खड़ी हुई दर्पण के सम्मुख, लगी बहुत मैं सीधी सादी। पता नहीं क्यों अम्मा मुझको, कहती शैतानों की दादी। मैं तो बिलकुल भोली भाली, सबकी बात मानती हूं मैं। पर झूठे आरोप लगें तो, घूंसा तभी तानती हूं मैं। फिर गुस्सा भी आ जाता है, कोई अगर छीने आज़ादी।...