Publish Date: Wed, 18 Feb 2026 (16:44 IST)
Updated Date: Wed, 18 Feb 2026 (16:51 IST)
- 'जियो AI स्टैक' को 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में किया प्रस्तुत
- ग्रीन डेटा सेंटर से भारतीय भाषाओं तक पूरी AI वैल्यू चेन पर फोकस
- स्वदेशी और सॉवरेन AI इकोसिस्टम पर जोर
Jio AI Stack : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो ने अपने 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' की रूपरेखा पेश की। कंपनी तकनीकी रूप से इसे 'जियो AI स्टैक' नाम देती है और दावा करती है कि इसे भारत की जरूरतों और बड़े पैमाने की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। जियो इंटेलिजेंस के तहत विकसित किया जा रहा यह स्टैक केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक फुल-स्टैक AI इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया जा रहा है।
'जियो AI स्टैक' में गीगावॉट स्तर के ग्रीन डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था, प्लेटफॉर्म और फ्रेमवर्क, भारतीय भाषाओं पर आधारित डेटा फाउंडेशन, बहुभाषी इंटेलिजेंस लेयर और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एप्लिकेशन शामिल हैं। देश में मल्टी-गीगावॉट AI डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जो 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर की टिकाऊ AI क्षमता तैयार की जा सके।
'जियो AI स्टैक' को एक 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में प्रस्तुत किया गया है यानी ऐसा ढांचा जो देश में विकसित हो और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित हो। कंपनी का कहना है कि इसके जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
कंपनी के मुताबिक जियो AI स्टैक का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हर भारतीय, साथ ही एंटरप्राइज और सरकारी संगठनों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है। इसके तहत भारतीय भाषाओं को समझने और स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने वाली AI क्षमताओं पर विशेष जोर दिया गया है।
स्थानीय संदर्भ में विकसित इंटेलिजेंस के लिए व्यापक भारतीय भाषाओं के डेटा सेट तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षित, बहुभाषी वॉयस AI और एजेंटिक प्लेटफॉर्म पर काम किया जा रहा है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी भाषा में सहज AI इंटरैक्शन कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में AI की दौड़ अब केवल तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा संप्रभुता, ऊर्जा दक्षता, भाषाई विविधता और बड़े पैमाने पर पहुंच जैसे पहलुओं से भी जुड़ गई है। ऐसे में जियो AI स्टैक जैसे मॉडल देश के दीर्घकालिक डिजिटल और आर्थिक विकास में किस हद तक योगदान देते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Edited By : Chetan Gour
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Publish Date: Wed, 18 Feb 2026 (16:44 IST)
Updated Date: Wed, 18 Feb 2026 (16:51 IST)