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काबुल एयरपोर्ट पर हमले का खतरा, अमेरिका ने अपने नागरिकों को चेताया

हमें फॉलो करें काबुल एयरपोर्ट पर हमले का खतरा, अमेरिका ने अपने नागरिकों को चेताया
, गुरुवार, 26 अगस्त 2021 (08:55 IST)
काबुल। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में हर दिन के साथ अमेरिका सहित तमाम देशों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल होते जा रहे हैं। वहां मौजूद अफगान लोगों के साथ ही वहां मौजूद दूसरे देशों के नागरिकों पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।
 
इस बीच अमेरिका ने एयरपोर्ट पर अपने नागरिकों पर खतरे का अंदेशा जताया है। काबुल में एयरपोर्ट के गेट के बाहर मौजूद अपने नागरिकों को चेतावनी देते हुए अमेरिका ने उनसे तुरंत ये जगह छोड़ने को कहा है।
 
काबुल में अमेरिकी दूतावास ने कहा कि एबे गेट, पूर्वी गेट या उत्तरी गेट पर जो भी अमेरिकी नागरिक मौजूद हैं, वे तुरंत ये जगह खाली कर दें।
 
दूतावास ने कहा कि काबुल एयरपोर्ट के बाहर मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी जाती है वे एयरपोर्ट की तरफ यात्रा करने से बचें। जब तक कि आपसे व्यक्तिगत रूप से अमेरिकी सरकार के प्रतिनिधि द्वारा ऐसा करने को न कहा जाए, एयरपोर्ट की तरफ न जाएं।
 
ब्रिटेन ने भी चेताया : ब्रिटेन की सरकार ने काबुल हवाईअड्डे पर आतंकवादी हमला होने की आशंका व्यक्त करते हुए, अफगानिस्तान में अपने नागरिकों को हवाईअड्डे से दूर रहने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हवाईअड्डा क्षेत्र से लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और अगले आदेश का इंतजार करें।

पुतिन ने इमरान से की चर्चा : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अफगानिस्तान में ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की और संघर्षग्रस्त देश में स्थिति से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों का आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि अगले मंगलवार तक अमेरिका द्वारा निकासी अभियान पूरा करने की योजना के बीच ब्लिंकन का अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकियों की संख्या को लेकर बयान आया है।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अफगानिस्तान से 31 अगस्त तक अमेरिकी सैनिकों की वापसी का अभियान तेजी से चल रहा है, लेकिन इसका तय समयसीमा पर पूरा होना तालिबान के सहयोग पर निर्भर करेगा। काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिका के अभी करीब 5,800 सैनिक हैं।
 
अमेरिका ने 31 अगस्त तक अपने सभी सैनिक वापस बुलाने की घोषणा की थी और तालिबान ने इससे 2 सप्ताह पहले 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था।

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