poem on kids सभी समझते मुझको भौंदू कहते नन्हा छौना। पता नहीं क्यों लोग मानते, मुझको महज खिलौना कभी हुआ सोफा गीला तो, डांट मुझे पड़ती है। बिना किसी की पूछताछ मां, मुझ पर शक करती है। मैं ही क्यों रहता घेरे में, गीला अगर बिछौना। चाय गिरे...