अब तो समय बदल गओ भैया,
अब बदलो अपने लाने।
जादा बच्चों को का करने,
अब तो एकई-दो चाने।
जादा भये सो पढ़ने पेहें,
ने ढंग से खा-पी पेहें।
महंगाई है, बीमारी है,
ने ढंग से बे जी पेहें।
जादा भीड़ बड़ा दई तो फिर,
समझो पड़ हे पछताने।
एक भओ सो पढ़-लिख जेहे,
बड़ो आदमी बन जेहे।
तन-मन खो मजबूत बना कें,
काम भले के कर लेहे।
उनखो तो भूखन मरने हैं,
जिनके बच्चा मनमाने।
महंगाई में पढ़बो मुश्किल,
कपड़ा-लत्ता मुश्किल है।
दाल, चावल, गेहूं, शक्कर की,
रोज-रोज की किलकिल है।
बिटिया भई तो पड़ा-लिखा कें,
ओई खो आगे लाने।
सौ गीदड़ ने कछु काम के,
एक शेर सब पे भारी।
एक शिवाजी के आबे से,
मुगलों की सेना हारी।
बेटा-बिटिया एकई अच्छे,
भाग्य उनई को चमकाने।
बेटा भगत सिंह जैसो हो,
बिटिया हो लछमी बाई।
मोड़ा-मौड़ी एकई हो जो,
नाम करे ऊंचो भाई।
अपने ऊपर करे भरोसो,
अपनी ताकत पहचाने।