स्किल डेवलपमेंट फॉर सस्टेनेबल लाइवलीहुड इन रूरल इण्डिया विषय पर कार्यशाला

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019 (17:59 IST)
प्रधान मंत्री कौशल विकास सेंटर पर सोलर कुकिंग फूड प्रोसेसिंग विशेषज्ञों, प्रो अजय चांडक, श्री घनश्याम लुखी, श्री दीपक गढ़िया, डॉ जनक पलटा मगिलिगन ने जिम्मी मगिलिगन की याद में सोलर कुकिंग व फूड प्रोसेसिंग यूनिट का शुभारंभ किया। इसके बाद स्किल डेवलपमेंट फॉर सस्टेनेबल लाइवलीहुड इन रूरल इण्डिया विषय पर कार्यशाला आयोजित शुरू हुई। 
 
सौरभ सेठी सीइओ प्राधान मंत्री कौशल विकास सेंटर 70000 से 80000 प्रतिवर्ष बच्चों को प्रशिक्षण, बढ़िया कीमा , एम पी में एक मात्र सेंटर है जिसमें कृषि की ट्रेनिंग दी जाती है। 
 
इस मौके पर जनक पलटा मगिलिगन ने बताया कि भारत के विकास के लिए सस्टेनेबल फार्मिंग एवं कुशल किसान कैसे आत्मनिर्भर किया जा सकता है। तथा इसके द्वारा कैसे भारत को स्वावलंबन जैसे आत्मनिर्भर बना कैसे भारत को विश्वगुरु बनाया जा सकता है। इस मिशन के द्वारा कैसे भारत को कुशल व आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उनका कहना था कि सिर्फ नौकरियों से ही देश नहीं चल सकता। हमें ऐसा भारत चाहिए जहां सब समान हो। हमें देश को बचाना है। जीव जंतु व वनस्पति के साथ हमे अपने संसाधनों को बचा कर रखना है ताकि वे आगे काम आए। 
 
हमें अपने भारत की जय करना है। जैविक खेती व हाट के माध्यम से हमें ग्रामीण व ग्राहकों को जोड़कर हर एक ग्रामीण क्षेत्र को जैविक बनाना है। प्रोडक्ट को वेल्यु देकर ही आर्थिक विकास होगा। 
 
चांडक जी का कहना था कि हमें सोचना है कि जो हम काम कर रहे हैं उससे किसी का भला हो रहा है। रिनवेबल और वेस्ट मैनेजमेंट एक बहुत बड़ा अवसर का क्षेत्र है। रिसर्च और डेवलपमेन्ट प्रोसेस में सभी फेल होते हैं, पर उसमें सुधार होते रहना चाहिए। 
 
पानी का उपयोग या पानी का जो भी काम है उसको वापस 90% पानी का फिर से उपयोग करना चाहिए। एल पी जी सिर्फ इमरजेंसी में उपयोग होता है। रिनवेबल एनर्जी का 5% ही उपयोग होता है।
 
घनश्याम जी ने कहा कि फेलियर इन केमिकल फेक्ट्री जो कि तीन साल से चला रहे थे, फिर उनके दोस्त के एक कमिटमेंट, जिसके अनुसार -  'जो खाता है उसे बनाता क्यों नहीं' से जीवन मे टूटी- फूटी व फूड प्रोसेस में आने का मोटिवेशन मिला। उनके अनुसार एंटरप्रेन्योर होने के लिए इच्छा शक्ति होना आवश्यक है। इंटरनल हैप्पीनेस मन का काम करने से आती है और सबसे बड़ा चैलेंज है खुद से लड़ाई। इस सोच को तोड़कर आगे जाना है। व बुरी से बुरी परिस्थिति पर काम करना चाहिए। इसके लिए बिलिव सिस्टम होना चाहिए। उनका कहना था कि सबसे बड़ा रोग, क्या सोचेंगे लोग।

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