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प्रदेश के सबसे बड़े अस्‍पताल में चूहा काटने से बच्‍ची की मौत, डॉक्‍टर या प्रशासन, कौन लेगा जवाबदारी?

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महाराजा यशवंत राव अस्‍पताल यानी इंदौर का एमवाय हॉस्‍पिटल प्रदेश के सबसे बड़े अस्‍पतालों में शूमार है। यहां गरीब मरीज अपने और अपने बच्‍चों के इलाज की आस में आता है, लेकिन यहां की लापरवाही देखिए कि चूहों के काटने पर नवजात की मौत हो जाती है।
इतनी बड़ी लापरवाही के बाद अस्‍पताल प्रशासन ने स्‍टाफ के तीन लोगों को हटाकर अपनी जिम्‍मेदारी से पल्‍ला झाड़ लिया। बता दें कि NICU में चूहे कुतरने के बाद हुई एक बच्‍चे की मौत के बाद एमवायएच के 2 नर्सिंग ऑफिसर को सस्पेंड जबकि  नर्सिंग सुपरिटेंडेंट को हटाया गया है।

चूहा काटने के बाद बच्‍चे की मौत : बता दें कि इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों ने जिन दो नवजातों के हाथ कुतरे थे, उनमें से एक बच्‍चे की मंगलवार को मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने चूहे के काटने के कारण मौत होने की बात से इनकार किया है। MGM मेडिकल कॉलेज के डीन ने ड्यूटी नर्स को निलंबित कर दिया। HOD और एमवाय अधीक्षक को दिया कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नर्सिंग अधीक्षक को भी हटाया गया।

अब टीम करेगी जांच : हादसे के बाद 5 डॉक्टरों की टीम मामले की जांच करेगी। चूहों ने दो बच्चों को कटा था, दूसरे बच्चे की स्थिति गंभीर है। पेस्ट कंट्रोल करने वाली कंपनी पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। घटना के बाद परिजनों में गुस्सा और आक्रोश का माहौल है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने भी अस्पताल प्रबंधन की पोल खोल दी है, जिसमें नवजातों के बॉक्स में चूहे घूमते साफ नजर आ रहे हैं।

वीडियो वायरल न होता तो पता भी नहीं चलता : पेडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में भर्ती इन दो बच्चों को रविवार और सोमवार को चूहों ने काटा था, जिसमें उनके हाथ पैर और कंधों में घाव हो गए थे। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने जांच कमेटी बनाई दो नर्सों को सस्पेंड किया। डीन अरविंद घनघोरिया का कहना है कि दोनों बच्चे पहले से आंतरिक विकसित नहीं थे, उन्हें इलाज के लिए एमवाय अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज चल ही रहा था, इस दौरान उन्हें चूहों ने काटा जिसमें से एक बच्चे की मौत हो गई।

12 हजार चूहे मारने का दावा : इस मामले में एमवाय अस्पताल अधीक्षक जांच कर रहे हैं, एक कमेटी बनाई है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर आगे कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन अब तक 12 हजार से ज्यादा चूहों को मारने का दावा कर चुका है और इसके लिए 10 हजार से अधिक का बिल भी पास किया गया। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में चूहों की भरमार लगातार बनी हुई है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

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