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हरियल पंछी : एक अनोखा पक्षी जो अपने पैर कभी धरती पर नहीं रखता, अपनी लकड़ी साथ में रखता है...

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hariyal bird in hindi 
 
हमारे हरि हरिल की लकरी... यह गीत अक्सर आपने सुना होगा, क्या आप जानते हैं कि इसका क्या अर्थ है, कौन है हरिल, हारिल, हरियल पंछी? और हारिल की लकड़ी का क्या अर्थ है? मुहावरे में हारिल की लकड़ी होना- यानी सदा साथ रहना माना जाता है। इस गीत में गोपियां अपनी तुलना हारिल पक्षी के लकड़ी से इसीलिए करती है कि गोपियों ने हारिल के पक्षी के समान श्री कृष्ण को अपने मन कर्म और वचन में बसा लिया। वे उसे अपने से जुदा नहीं कर सकती... अब भला इसका राज क्या है हारिल क्यों नहीं लकड़ी को अपने से जुदा करता है? 
 
हरियाल के बारे में कहा जाता है कि ये दुनिया का एकमात्र ऐसा पक्षी है जो कभी भी अपना पैर जमीन पर नहीं रखता है। हारिल जब भी जमीन पर आता है तो अपने पैरों में एक लकड़ी रखता है और जब जमीन पर आता है तो उस लकड़ी पर बैठ जाता है। इस लकड़ी को वह अपने से कभी अलग नहीं करता खासकर जब वह जमीन पर आता है। 
 
जी हां भारत के महाराष्ट्र राज्य का राजकीय पक्षी हरियल अपना पैर कभी धरती पर नहीं रखता है। इसे ऊंचे पेड़ वाले जंगल पसंद हैं। यह अक्सर अपना घोंसला पीपल और बरगद के पेड़ पर बनाते हैं। 
 
हरियल को हरियाल और हारिल पक्षी भी कहा जाता है। अंग्रेजी में The yellow-footed green pigeon कहते हैं जिसका अर्थ पीले पैरों वाला हरा कबूतर होता है।
 
हरियल या हारिल को भारतीय राज्य महाराष्ट्र का राज्य पक्षी माना गया है।
 
मजेदार तथ्य यह भी मिलता है कि हरियल पंछी शिकारी की आहट सुनकर मरने का अच्छा नाटक कर लेता है।
 
हरियल पक्षी जमीन पर क्यों नहीं बैठता है?
 
हरियाल पक्षी के बारे में मान्यता है कि यह अपने पूरे जीवन में कभी भी जमीन पर पैर नहीं रखता है, क्योंकि ये पक्षी वृक्षवासी होते हैं और अक्सर पेड़ों पर ही रहना पसंद करते हैं। 
 
हरियल पक्षी का कैमोफ़्लोज़ बड़ा अच्छा होता है, इनका रंग पत्तियों में घुल-मिल सा जाता है। दूसरा हरियल एक शर्मिला पक्षी माना जाता है इसलिए ये पक्षी इंसानों की नजरों में इतनी आसानी से नहीं आता। हरियल बर्ड के जमीन पर ना उतरने के 2 कारण हैं। हरियल पक्षी ताजा फूल, फल एवं कलियां खाते हैं। इस वजह से इन्हें पानी की आवश्यकता कम होती है और जब इन्हें पानी की आवश्यकता पड़ती है, तो यह पत्तों पर जमी हुई ओंस की बूंदों से भी अपनी प्यास बुझा सकते हैं। इस पक्षी का स्वभाव संकोची होता है, यह इंसान एवं अन्य परजीवों के सामने ठहराना ज्यादा पसंद नहीं करते। 
 
कैसा होता है हरियल, हारिल 
पीले पैर और कबूतर की तरह दिखने वाले हरियल का आकार 29 से 33 सेमी के बीच होता है। इसका वजन मात्र 225 ग्राम से 260 ग्राम के बीच होता है, यह एक सामाजिक प्राणी है और झुंडों में ही पाए जाते हैं, इनके पंखों का फैलाव 17 से 19 सेंटीमीटर लंबा होता है, इनके शरीर का रंग हल्का पीला हरा होता है जो ऑलिव के फल से मिलता-जुलता होता है।
 
अंग्रेजी में इसे The yellow-footed green pigeon कहते हैं। यह ट्रेरॉन फोनीकॉप्टेरा (Treron phoenicoptera) की प्रजाति का है। हारिल पक्षी का वैज्ञानिक नाम Treron phoenicoptera है। 
 
हारिल पक्षी क्या खाता है?
हरियल शाकाहारी होता है। इसे फल ही पसंद हैं। पीपल के अलावा यह बड़, गूलर, पीपल, अंजीर के पेड़ों के पत्ते ही खाता है। हरियल पक्षी के भोजन में अधिकतर ताजी व कुदरती चीजें अधिक होती हैं। यह पक्षी दाना बहुत ही कम खाते हैं। यह पक्षी अधिकतर फूलों की कलियां, छोटे पौधों के अंकुर, एवं बीज खाना पसंद करते हैं।

इनका प्रिय भोजन फल ही होता है। जिसमें जंगली फल, बगीचे में उगनेवाले फल, ऑलिव, बादाम, चेरी, जामुन, अंजीर व इत्यादी होते हैं। हरियल पक्षी प्यास बुझाने के लिए पेड़ों की पत्तियों एवं फूलों पर एकत्र हुई ओंस या बारिश के पानी की बूंदों का उपयोग करते हैं।
 
हरियल पक्षी का प्रजनन काल मार्च से जून महीने तक होता है। इस विशेष समय में  हरियल नर, मादाओं को रिझाने के लिए अपने गर्दन की थैली को फुलाकर नृत्य करते हैं। मादा हरियल पक्षी 1 या 2 अंडे देती है। जिनका रंग चमकीला सफेद होता है। 
 
नर और मादा हरियल पक्षी दोनों भी अण्डों को सेते हैं। उसक बाद 13 दिनों के बाद इनके अंडों में से चूजे बाहर आते हैं।  यह पक्षी अपना घोंसला घने पेड़ों एवं झड़ियों के बीच बनाते हैं, जिसे तैयार करने के लिए वह पत्तियां, टहनियां, घास और लकड़ी के टुकडे इस्तेमाल करते हैं।  
 
इनकी आवाज किसी सुमधुर कर्णप्रिय सिटी जैसी होती है। जिसका उच्चारण कुछ इस तरह होता है ‘kwa-kow’...हरियल पक्षी का जीवनकाल 26 साल तक हो सकता है। 
 
इस पक्षी को देखना बड़ा शुभ माना जाता है। अगर यह अपना घोसला बनाता हुआ दिख जाए तो इसे और भी शुभ माना जाता है और अगर हाथ में पकड़ी हुई लकड़ी दिख जाए तो समझो सोने पर सुहागा....ऐसा पौराणिक किताबों में और लोकगीतों में वर्णन मिलता है..ज्यादातर जगह हारिल के नाम पर तोता मान लिया जाता है जबकि हारिल हरा और पीले रंग का कबूतर जैसा होता है। 

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