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बोरिस कभी मंगल पर रहता था, अब पृथ्वी पर जन्मा है...

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राम यादव

पिछले 30 जून को वेबदुनिया पर एक बहुत ही दिलचस्प समाचार देखा। ब्रिटेन की एक गुमनाम पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के माध्यम से कहा गया था कि वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मनुष्य की उत्पत्ति लाखों वर्ष पूर्व मंगल ग्रह पर हुई थी। एलियन उन्हें पृथ्वी पर लाए थे। मानव-उत्पत्ति से जुड़ा 95 प्रतिशत डेटा इतिहास की पुस्तकों में इसीलिए नहीं मिलता। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रागऐतिहासिक होमो सापियन (आदि मानव) हम से कहीं अधिक उन्नत थे। गुफाओं में मिले भित्तिचित्र भी संकेत करते हैं कि आदिकालीन मनुष्य परग्रहीय लोगों के संपर्क में थे। 
 
वेबदुनिया के इस समाचार से मुझे याद आया रूस के बोरिस किप्रियानोविच का नाम। खोज की तो पता चला कि पिछले 26 वर्षों से वह हमारी दुनिया में है। अपने बचपन में वह कहा करता था कि पिछले जन्म में वह मंगल ग्रह का निवासी था। कभी-कभी पृथ्वी पर भी आता था। उस समय मंगलवासी और पृथ्वी पर मिस्र-वासी एक-दूसरे के संपर्क में थे। दिसंबर 2017 में बोरिस किप्रियानोविच का नाम एक बार फिर बड़ी चर्चा में था, लेकिन जल्द ही ठंडा भी पड़ गया। जिज्ञासा हुई कि कौन था बोरिस उर्फ़ बोरिस्का किप्रियानोविच और आजकल वह कहां है?
 
डेढ़ साल का बोरिस बनाता था पेंटिंग : पता चला कि उसका जन्म 11 जनवरी 1996 को रूस के वोल्गोग्राद में हुआ था। माता-पिता डॉक्टर थे। मां ने मीडिया के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें बहुत पहले ही आभास हो गया था कि उनके बेटे में कुछ खास बात है। जन्म के दो सप्ताह बाद ही वह बिना किसी सहारे के अपना सिर उठा लेता था। कुछ ही महीने बाद बोलने भी लगा। माता-पिता हौरान थे! डेढ़ साल का होते-होते पढ़ने और पेंटिंगें भी बनाने लगा। दो साल का होते ही माता-पिता ने उसे किंडरगार्टन भेजना शुरू कर दिया। किंडरगार्टन भी हैरान कि वह तूफ़ानी तेज़ी से लिखने-पढ़ने और भाषाएं सीखने लगा था! उसकी स्मरणशक्ति गज़ब की थी। 
 
धरती का उद्धार करने आया हूं : बोरिस जब 7 साल का था, तब उसके माता-पिता एक बार घर से बाहर कहीं कैंपिंग कर रहे थे। वहां अलाव जल रहा था और कुछ दूसरे लोग भी जमा हो गए थे। तभी बोरिस अचानक बोलने लगा कि इस जन्म से पहले भी उसका एक जन्म था। तब वह मंगल ग्रह पर रहता था। उसे ग्रहों-तारों का अच्छा ज्ञान है। धरती पर वह आया है इस दुनिया का उद्धार करने। उसकी ये बातें सुनकर सभी लोग अवाक रह गए। कई और मौकों पर भी बोरिस मंगल ग्रह के बारे में कथा-कहानियां छेड़कर सबको अवाक कर देता था। लोग समझ नहीं पाते थे कि उसकी बतों को बचकानी बहक मानें या गंभीरता से लें। 
 
मंगल पर आश्चर्यजनक जानकारी : बोरिस को यह सब किसी ने सिखाया-पढ़ाया नहीं था। वह अचानक ऐसी-ऐसी चीजों का वर्णन करने लगता था, जो उसकी आयु के किसी छोटे बच्चे को मालूम ही नहीं हो सकती थीं। उदाहरण के लिए, वह बार-बार अंतरिक्ष और ब्रह्मांड की बातें किया करता था। हमारे सौरमंडल के बारे में भी उसे आश्चर्यजनक गहरी जानकारी थी। उसकी बहुत छोटी आयु के कारण ऐसे गूढ़ विषयों के बारे में उससे बातें करने का विचार किसी को आ भी नहीं सकता था। उसके माता-पिता का कहना था कि उन्होंने या किसी दूसरे ने, उसे ऐसी कोई पुस्तक आदि भी कभी नहीं दी थी। कुछ समय बाद वह मंगल ग्रह के बारे में बड़े फर्राटे से ऐसे बोलना लगा, मानो व्याख्यान दे रहा है। 
 
सांस लेने की प्रक्रिया पृथ्वी से उलट : बोरिस जब-तब यह भी कहा करता था कि मंगलवासियों की सभ्यता बहुत उन्नत थी। वे कद में बहुत बड़े होते थे, पृथ्वी पर के लोगों से कहीं बड़े (दो मीटर से भी अधिक)। यही नहीं, वे अमर्त्य भी थे। 35 साल की आयु के बाद उनका बूढ़ा होना थम जाता था। बुढ़ापे की कमज़ोरी जैसी कोई चीज़, जो यहां पृथ्वी पर है, वहां नहीं थी। मंगलवासियों को केवल हथियारों के द्वरा मारा जा सकता था। बोरिस की बातें मानें, तो कुछ थोड़े से मंगलवासी अब भी वहां भूमिगत आवासों में रहते हैं। कार्बन-डाइॉक्साइड की सांस लेते हैं और ऑक्सीजन बाहर निकालते हैं।
 
मंगल पर के पिछले जीवन को याद करते हुए बोरिस ने एक इंटरव्यू में शब्दशः कहाः 'मैं उस समय 14-15 साल का था। मंगलवासी सारे समय लड़-भिड़ रहे थे। अपने एक दोस्त के साथ मुझे भी अक्सर हवाई हमलों में हिस्सा लेना पड़ा। हम गोलाकार अंतरिक्षयानों में बैठकर दिक और काल (टाइम एन्ड स्पेस, यानी ब्रहमांड) में यात्राएं किया करते थे। हम पृथ्वी पर जीवन और त्रिकोणीय विमान देखते थे। मंगल ग्रह वालों के अंतरिक्षयान बहुत जटिल थे। वे कई परतों के बने होते थे और ब्रह्मांड के आर-पार उड़ सकते थे।' 
 
बोरिस के अनुसार, मंगल पर हज़ारों वर्ष पूर्व एक परमाणु युद्ध छिड़ गया। उसके कारण वहां का मूल वायुमंडल नष्ट हो गया। मंगल ग्रह वालों ने बृहस्पति को एक सूर्य बनाने का प्रयास किया, पर सफल नहीं हो पाए। 
 
6 परतों के अंतरिक्षयान : एक दूसरे इंटरव्यू में बोरिस ने बताया कि मंगलवासियों के अंतरिक्षयान 6 परतों के बने होते थे। सबसे ऊपरी परत ठोस धातु की होती थी और यान के 25 प्रतिशत हिस्से के बराबर होती थी। 30 प्रतिशत हिस्से वाली दूसरी परत रबर जैसी सामग्री की बनी होती थी। तीसरी परत भी 30 प्रतिशत के बराबर होती थी। 4 प्रतिशत के बराबर की अंतिम परत चुंबकीय थी।
 
चुंबकीय परत को ही ऊर्जा देकर अंतरिक्षयान को पूरे ब्रह्मांड में उड़ाया जा सकता था। किंतु, शेष बचा 11 प्रतिशत हिस्सा किस चीज़ का बना था और ऊर्जा के लिए किस तरह का ईंधन होता था, यह उसने नहीं बताया। शायद उससे पूछा भी नहीं गया। यही कहा करता था कि अंतरिक्षयानों की बनावट बहुत ही जटिल थी। मंगल ग्रह पर रहने का उसका अंतकाल तब आ गया, जब परमाणु हथियारों वाले युद्ध ने वहां की सभ्यता का अंत कर दिया। इसीलिए अब पृथ्वी पर उसका पुनर्जन्म हुआ है। 
 
मंगल पर नष्ट हो गई थी सभ्यता : बोरिस का कहना था कि मंगल ग्रह वाली सभ्यता का क्योंकि अंत हो गया था, इसलिए उसे पृथ्वी पर भेजा गया, ताकि वह पृथ्वी पर के मनुष्यों को आगाह करे कि वे वही ग़लती न करें, जो मंगलवासियों ने की है। वह पृथ्वी पर के बड़े देशों के बीच तनावों को बड़ी चिंता  के साथ देखता था। डरता था कि धरतीवासी भी वही ग़लती कर सकते हैं, जो उसके अपने मंगलवासियों ने हज़ारों वर्ष पूर्व की। 
 
ये बातें हैं तो बहुत दिलचस्प और बुद्धिमत्तापूर्ण, लेकिन उन्हें सिद्ध करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है। कोई ठोस प्रमाण मिले भी कैसे, यदि बोरिस की बताई मंगल ग्रह की सभ्यता हज़ारों वर्ष पूर्व एक परमाणु युद्ध में नष्ट हो गई है। उस सभ्यता के यदि कोई निशान हुए, तो वे तभी मिल सकते हैं, जब कोई धरतीवासी मंगल ग्रह पर रह रहा हो और पूरी गंभीरता के साथ उन्हें खोजे। अभी तक तो कोई धरतीवासी मनुष्य मंगल ग्रह पर पहुंचा है नहीं, इसलिए ऐसी कोई खोज हो भी नहीं सकती थी। ऐसे में केवल यही हो सकता है कि या तो हम बोरिस की बातें सच मानें या उन्हें मनगढ़ंत कह कर ठुकरा दें। 
 
यहां छिपे हैं बोरिस की सच्चाई के प्रमाण : बोरिस का लेकिन यह भी कहना था कि उसकी बातों की सच्चाई के प्रमाण और सभी प्रश्नों के उत्तर मिस्र में गीज़ेह के पास स्थित नरसिंह की आकृति वाले स्फिंक्स में छिपे हैं। मंगल पर के अपने पिछले जन्म में एक पायलट की तरह वह पृथ्वी पर आता रहा है, विशेषकर मिस्र में। उसे पता है कि इस रहस्य को स्फिंक्स में कहां छिपाया गया है। रहस्य यदि खुल जाए, तो मनवता की सारी समस्याओं का समाधान भी मिल जाएगा। यह रहस्य है क्या और कैसा है, इसे वह बता नहीं सकता, क्योंकि इसे वह खुद भी नहीं जानता।
 
बोरिस किंतु जानता था कि जिस रहस्य की वह बात कर रहा है, वह स्फिंक्स के सिर वाले बाएं कान के पीछे उस जगह छिपा है, जहां एक अजीब-सा रहस्यमय छेद सैकड़ों वर्षों से देखने में आता है। उसे एक चट्टानी टुकड़े द्वारा बंद कर दिया गया है। विश्वास करना कठिन है, लेकिन लगभग ढाई हज़ार वर्ष ईसा पूर्व, भारी चट्टानों से बने विशाल नरसिंह जैसे स्फिंक्स के बाएं कान के पीछे सचमुच एक ऐसा छेद है, जिसे एक चट्टानी टुकड़े द्वारा रूंधा गया है। कान के पीछे यह छेद संभवतः शुरू से ही नहीं था। हो सकता है कि उसके पीछे सचमुच कुछ छिपा हो। मिस्र की सरकार किसी जांच की अनुमति नहीं देती।
 
स्फिंक्स के बारे में भी बोरिस बहुत अल्प आयु से ही इतनी सारी बातें जानता था कि सुनने वाला यह सोचकर चकित हुए बिना नहीं रहता कि ये सारी जानकारियां उसे मिलीं कहां से। जिन लोगों के बीच रूस में वह पला-बढ़ा है, उन्होंने 'स्फिंक्स' नाम शायद कभी सुना हो, पर नाम के सिवाए कुछ और नहीं जानते रहे होंगे। 
 
बालक बोरिस और उसकी ये रोचक बातें बहुत ही विचित्र लगती हैं। लेकिन, उससे बातचीत कर चुके विशेषज्ञ उसे और उसके जैसे बच्चों को 'इन्डिगो बच्चे' कहते हैं। वे कहते हैं कि 'इन्डिगो बच्चे' असामान्य मानसिक और आध्यात्मिक गुणों वाले होते हैं। उनमें दूसरों के मन को पढ़ने, अपनी मानसिक शक्ति द्वरा चींज़ों को हिलाने-डुलाने या पिछले जन्म वाले अपने जीवन को याद करने की असाधारण क्षमता होती है। ऐसे बच्चे बहुत मेधावी होते हैं, लेकिन मिलनसार प्रायः नहीं होते।
 
और मंगलवासी जन्मे हैं पृथ्वी पर : बोरिस का यह भी कहना था कि पृथ्वी पर जन्म लेने वाला वह अकेला मंगलवासी नहीं है। वहां रह चुके अनेक बच्चों ने पृथ्वी पर पुनर्जन्म पाया है। मिस्र के 'स्फिंक्स' का रहस्य वे भी जानते हैं। ये बातें 2017 के एक इंटरव्यू के बाद ही बहुचर्चित हुईं, लेकिन बोरिस उन्हें बहुत पहले से (7 साल की आयु से) कहता रहा है। बचपन में कही उसकी बातें या तो उसके मिता-पिता दूसरों को सुनाया करते थे या उसके किंडरगार्टन की नर्सें सुनाती थीं। 
 
बोरिस से मिल चुके विशेषज्ञ, डॉक्टर और वैज्ञानिक स्वीकार करते हैं कि उसके व्यवहर और उसकी असाधारण जानकारियों की उनके पास कोई व्याख्या नहीं है। उसकी कई बातें पूरी तरह सही भी हो सकती हैं। सब कुछ बचकानी स्वैरकल्पना (फ़ेंटैसी) ही नहीं है। कई बातें सिर-पैर वाली हैं और प्रामाणिक भी हैं। निश्चय ही यह भी कहा जा सकता है कि कुछ चींज़ें बोरिस ने कहीं पढ़ी होंगी, किसी फ़िल्म में देखा होगा या अपने घर-परिवार के लोगों से सुना होगा। किंतु विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि कई बातें ऐसी भी हैं, जो उसके बचपन वाले दिनों में उपलब्ध रही पुस्तकों में नहीं मिलतीं।
 
रूस की बाढ़ पर की थी भविष्यवाणी : कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि बोरिस स्वयं भी रहस्यमय है और किसी हद तक आधिदैविक (सुपरनैचुरल) भी है। उसने भविष्यवाणी की थी कि 2012 में रूस में एक भयंकर बाढ़ आएगी। 8 जुलाई 2012 को वहां सचमुच एक ऐसी भयंकर बाढ़ आई, जिसने 171 प्राणों की बलि ली।
 
अब बोरिस का कोई पता नहीं : बोरिस इस बीच कम से कम 26 साल का हो गया होना चाहिए। उसकी कही पहली बातों को बीस से अधिक साल हो गए हैं। प्रश्न उठता है कि अब वह क्या कहता हैं? क्या कर रहा है? इस बीच क्या उसे कोई नई चीज़ भी याद आने लगी है? उत्तर है, कुछ पता नहीं है। देश-विदेश के मीडिया उससे संपर्क साधने की कोशिश करते रहे हैं, पर उसका या उसके घर वालों का कोई पता नहीं चल रहा है। 2017 वाले इंटरव्यू के बाद से सभी कहीं ग़ायब हो गए हैं।
 
अफ़वाहें हैं कि बोरिस और उसकी मां को रूसी सरकारी अधिकारियों द्वारा अपने साथ ले जाते देखा गया था। अफ़वाह यह भी है कि पूरा परिवार कहीं चला गया और रूसी सरकार की निगरानी में किसी अज्ञात जगह पर रह रहा है। सरकार ने दूसरों से संपर्क और बातचीत करने पर रोक लगा रखी है। एक अनुमान यह भी है कि अब वह शायद पिछले जन्म वाली सारी बातें भूल गया है, याद नहीं कर पा रहा है, इसलिए मीडिया से छिप रहा है। 
 
यह एक तथ्य है कि अपने बचपन में पिछले जन्म की बातें सुनाने वाले बच्चे, बड़ा होने प्रायः सब कुछ भूल जाते हैं। हो सकता है कि बोरिस किप्रियानोविच के साथ भी यही हुआ हो। वह अपने पिछले किसी जन्म में यदि सचमुच मंगल ग्रह पर रहता था और वहां की सभ्यता का अंत हो जाने से उसे पृथ्वी पर पुनर्जन्म मिला, तो यह बात भी अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है।
 
आत्मा का अस्तित्व ग्रहों से परे : पुनर्जन्म के उदाहरण भारत सहित अनेक देशों में मिला करते हैं। किंतु एक ऐसा उदाहरण, जिस में कोई बच्चा बार-बार यह कहे कि वह बहुत पहले कभी मंगल ग्रह पर रह चुका है और अब पृथ्वी पर आया है, नहीं मिलता। बोरिस यदि वाकई पुनर्जन्म का उदाहरण है, तो इसका अर्थ यह भी हुआ कि आत्मा जन्म और पुनर्जन्म के लिए किसी एक ही ग्रह से बंधी नहीं होती। हो सकता है, पृथ्वीवासियों का पुनर्जन्म भी किन्हीं अन्य ग्रहों पर होता हो। 
 
दूसरे शब्दों में, अकेले पृथ्वी ही नहीं, ब्रह्मांड में अनेक ऐसे ग्रह होंगे, जहां जीवन है। जीवन है, तो सब जगह बोरिस जैसे बच्चों के पुनर्जन्म भी होते होंगे! इसी प्रकार, यह भी संभव है कि हज़ारों वर्ष पूर्व मंगल पर यदि एक बहुत उन्नत सभ्यता थी, तो वहां के एलियन पृथ्वी पर भी आए होंगे। हो सकता है कि वे ही हमारे असली पूर्वज भी हों!

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