धार्मिक पुनरुत्थानकर्ता, तात्त्विक विचारक और समाज सुधारक भी थे। शंकराचार्य ने यह स्पष्ट किया कि आत्मा और ब्रह्म एक हैं, और सारा जगत माया है। उनके जीवन और ग्रंथों में यह संदेश मिलता है कि केवल आत्मज्ञान और भक्ति से ही मोक्ष संभव है।ALSO READ: Saint Surdas Jyanati: संत सूरदास कौन थे, जानें उनके जीवन की 5 अनसुनी बातें
 

आइए जानते हैं उनके जीवन की 10 सबसे खास बातें:

 

1. जन्म और समय

आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के मालाबार क्षेत्र के कालड़ी में हुआ था। उनके जन्म और मृत्यु के समय को लेकर विभिन्न मत हैं, लेकिन माना जाता है कि उन्होंने बहुत ही कम उम्र में ही ज्ञान और धर्म की सेवा शुरू कर दी थी।
 

2. माता-पिता

उनके माता-पिता शिवगुरु और आर्याम्बा थे। कालड़ी गांव में जन्म लेने वाले शंकराचार्य ने अपने जीवन की शुरुआत धार्मिक और विद्वान वातावरण में की।

 

3. चार मठों की स्थापना

आदि शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म को संगठित करने के लिए चार मठ बनाए।
 
* उत्तर: बद्रिकाश्रम में ज्योर्तिमठ
* पश्चिम: द्वारिका में शारदामठ
* दक्षिण: श्रंगेरी मठ
* पूर्व: जगन्नाथ पुरी में गोवर्धन मठ
 

4. दसनामी संप्रदाय

उन्होंने दस संप्रदायों (दसनामी) की स्थापना की, जिनमें गिरि, पर्वत, सागर, पुरी, भारती, सरस्वती, वन, अरण्य, तीर्थ और आश्रम शामिल हैं। यह संप्रदाय हिन्दू धर्म में साधु-संप्रदाय को संगठित करने का महत्वपूर्ण आधार बना।
 

5. चार प्रमुख शिष्य

शंकराचार्य के प्रमुख शिष्य थे पद्मपाद, हस्तामलक, मंडन मिश्र और तोटकाचार्य। ये शिष्य चारों वर्णों से थे और अपने गुरु के दर्शन और शिक्षाओं का प्रचार करते थे।
 

6. राजा सुधनवा के समय

शंकराचार्य के समय जैन राजा सुधनवा राज्य करते थे। शंकराचार्य ने वैदिक धर्म का प्रचार कर उन्हें भी प्रभावित किया। राजा ने बाद में वैदिक धर्म को अपनाया और उनका ताम्रपत्र इतिहास में सुरक्षित है। आदि शंकराचार्य की मृत्यु के एक महीने पहले यह ताम्रपत्र लिखा गया था। 
 
 

7. सहपाठी और संदर्भ

उनके सहपाठी चित्तसुखाचार्य ने ‘बृहतशंकर विजय’ में शंकराचार्य के जन्म और जीवन का उल्लेख किया। यह ग्रंथ आज तो पूरी तरह उपलब्ध नहीं है, लेकिन दो श्लोक इस तथ्य को प्रमाणित करते हैं।
 

8. महत्वपूर्ण ग्रंथ

शंकराचार्य ने ब्रह्मसूत्र भाष्य के साथ ग्यारह उपनिषदों और गीता पर भी भाष्य लिखा। इसके अलावा उन्होंने स्तोत्र और अन्य साहित्य रचकर वैदिक धर्म और दर्शन का प्रचार किया।
 

9. महान अद्वैत दर्शन

उनका दर्शन अद्वैत वेदांत कहलाता है। उन्होंने यह सिखाया कि ‘ब्रह्म ही सत्य है और जगत माया’। आत्मा का लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है।
 

10. समाधी और योगदान

आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ में समाधि ली। उन्होंने केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और आज भी उनका योगदान श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: लिंगायत समाज के संस्थापक बसवेश्वर महाराज के बारे में 6 रोचक बातें

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