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इंदौर में 2 डॉक्टरों पर गैर-इरादतन हत्या का केस, एनेस्थेसिया ओवरडोज ने ली थी 17 साल के इकलौते चिराग की जान

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Two doctors in Indore booked for culpable homicide not amounting to murder
इंदौर में अस्‍पतालों से लेकर डॉक्‍टरों तक की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में दो डॉक्‍टरों ने लापरवाहीपूर्वक इलाज कर एक 17 साल के लड़के की जान ले ली। अब डॉक्‍टरों पर गैर-इरादतन हत्या का केस चलेगा। इस मामले में इंदौर जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस घटना के बाद एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया।

कैसे हुई थी अमित की मौत : बता दें कि इंदौर में 17 साल के अमित की सर्जरी के दौरान एनेस्थेसिया के ओवरडोज से हुई मौत के मामले में कोर्ट ने दो डॉक्टरों पर गैरइरादतन हत्या (धारा 304) के तहत आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने आरोपमुक्त करने वाली याचिका को खारिज किया है।

कोर्ट ने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुश बंडी और एनेस्थेटिस्ट डॉ. खुशबू चौहान के खिलाफ भादंवि की धारा 304 (भाग-2) के तहत आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला एनेस्थेसिया के कथित ओवरडोज से जुड़ा है, जिसके चलते एक परिवार ने अपना इकलौता चिराग खो दिया था। अब इन डॉक्टरों के खिलाफ कोर्ट में सबूतों के आधार पर नियमित मुकदमा (ट्रायल) चलेगा, जिसकी अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।

ऑपरेशन के दौरान बिगड़ी थी तबीयत : बता दें कि यह घटना 29 मई 2023 की है। लसूडिया थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल हुए अमित सेन को इलाज के लिए राजश्री नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। अमित के बाएं पैर की सर्जरी होनी थी। परिजनों का आरोप है कि सर्जरी से पहले बेहोशी का इंजेक्शन (एनेस्थेसिया) देने के कुछ ही देर बाद अमित की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और उसकी मौत हो गई।

जांच में खुली अस्पताल की पोल : घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने नर्सिंग होम का निरीक्षण किया था। जांच रिपोर्ट में एनेस्थेसिया के ओवरडोज के साथ-साथ कई तकनीकी और चिकित्सीय खामियां पाई गईं। इसके बाद जिला प्रशासन ने राजश्री नर्सिंग होम को सील कर दिया था। मृतक अमित अपने पिता रिंकू सेन का इकलौता पुत्र था, जिसकी मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया था।

एनेस्थेसिया के ओवरडोज से हुई मौत : पुलिस जांच में सामने आया कि अमित सेन की मौत एनेस्थेसिया के ओवरडोज और इलाज में भारी लापरवाही के कारण हुई थी। शुरुआत में अस्पताल के मालिक डॉ. देवेंद्र भार्गव सहित तीन डॉक्टरों (डॉ. कुश बंडी और डॉ. खुशबू चौहान) पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ था। लेकिन फरवरी 2024 में डॉ. भार्गव की मौत हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई। अब बाकी बचे दो डॉक्टरों के खिलाफ कोर्ट में केस की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

कोर्ट ने खारिज की डॉक्टरों की दलीलें : आरोपी डॉक्टरों, डॉ. कुश बंडी और डॉ. खुशबू चौहान ने कोर्ट में खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए आवेदन दिया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त सबूत पेश करते हुए डॉक्टरों की लापरवाही को सामने लाई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डॉक्टरों की याचिका खारिज कर दी और माना कि उनके खिलाफ ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब मामले में 2 मार्च से ट्रायल शुरू होगा।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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