Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 (15:45 IST)
Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 (15:47 IST)
मध्य प्रदेश में डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मई 2021 से जुलाई 2025 के बीच प्रदेश के लोग साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में 1,054 करोड़ रुपये से अधिक गंवा चुके हैं। अकेले वर्ष 2025 में ही 55 हजार से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें करीब 581 करोड़ रुपये की ठगी की सूचना मिली है।
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर भी इस खतरे से अछूती नहीं है। यहां रोजाना ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश, सोशल मीडिया हैकिंग और ओटीपी ठगी से जुड़ी शिकायतें पुलिस और साइबर हेल्पलाइन तक पहुंच रही हैं। साइबर अपराधी फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप, ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ओटीपी फ्रॉड सबसे आम तरीका बन चुका है। ठग खुद को बैंक अधिकारी, कस्टमर केयर, बीमा एजेंट या सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों को बातचीत में उलझाते हैं और केवाईसी अपडेट, खाता बंद होने या भुगतान अटकने का डर दिखाकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं। ओटीपी साझा करते ही खाते से रकम निकाल ली जाती है।
बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए सरकार, बैंक और टेलीकॉम कंपनियां सुरक्षा उपाय मजबूत कर रही हैं। दूरसंचार विभाग का 'संचार साथी' पोर्टल संदिग्ध कॉल और संदेशों की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देता है।
एयरटेल ने हाल ही में ओटीपी फ्रॉड अलर्ट फीचर लॉन्च किया है, जो संदिग्ध कॉल के दौरान प्राप्त बैंकिंग ओटीपी पर रियल-टाइम चेतावनी देकर ग्राहकों को सतर्क करता है। कंपनी एआई आधारित स्पैम डिटेक्शन तकनीक का भी उपयोग कर रही है और नेटवर्क स्तर पर धोखाधड़ी पहचानने वाली तकनीक का भी उपयोग कर रही है, जो संदिग्ध वेबसाइटों तक पहुंच रोकने में मदद करती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक, छात्र और पहली बार डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले लोग सबसे ज्यादा निशाने पर रहते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा न करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और कस्टमर केयर नंबर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। थोड़ी-सी सावधानी लाखों रुपये की साइबर ठगी से बचा सकती है।
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