Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

बाल एकांकी: काला सोना

Advertiesment
A scene from a childrens play featuring a character dressed as crude oil, in a short drama centered on petrol, diesel, gas, and kerosene

पात्र -
1- एक बालक आयु लगभग 15 वर्ष- काले लबादे में {क्रूड ऑयल के वेश में}

2- एक बालक रूद्र आयु लगभग 12 वर्ष
3- एक बालिका आद्या आयु लगभग 10 वर्ष
4- चार अन्य बच्चे आयु 10 से 12 वर्ष के बीच

 
मंच का परदा खुलता है और उस पर एक आकृति काला लबादा ओढ़े दिखाई देती है। वह आकृति नाचते हुए गा रही है।
 
      काला सोना काला सोना,
 
      नाम हमारा काला सोना।
 
      हमसे ही संचालित होता,
 
      है धरती का कोना-कोना।
 
      काला सोना काला सोना.......का....ला ...
 
{तभी मंच के एक तरफ से आद्या का प्रवेश}
 
आद्या --ये भाई .... क्यों शोर मचा रहे हो, कौन हो तुम और ये काला सोना काला सोना, क्या है सब ये........।
 
काली आकृति --लो जी लो, अब सुन लो इनकी बात, ये काला सोना भी नहीं जानते। सारी दुनिया में हल्ला है और ये मेम साब पूछती हैं काला सोना क्या है।
 

{तभी दूसरी तरफ से रूद्र का प्रवेश}

 
रूद्र--अरे भाई शांत ..शांत रहो भाई काले आदमी। एक तो यहां हल्ला मचा रहे हो और ठीक से अपना परिचय भी नहीं दे रहे हो।
 

काली आकृति--

 
     पेट्रोल हैं,  डीज़ल हैं हम, 
 
     हम हैं गैस रसोई वाली।
 
     नींद नहीं आती है घर को,
 
     पडा सिलेंडर हो जब खाली।
 
     बिना हमारे जले न चूल्हा,
 
     गरम न होता हाय भगौना
 
     काला सोना काला सोना .....
 
आद्या --रूद्र {एक साथ}-आंय! पेट्रोल, डीज़ल, गैस .....अरे तो क्या आप क्रूड ऑयल हैं -क्रूड ऑयल, काले-काले अंकल। आप यहां क्या कर रहे हैं? {दोनों चहकते हैं}
 
काली आकृति --क्या कर रहे हैं! आश्चर्य मेरे कारण दुनिया में इतनी मारा-मारी मची है और तुम लोग पूछ रहे हो कि यहां क्या कर रहे हो।
 
आद्या --अरे अंकल, अब ठीक से बताओ भी, इतने काले और अकड़ ...काले को तो काला ही कहेंगे ना। अच्छा अपने बारे में ठीक से बताओ। यह तो मैंने भी पढ़ा कि पेट्रोल, डीज़ल, गैस इत्यादि क्रूड ऑयल से ही बनता है। लेकिन कैसे, कहां? ठीक से नहीं मालूम। अब आप बताओ। आपका जन्म स्थान कहां है, कैसे इस धरती पर आते हो और कैसे डीज़ल, पेट्रोल, गैस बन जाते हो? ज़रा ठीक से बताओ।
 
काली आकृति --ये बड़ी लम्बी दास्तान है बच्चों। कितनी पीड़ा होती है हमें है, धरती के भीतर, बाहर आने में और फिर बाहर आकर भी।
 
रूद्र --अंकल पूरी कथा सुनाओ प्लीज, बिना रुके, बिना कुछ छुपाए चटपट और झटपट।
 
काली आकृति--बताता हूं, बताता हूं, ध्यान से सुनो-बात करोड़ों साल पुरानी है।समुद्र के नीचे करोड़ों करोड़ सूक्ष्म जीव और वनस्पतियों का जमावड़ा था, जमावड़ा होता रहता था। समय के साथ ये जीव और वनस्पतियां नष्ट होती जाती थीं और समुद्र की तह में जमा होती जाती थीं। धीरे-धीरे उनके ऊपर गाद मिटटी और धूल जमती गई। चट्टानें बनती गईं और ये जीवाश्म तलछट में दबते रहे।
 

आद्या --फिर पेट्रोल कैसे बन गए ?

 
काली आकृति --अरे सुनो भी, कहानी जरा लम्बी है ना ज़रा धैर्य रखो। हां तो जब उन जीवाश्मों पर जब धरती का भारी दबाव पडा और भीतर का तापमान बढ़ा तो ये जीव/पौधे एक चिप चिपे गीले पदार्थ में परिवर्तित हो गए। यह मोम सरीखा पदार्थ केरोसिन कहलाता है और वह क्रिया जिससे यह पदार्थ बनता है, डायजे नेसिस क्रिया कहलाती है।
 
रूद्र --लेकिन ..लेकिन इतना, कितना केरोसिन कहां बनता होगा, ये तो सारी दुनिया में.....कितनी अधिक खपत है पेट्रोल, डीज़ल, गैस की। फिर केरोसिन से पेट्रोल कैसे बना।
 
काली आकृति --फिर जल्द बाजी, बेटे धीरज रखो थोड़ा। असीमित मात्रा में हमारी उपस्थति धरती के भीतर है। लाखों साल पहले जब ये सूक्ष्म पौधे प्रकाश संश्लेषण क्रिया से भोजन बनाते थे ऊर्जा पाते थे और जीवित रहते थे। छोटे छोटे करोड़ों जीव इस वनस्पति को खाकर जीवित रहते थे। इन जीवों का जीवन बहुत छोटा होता था लेकिन ये करोड़ों अरबों की मात्रा में पैदा होते मरते रहते थे। और सागर की तलहटी में डूब जाते थे। भारी दबाव और तापमान से बने केरोसिन भी केटाजेनिस क्रिया से तरल रूप में बदल जाते थे और यही तरल पदार्थ ही कच्चा तेल या क्रूड ऑयल कहलाया, मतलब हम कहलाए।
 
आद्या--लेकिन ..लेकिन यह क्रूड ऑयल, मतलब अंकल आप केरोसिन के वंशज हो, ऊपर धरती पर कैसे आते हो?
 
काली आकृति -गुरुत्वाकर्षण के कारण, धरती का दबाव नीचे की तरफ होने से, हम तरल कम दबाव की तरफ मतलब ऊपर की तरफ आना चाहते हैं लेकिन भारी चट्टानें हमें रोक लेती हैं और, और हम क्रूड ऑयल तरल के रूप में चट्टानों के बीच खाली जगह में एकत्रित होते रहते हैं। और अभी भी करोड़ों लीटर कच्चे तेल के रूप में हमारे भाई वंशज जमीन में चट्टानों के नीचे दबे पड़े हैं। कहीं-कहीं जहां चट्टानें हमारी बाधा नहीं बनतीं,  मिट्‍टी को भेदता हुआ ये तरल मतलब क्रूड ऑयल मतलब हम धरती के ऊपर बिना रोक टोक के आ जाते हैं। यथार्थ में तकनीकी भाषा में हमारे इस क्रूड ऑयल रूप को हाइड्रो कार्बन कहते हैं।
 
रूद्र-तभी तो मजा है ना,  हम लोग खूब सारा पेट्रोल भरवाकर कारों में यहां वहां घूमते हैं। जितना चाहे क्रूड ऑयल धरती से निकालो। आप तो सब जगह हैं न धरती पर-धरती के नीचे अंकल?
 
काली आकृति --अरे ना- ना- ना बच्चों। बहुत कम स्थानों पर निकलते हैं हम। वे क्षेत्र भाग्यवान हैं जहां की धरती में हमारी मौजूदगी रहती है।
 
       जिस धरती के नीचे हैं हम,
 
       लोग वहां के हैं आभारी।
 
       और हमारे कारण ही तो,
 
       लोग वहां के सब पर भारी।
 
       लोग सहेजे रखते हमको, 
 
       जैसे हम हैं मृग का छौना|
 
       काला सोना ....
 
आद्या --अरे यार अंकल आप तो फिर गाने लगे। आपने क्रूड ऑयल की बात तो बताई लेकिन ये क्रूड ऑयल पेट्रोल, डीज़ल, गैस में कैसे बदलता है ये तो बताया ही नहीं। हां अंकल एक बात और आपके वंशज आजकल सबसे ज्यादा किस क्षेत्र में उपलब्ध हैं ?
 
काली आकृति -- हम तो बेताज बादशाह हैं बच्चों। जिस क्षेत्र में हम हैं तो हम ही हम हैं। वहां के लोगों की बल्ले-बल्ले है। जिस-जिस की धरती से हम निकले वह देश देखते ही देखते धनवान हो गए। अमेरिका-रूस बहुत से अरब देश, जहां-जहां हम प्रकट हुए वहां धन की कोई कमी नहीं है।
 
मेरे कारण ही दुनिया में,
 
मची हुई है बहुत लड़ाई।
 
बड़े देश छोटे देशों पर,
 
करते बम से हाथापाई।
 
मैं हूं सच में बड़ा कीमती,
 
मैं हूं अब लड्डू का दौना।
 
काला सोना.............
 
रूद्र --और हमारे अपने देश भारत में आप धरती से क्यों नहीं बाहर आते?
 
काली आकृति --बड़े नादान हो बालक, हम जब यहां धरती के नीचे होंगे तब ही तो बाहर आएंगे। लेकिन फिर भी असम, राजस्थान, गुजरात और मुंबई के पास समुद्र के नीचे से हम क्रूड ऑयल बनकर निकल रहे हैं। हमारी तेजी से खोजबीन भी हो रही है, शायद और कई स्थानों पर हम धरती में छुपे मिल जाएं। लेकिन इस देश की मांग दिन पर दिन बढ़ रही है और इतनी कम मात्रा का उत्पादन देश की आपूर्ति नहीं कर सकता आपको बाहरी देशों पर निर्भर रहना पड़ता है।
 
आद्या --ठीक है, ठीक है अब बताओ आप काले से गोरे और चमकदार मतलब पेट्रोल कैसे बने और रोज लाखों करोड़ों लीटर की मात्रा में कैसे बन जाते हो? 
 
काली आकृति --ये हुई ना काम की बात। तो सुनो बच्चों- बड़ी-बड़ी मशीनों से धरती को ड्रिल करके कई हज़ार फुट नीचे से कच्चा तेल मतलब हमें बाहर निकाला जाता है। फिर हमें सेपरेशन टेंकों में एकत्रित करते हैं। और बाद में रिफायनरी में भेज दिया जाता है।

 

रूद्र- रिफायनरी मतलब शोधन शाला ना?

 
काली आकृति --हां-हां वही जगह जहां हमारे शरीर से काम के अवयव अलग-अलग कर दिए जाते हैं। शोधन शाला में  बहुत बड़े-बड़े चेंबरनुमा संयंत्र लगे होते हैं। जिनको डिस्टिलेशन टावर कहते हैं। जिसमें हमें बहुत अधिक तापमान पर, लगभग 400 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है। और गरमी पाकर हम भाप बनने लगते हैं। हमारे जिस-जिस अवयव का बोइलिंग पॉइंट मतलब क्वथनांक सबसे कम होता है वह जल्दी भाप बनकर चेंबर के सबसे ऊपरी भाग में एकत्रित हो जाता है उससे थोडा अधिक क्वथनांक वाला उसके नीचे और अधिक क्वथनांक वाले अवयव क्रमशःनीचे के खण्डों में एकत्रित होते रहते हैं।
 

आद्या-- फिर अंकल, फिर क्या होता है?

 
काली आकृति-- फिर क्या, सबसे ऊपरी भाग में हमारा एक विशेष रूप एलपीजी उसके नीचे नेप्था उसके नीचे गेसोलीन मतलब पेट्रोल फिर केरोसिन फिर और नीचे डीज़ल फिर फ्यूल आयल और अंत में सबसे नीचे बिटूमिन मतलब डामर अलग होकर एकत्रित हो जाता है। यह क्रिया चलती रहती है। और पेट्रोलियम मतलब मेरे इन उत्पादों का अलग-अलग भण्डारण कर और शुद्धिकरण एक निश्चित प्रक्रिया द्वारा बाजारों में विक्रय के लिए भेज दिया जाता है। पेट्रोल, डीजल मोबिल आयल इत्यादि पेट्रोल पम्पों पर और अन्य सामान उचित भंडारण घरों अथवा दुकानों पर भेज दिया जाता है|
 

रूद्र--अंकल हवाई जहाज वाला ईंधन इनमें कौन सा वाला है?

 
काली आकृति--अरे! सॉरी बच्चे, वैरी सॉरी, हम तो भूल ही गए केरोसिन और डीज़ल के बीच का उत्पाद ए.टी. ऍफ़. मतलब एविएशन टरबाइन फ्यूल कहलाता है, काले कलूटे हमारे रूप का नया स्वरूप -जो हवाई जहाज उड़ा देता है।
 
स्वच्छ हमारे रंग रूप से,
 
दुनिया के वाहन चल पाते।
 
हमें पेट में भर लेते जब,
 
वायुयान नभ में उड़ पाते।
 
हम हैं तो ही पहुंच सरल है,
 
लंदन, पेरिस, वार्सीलोना।
 
काला सोना .........
 
आद्या --इन्हीं गानों के चक्कर में आप काम की बात भी भूल जाते हैं। काले अंकल, ये जो डामर है जिसे आप सभ्य भाषा में बिटुमिन कहते हैं मुझे बहुत गन्दा लगता है और प्लास्टिक छी-छी ...चिपचिपा सा ....
 
काली आकृति –-
 
सड़कों पर जो चम-चम करता,
 
वह डामर भी हम हैं भाई।
 
और प्लास्टिक- पॉलीथिन भी,
 
तो हमने ही है उपजाई।
 
इनकी बनी थैलियां डिब्बे,
 
बच्चों के हैं बने खिलौना।
 
रूद्र -–अरे यार फिर गाना, क्या आप गवैए हो।
 
काली आकृति --हां हां गवैया हूं गवैया। आजकल सारी दुनिया मुझे ही तो गा रही है। एक तो हमारे बिना काम नहीं चलता, हमारा अंधाधुंध उपयोग होता है और जब प्रदूषण होता है गाली भी सब हमें ही देते हैं।
 
होने लगी रोज ही अब तो,
 
घर-घर बात प्रदूषण वाली।
 
जुम्मेवारी इसकी सिर पर,
 
लोगों ने बस हम पर डाली।
 
उनकी गलती का अपने सिर,
 
दोष पड़ रहा हमको ढोना।
 
काला सोना...............
 
आद्या --क्या बात है काले अंकल, आप क्रूड ऑयल कम और कवि ज्यादा लग रहे हैं।
 
काली आकृति --क्या कहूं यातनाएं सहते-सहते आलोचनाएं सुनते-सुनते जैसे आदमी कवि बन जाता है तो हम भी बन गए। आप लोग दस कदम पैदल नहीं चल सकते, हाथ में कपडे की या कागज़ की थैली लेकर नहीं चल सकते और प्रदूषण के लिए दोष डीज़ल का, पेट्रोल का, पॉलीथिन का और प्लास्टिक का, वाह क्या गजब की सोच है।
 
क्यों उपयोग बढाए जाते,
 
लोग हमारा हर दिन भाई।
 
पैदल दस गज चलने में ही,
 
उन्हें हो रही क्यों कठिनाई।
 
कपड़े वाली थैली हाथों,
 
में लगती क्यों भारी ढोना।
 
काला सोना ..............
 
रूद्र --क्षमा करें अंकल। हमें नहीं मालूम था कि आपको भी आम आदमियों के सेहत की इतनी चिंता है। गलतियां आदमियों से हो रहीं हैं और दोष हम कारखानों को, पेट्रोल को, डीज़ल को,पॉलीथिन को दे रहे हैं। पेट्रोलियम के लिए युद्ध हो रहे हैं, निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं, करोड़ों की संपत्ति नष्ट हो रही है और देश इसके अधिपत्य के लिए अरबों खरबों रुपयों के हथियार बना रहे हैं, बेच रहे हैं और खरीद रहे हैं।
 
अंधाधुंध दोहन धरती का,
 
धरती होती जाती खाली।
 
हुई मानसिकता लोगों की,
 
ज्यादा धन सुविधाओं वाली।
 
बढ़ते रोग अस्थमा दिल के,
 
फैला करता यहां करोना।
 
काला सोना.....
 
आद्या --रूद्र भैया इन अंकल ने तो हमारी आंखें खोल दीं। मुझे भी माफ़ करना मेरे प्रिय काले अंकल। आप काले हैं तो क्या हुआ। आप सच में काला सोना कहलाने के हकदार हैं। आप सोने के सामान कीमती हैं लेकिन आपका ह्रदय पेट्रोल सरीखा चमकदार और ऊर्जावान है।
 
हमें ही सुधरना होगा। हम बच्चों को सोचना होगा। हम ही तो हैं प्रदूषण के हरकारे।
 
{आद्या और रूद्र गाते हैं}
 
पेट्रोल, डीज़ल, पॉलीथिन,
 
घोर प्रदूषण हैं फैलाते।
 
पता नहीं क्यों नहीं नियंत्रण,
 
थोड़ा भी इन पर कर पाते।
 
आम हमे पाना है तो फिर,
 
बीज बबूलों के क्यों बोना।
 
काला सोना....
 
आद्या --रूद्र भैया क्यों न हम अपने मित्रों को भी बुलाकर काले अंकल की बातों का समर्थन कर उनका अभिनन्दन करें?
 
रूद्र --हां हां बिलकुल बहन आद्या, बिलकुल ठीक कहा तुमने। हम अपने मित्रों को अभी बुलाते हैं।
 

{तभी मंच पर चार बच्चे और आ जाते हैं}

 
फिर काली आकृति सहित सब बच्चे गाते हैं –
 
अब हम सबने सोच लिया है,
 
आसपास पैदल जाएंगे।
 
दूर-दूर जाना होगा तो,
 
ही हम वाहन ले जाएंगे।
 
अब कपडे के थैलों का ही,
 
हम उपयोग करेंगे हरदिन।
 
जीना भी अब शुरू करेंगे,
 
बिना प्लास्टिक, पॉलीथिन बिन,
 
पैदल चलने में अब हमको,
 
नहीं आएगा बिलकुल रोना।
 
काला सोना काला सोना ........
 

{धीरे- धीरे परदा बंद होता है}


(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते