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Shab E Barat 2026: शब-ए-बारात क्यों मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है, पढ़ें विशेष जानकारी

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हमें फॉलो करें शब-ए-बारात की सुंदर फोटो

WD Feature Desk

, मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (10:09 IST)
Shab-e-Barat significance in Islam: शब-ए-बारात या शब्बे रात इस्लाम धर्म की एक अत्यंत पवित्र रात मानी जाती है। इसे इबादत, तौबा (पश्चाताप), रहमत और माफी की रात कहा जाता है। यह रात अल्लाह की विशेष कृपा से जुड़ी मानी जाती है, जिसमें बंदों की दुआएं क़ुबूल होती हैं।
 
  1. शब-ए-बारात का अर्थ
  2. क्यों मनाई जाती है शब-ए-बारात?
  3. तकदीर की रात (रात का फैसला)
  4. तौबा और माफी (क्षमा की रात)
  5. अपनों की याद (कब्रिस्तान जाना)
  6. शब-ए-बारात कैसे मनाई जाती है?
  7. विशेष जानकारी: 2026 में कब है शब-ए-बारात?
  8. शब-ए-बारात-FAQs
 
शब-ए-बारात या शब्बे रात इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने 'शाबान' की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इसे 'मुक्ति की रात' या 'क्षमा की रात' के रूप में भी जाना जाता है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह रात इबादत, दुआ और अपनों को याद करने का एक विशेष अवसर होती है। आइए जानते हैं फरवरी 2026 के शब-ए-बारात के बारे में खास जानकारी...
 

शब-ए-बारात का अर्थ

 
यह नाम दो शब्दों से मिलकर बना है:
शब: फारसी शब्द, जिसका अर्थ है 'रात'।
 
बारात: अरबी शब्द 'बरात' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'विमुक्ति' या 'बचाव' (नरक की आग से)।
 

क्यों मनाई जाती है शब-ए-बारात?

इस रात को मनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और कारण हैं:
 

1. तकदीर की रात (रात का फैसला)

 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात को अल्लाह इंसान के अगले एक साल के भाग्य का फैसला करता है। इसमें तय होता है कि अगले साल कौन जन्म लेगा, किसकी मृत्यु होगी और किसे कितना 'रिज्क' (भोजन/आजीविका) मिलेगा।
 

2. तौबा और माफी (क्षमा की रात)

 
माना जाता है कि इस रात अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुले रहते हैं। सच्चे दिल से मांगी गई तौबा यानी माफी स्वीकार की जाती है। लोग अपने गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी मांगते हैं।
 

3. अपनों की याद (कब्रिस्तान जाना)

 
इस रात लोग कब्रिस्तान जाकर अपने उन पूर्वजों और सगे-संबंधियों के लिए दुआ करते हैं जो दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। वे उनकी कब्रों पर रोशनी करते हैं और उनके लिए मगफिरत (मोक्ष) की प्रार्थना करते हैं।
 

शब-ए-बारात कैसे मनाई जाती है?

 
इबादत और जागरण: पूरी रात जागकर नमाज पढ़ना, कुरान की तिलावत (पाठ) करना और अल्लाह का जिक्र करना मुख्य परंपरा है।
 
रोजा रखना: शाबान की 14 और 15 तारीख को रोजा रखना सुन्नत अर्थात् पुण्य कार्य माना जाता है।
 
पकवान और दान: इस अवसर पर घरों में विशेष रूप से हलवा, बिरयानी और अन्य पकवान बनाए जाते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों में खाना और दान बांटा जाता है।
 
मस्जिदों में रोशनी: मस्जिदों को बिजली की लड़ियों और चिरागों से सजाया जाता है।
 

विशेष जानकारी: 2026 में कब है शब-ए-बारात?

 
इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित होता है। कैलेंडर गणना के अनुसार, 2026 में शब-ए-बारात 2 या 3 फरवरी की शाम से 4 फरवरी की सुबह तक होने की संभावना है। मतातंर के चलते इसकी सटीक तिथि चांद दिखने के आधार पर बदल सकती है।
 
एक संदेश: शब-ए-बारात शांति और प्रार्थना की रात है। कई लोग इस रात आतिशबाजी करते हैं, जिसे विद्वान गैर-इस्लामिक और गलत मानते हैं। असली उद्देश्य अल्लाह की इबादत और आत्म-चिंतन है।
 

शब-ए-बारात-FAQs

 
1. शब-ए-बारात क्या है?
उत्तर: शब-ए-बारात इस्लाम धर्म की एक पवित्र रात है, जिसे माफी, रहमत और निजात की रात माना जाता है। इस रात मुसलमान अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और इबादत में समय बिताते हैं।
 
2. शब-ए-बारात क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इस रात अगले एक साल की तक़दीर, उम्र और रोज़ी लिखी जाती है। अल्लाह इस रात अपने बंदों पर विशेष रहमत नाज़िल करता है।
 
3. शब-ए-बारात कब मनाई जाती है?
उत्तर: शब-ए-बारात इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 14 और 15 तारीख की दरम्यानी रात को मनाई जाती है। तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है।
 
4. क्या शब-ए-बारात में कब्रिस्तान जाना जरूरी है?
उत्तर: कब्रिस्तान जाना जरूरी नहीं, लेकिन अपने दिवंगत परिजनों के लिए दुआ करना सुन्नत माना गया है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: इस्लाम में मुस्लिमों के लिए शब-ए-बरात का क्या है महत्व?

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