शुक्र ग्रह को कैसे बनाएं बलशाली, जानिए लाल किताब से...

- अनिरुद्ध जोशी 'शतायु' 
 
कुंडली के प्रत्येक भाव या खाने अनुसार शुक्र के शुभ-अशुभ प्रभाव को लाल किताब में विस्तृत रूप से समझाकर उसके उपाय बताए गए हैं। यहां प्रस्तुत है प्रत्येक भाव में शुक्र की स्थित और सावधानी के बारे में संक्षिप्त और सामान्य जानकारी।
 
विशेषता : बैल, गाय।
 
(1). पहला खाना : इसे रंग-बिरंगी दुनिया मानो। यदि शुक्र पहले खाने में है तो ऐसा व्यक्ति रूपवान और विलासी रहता है। गायन, वादन और चित्रकला में रुचि रहती है। इसके शुभ या अशुभ होने की स्थिति शनि पर निर्भर है। फिर भी व्यक्ति के कामकाज पर इसका असर नहीं पड़ता। शनि यदि अच्छा है तो व्यक्ति की कमाई अच्छी होगी और उसकी पत्नी रानी होगी। 
 
सावधानी : शुक्र एक के वक्त यदि पहले या सातवें खाने में राहु, चंद्र, सूर्य हो तो पराई स्त्री पर नजर न रखें। दूसरों की सलाह लें।
 
(2). दूसरा खाना : यदि इस खाने में शुक्र है तो धन का अभाव नहीं रहता। मोहमाया, उत्तम गृहस्थ, अर्थात औरत और गृहस्थी का पूरा सुख मिलेगा। साठ वर्ष की उम्र तक कमाई जारी रहेगी। यदि शनि दो या नौ में है तो शुक्र का असर दोगुना बढ़ जाएगा।
 
सावधानी : दूसरों के बजाय सिर्फ ईश्वर से ही मांगें। किसी की बुराई करना भाग्य को रोकना सिद्ध होगा। चरित्र को ठीक रखना आवश्यक है अन्यथा दुश्मन की दुश्मनी के शिकार हो जाएंगे। शेरमुखी मकान का बुरा असर।
 
(3). तीसरा खाना : कवि या कलाकार होने में रुचि होती है। इस खाने में शुक्र का होना अर्थात 'सती' का होना माना गया है। ऐसे व्यक्ति की पत्नी जब तक जिंदा है मौत उसके पास फटक नहीं सकती। शुक्र तीन के समय गुरु नौ या बुध ग्यारहवें खाने में है तो शुक्र का असर खराब होता है।
 
सावधानी : पत्नी का अपमान न करें, बल्कि हर जगह उसकी इज्जत और तारीफ करें। दुराचारी होने से बदनामी फैल सकती है।
 
(4). चौथा खाना : यदि इस खाने में शुक्र है तो वाहन सुख अवश्य मिलेगा। व्यक्ति का उठना-बैठना बड़े लोगों में रहेगा। चौथे खाने के शुक्र को खुश्की का सफर कहा गया है अर्थात ऐसे व्यक्ति की यात्राएं बहुत होंगी। यात्राओं से लाभ ही मिलेगा। जमीन-जायदाद संबंधी मामलों में सफलता मिल सकती है।
 
सावधानी : आसपास या घर में कुआं हो तो उसे बंद न करें या उस पर ढक्कन न रखें। चंद्र का उपाय करें। दूसरे की बुराइयों पर परदा डालें। मकान की छत दुरुस्त रखें। शराब से दूर रहें। बहन और बुआ से अच्छे संबंध रखें।
 
(5). पांचवां खाना : यदि इस खाने में शुक्र है तो 'बच्चों से भरा खाना' मानो। ऐसे व्यक्ति की पत्नी जब तक जिंदा रहेगी तब तक उसके कामकाज में कोई रुकावट नहीं आएगी। यहां साधु स्वभाव का होने से शुभ फल देगा।
 
सावधानी : पराई स्त्री से प्रेम-प्रसंग होना अर्थात अपने आसपास कांटों के जाल बुनना सि‍द्ध होगा। माता-पिता की मर्जी से ही विवाह करें। यदि प्रेम विवाह करने जा रहे हैं तो भी उनकी मर्जी जरूरी है अन्यथा इसका औलाद पर बुरा असर होगा। 
 
(6). छठा खाना : इस खाने में स्थित शुक्र शत्रुता बढ़ाता है। यदि छठे खाने में शुक्र है तो ऐसा व्यक्ति यदि अपनी शिक्षा के अनुसार काम के अलावा कोई अजीब-सा कार्य करे तो धन-दौलत में बरकत होगी।
 
सावधानी : पत्नी को कभी नंगे पांव जमीन पर न चलने दें। पत्नी को शान और इज्जत से रखें। 
 
(7). सातवां खाना : यदि शुक्र यहां उच्च का है तो अमीर खानदान की सुंदर स्त्री मिलती है। व्यक्ति की घर से दूर परदेश में कमाई हो सकती है। स्त्री सुंदर और मीठे स्वभाव वाली मिलेगी। शादी के बाद 37 वर्ष तक जीवन सुखमय गुजरेगा।
 
सावधानी : ससुराल पक्ष के साथ कारोबार न करें। बेहया, बेशर्म या कामी विचारों से घिरे रहने से बर्बादी हो सकती है। छत में उजाल दान न लगाएं अर्थात घर में आसमान से रोशनी के रास्ते बंद कर दें।
 
(8). आठवां खाना : इस खाने में शुक्र को 'चांडाल स्त्री' माना गया है। पत्नी के मुँह से निकला नकारात्मक वचन सत्य सिद्ध हो सकता है। व्यक्ति को अनायास धन प्राप्त होता है।
 
सावधानी : कभी भी किसी से दान न लें और मंदिर में सिर झुकाते रहें। माता, भाई और बहन का आशीर्वाद लेते रहें। किसी के लिए जमानत न दें और न ही कसम खाएं। चाल-चलन उत्तम रखें। पत्नी से बनाकर रखें। नशा न करें।
 
(9). नवम खाना : उजाड़ खेत। इसे काली आंधी भी कहा गया है। स्त्री या दौलत में से एक का लाभ। ऐसा व्यक्ति दूसरों की मुसीबत अपने सिर ओड़ने वाला होता है। किस्मत उतनी जितनी मेहनत होगी। अभिनय में रु‍चि।
 
सावधानी : तीर्थ यात्रा के मौके न चूकें। भाई से अच्छे संबंध रखें। सफेद रंग की गाय न पालें।
 
(10). दसवां खाना : यदि इस खाने में शुक्र है तो ऐसा व्यक्ति अपनी जवानी प्रेम संबंधों में बर्बाद कर सकता है। यदि शुक्र पर शनि की दृष्टि पड़ रही है तो व्यक्ति में शैतानी और चालाकी बढ़ जाती है लेकिन यदि शुभ कर्म करने वाला है तो सुखी रहेगा।
 
सावधानी : पश्चिम की दीवार कच्ची रखें या पश्चिम में कच्चा स्थान रखें। पति-पत्नी दोनों धर्म-कर्म में विश्वास रखें।
 
(11). ग्यारहवां खाना : माया के चक्कर में घूमता व्यक्ति। मित्र की सहायता से धनार्जन कर लेता है। पुत्र बहुत होते हैं।
 
सावधानी : यदि यहां शुक्र मंदा है तो पत्नी के भाइयों से मदद लें। सरसों का तेल दान करें। कभी भी किसी पराई स्त्री से संबंध न रखें।
 
(12). बारहवां खाना : इस खाने में शुक्र को 'लक्ष्मी' कहा गया है। 
 
सावधानी : व्यभिचार न करें। पवित्रा बनाएं रखें।

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