रूठी-रूठी बिन्नू सेरी, रूठ गए हैं भैयाजी। बिन्नू कहती टिकट कटा दो, हमें रेल से जाना है। पर भैया क्या करे बेचारा खाली पड़ा खजाना है। कौन मनाए रूठी बिन्नू, कोई नहीं सुनैयाजी। बिन्नू कहती ले चल मेला, वहां जलेबी खाऊंगी। झूले में झूला झूलूंगी, बादल से...