कूद-कूदकर, उछल-उछलकर, होता है मस्ती का मन। जब बजती छुट्टी की घंटी, टन-टन-टन-टन, टन-टन-टन-टन। पांच पीरियड तक तो तबीयत, हरी-भरी-सी रहती है। पर छठवां आते ही मन में, उलटी गिनती चलती है। दस से होकर शुरू पहुंचती, ताक धिनाधिन, थ्री टू वन। जब बजती छुट्टी की घंटी...! ...