Publish Date: Tue, 07 Nov 2017 (18:26 IST)
Updated Date: Tue, 07 Nov 2017 (18:41 IST)
लंदन। सोशल मीडिया बन चुका है एक ऐसा माध्यम जिसके इस्तेमाल करने की योग्यता और अयोग्यता पर सवाल उठते रहते हैं।
ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्डस में पिछले दिनों की बहस या चर्चा के लिए शामिल विषयों में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के फेसबुक और ट्विटर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के मुद्दे को भी शामिल किया गया था। इसके लिए सरकार के डेटा प्रोटेक्शन विधेयक को यह अधिकार देने पर विचार किया जाएगा कि वह कानूनी रूप से उस उम्र को निर्धारित करे, जब से बच्चों को इन दोनों सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स को इस्
तेमाल की इजाजत मिलेगी।
इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि ऐसा करके कमउम्र बच्चों को ऐसे माध्यमों के जरिए होने वाले शोषण से बचाया जा सकता है। हालांकि इस बात की पूरी संभावना है कि इस कानून को बनाने के लिए सदन में मौजूद सभी दलों का सर्मथन ना मिल सके।
नौकरी पर खतरा बना सोशल मीडिया
इससे पहले संसद में एक और कानून बनाने की बात भी सामने आई थी जब यह कहा जाने लगा कि अपनी कंपनी के मामलों को सोशल मीडिया पर शेयर करने और संस्थान की बुराई करने वाले लोगों की नौकरी खत्म कर दी जानी चाहिए। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया था जब लंदन और कैलिफोर्निया में इस तरह के प्रयासों में लोगों को या तो नौकरी से हटा दिया गया या काम पर रखा ही नहीं गया।
लंदन में एक शोध के दौरान सामने आया कि वहां प्रति 10 में से 1 व्यक्ति को नौकरी पर नहीं रखा जाता है क्योंकि उसकी सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखे गए बयान कंपनी को पसंद नहीं आते। वहीं कैलिफोर्निया में एक व्यक्ति की नौकरी इसलिए चली गई थी क्योंकि उसने कंपनी के फेसबुक पेज पर उस इंसान की फोटो पोस्ट कर दी जिसमें वह कंपनी के खाद्य पदार्थ को चाटता दिखाई दे रहा था।
मौत की सजा भी
ऐसा ही एक अनोखा कानून है सऊदी अरब में जहां सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना या कुछ गलत पोस्ट करना मौत की सजा की वजह बन सकता है। यहां के कानून मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर कुछ भी आपत्तिजनक लिखने या अफवाह फैलाने के जुर्म में मौत की सजा से लेकर अपराधियों को कोड़े, जेल, सफर पर पाबंदी, नजरबंद के साथ-साथ सोशल मीडिया बैन जैसी सजाएं दी सकती हैं।