कांधे बस्ता लादे-लादे, हालत हो गई खस्ता जी। नहीं छुएंगे बस्ता जी। नाम न लो पुस्तक कॉपी का, फेंको रबर पेन्सिल दूर। संडे की छुट्टी में पढ़ने, लिखने का हो दूर फितूर। हमको ख़ा लेने दो छककर, गरम-समोसे खस्ता जी। होम वर्क जैसे शब्दों को, भूल जाओ गर्मी भर...