कोरोना काल के बीच अमेरिका में नस्लभेदी दंगा, पेंटागन ने दिए सेना तैनाती के आदेश

रविवार, 31 मई 2020 (19:20 IST)
वॉशिंगटन/रिचमॉन्ड। एक तरफ जहां दुनिया का 'सुपर पावर' कहे जाने वाला अमेरिका 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत के बाद कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ देश के करीब 25 से ज्यादा शहरों में भयंकर प्रदर्शन, हिंसा, आक्रोश और हंगामा हो रहा है। हिंसक प्रदर्शन के आरोप में 1400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
 
दरअसल यहां जारी हिंसक प्रदर्शनों ने दंगों का रूप ले लिया है। दंगों के दौरान लोगों ने पुलिस की गाड़ियों, इमारतों में आग लगा दी और दुकानों से सामान लूटकर अफरा-तफरी मचा दी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दंगाइयों को गोली मारने की चेतावनी दी है। पेंटागन ने सेना तैनाती के आदेश दिए हैं। 'डेली मेल' की एक खबर के मुताबिक 25 प्रमुख शहरों में दंगे की वजह से कर्फ्यू लगाना पड़ा।

कर्फ्यू के बावजूद प्रदर्शन खत्म नहीं हुए। प्रभावित राज्यों में मिन्नेसोटा, जॉर्जिया, ओहियो, कोलोराडो, विस्कोन्सिन, केन्टकी, उटाह, टेक्सास शामिल हैं। 
 
 
लोगों ने सड़कों पर जमकर उत्पात मचाया और कई स्टोर्स में तोड़फोड़ के साथ लूटमार की। ताजा वीडियो में जो दृश्य सामने आ रहे हैं वहां लोग कारों में जाकर सामान की लूटपाट करते साफ दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच CNN मुख्यालय में जमकर तोड़फोड़ की गई। CNN पर पक्षपाती रिपोर्टिंग का आरोप लगा है।

प्रदर्शनकारियों ने स्मारकों को निशाना बनाया : जॉर्ज फ्लॉयड की मौत की घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में ‘कॉनफेडरेट’ स्मारकों को निशाना बनाया है। दरअसल, फ्लॉयड की मौत के बाद मिनीपोलिस में शुरू हुए प्रदर्शन देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गए हैं।
 
मिनीपोलिस में इस सप्ताह प्रदर्शन भड़क उठे, जब एक वीडियो में एक श्वेत पुलिस अधिकारी को 8 मिनट से अधिक समय तक घुटने से फ्लॉयड का गला दबाते हुए देखा गया और इस दौरान फ्लॉयड सांस लेने की फरियाद करता रहा। बाद में फ्लॉयड की मौत हो गई थी।

देशभर में रविवार सुबह भी प्रदर्शन हुए। वर्जीनिया, कैरोलिनास और मिसीपीसी में स्मारकों को विरूपित कर दिया गया। देश के दक्षिणी हिस्से में और अन्य क्षेत्रों में कॉनफेडरेट स्मारकों की मौजूदगी को वर्षों से चुनौती दी जाती रही है और कुछ स्मारकों को हटाने के लिये पहले भी निशाना बनाया जा चुका है।
 
उल्लेखनीय है कि ‘कॉनफेडरेट’ स्मारक ‘कॉनफेडरेट स्टेट ऑफ अमेरिका’ (सीएसए), कॉनफेडरेट नेताओं, या अमेरिकी गृह युद्ध के कॉनफेडरेट सैनिकों के प्रतीक एवं सार्वजनिक प्रदर्शन हैं। सीएसए अमेरिका के निचले दक्षिणी हिस्से में 1861 से 1865 के बीच एक गैर मान्यता प्राप्त गणराज्य था। 
 
 
उस क्षेत्र में कॉनफेडरेसी मूल रूप से दास प्रथा वाले एवं सात अलगाववादी प्रांतों द्वारा बनाया गया था, जिनकी अर्थव्यवस्था कृषि और विशेष रूप से कपास की खेती तथा बागवानी पर अत्यधिक निर्भर थी तथा जिनमें अफ्रीकी मूल के अमेरिकी दासों से काम कराया जाता था।
 
ऑक्सफोर्ड ईगल की खबर के मुताबिक मिसीपीसी विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को एक कोनफेडरेट स्मारक पर पंजे के लाल निशान के साथ ‘आध्यात्मिक नरसंहार’ लिख दिया गया।

आलोचकों ने कहा है कि विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक भवन के पास इसे प्रदर्शित करने से यह संकेत जाता है कि ओले मिस कोनफेडेसी का महिमामंडन करता है और दक्षिण के दासता के इतिहास का बखान करता है। दक्षिण कैरोलीना के चार्ल्सटन में प्रदर्शनकारियों ने एक कॉनफेडरेट प्रतिमा को विरूपित कर दिया।
 
अखबार के मुताबिक उत्तर कैरोलीना में एक स्मारक पर ‘नस्लवादी’ शब्द लिख दिया गया। उत्तर कैरोलीना में कॉनफेडरेट स्मारकों का सवाल खास तौर पर विवादित रहा है, जहां इस तरह के स्मारकों को कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
 
दरहम अदालत परिसर के बाहर एक कॉनफेडरेट प्रतिमा को भी प्रदर्शनकारियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। तटीय शहर नोरफोक में प्रदर्शनकारी एक कॉनफेडरेट स्मारक पर चढ़ गए और इसे विरुपित किया।
 
वर्जीनिया की राजधानी एवं कोनफेडरेसी की राजधानी रिचमॉन्ड में एक आयोग ने शहर के प्रसिद्ध मॉन्यूमेंट एवेन्यु में 5 कॉनफेडरेट में एक को हटाने की सिफारिश की है।
 
'द टेनिसियन' अखबार की खबर के मुताबिक टेनिसी प्रांत की राजधानी नेशविले में प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को एडवर्ड कारमैक की एक प्रतिमा गिरा दी, जो 1900 के करीब एक सरकारी वकील थे और नस्लवादी विचार रखते थे। प्रदर्शनकारियों ने फिलाडेल्फिया के एक पूर्व मेयर की प्रतिमा पर भी स्याही फेंक दी। (वेबदुनिया/एजेंसी)

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