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ICC ने विश्व कप फाइनल में ‘ओवरथ्रो’ फैसले पर किया कुमार धर्मसेना का बचाव

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शनिवार, 27 जुलाई 2019 (23:25 IST)
दुबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने लार्ड्स में 14 जुलाई को खेले गए विश्व कप फाइनल मुकाबले में अंपायर कुमार धर्मसेना के ओवरथ्रो में दिए 6 रन के विवाद के बाद उनका बचाव करते हुए कहा है कि यह फैसला सही प्रकिया के तहत लिया गया है।

ICC ने इस विवाद में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया है। इंग्लैंड की पारी में ओवरथ्रो में धर्मसेना ने 5 की बजाय एक रन अतिरिक्त देते हुए कुल 6 रन दिए थे। लक्ष्य का पीछा कर रही इंग्लैंड की पारी में जब उसे तीन गेंदों पर 9 रन की जरूरत थी तब इन 6 रनों ने पूरे मैच को पलट कर रख दिया था। उस समय बल्लेबाज़ बेन स्टोक्स क्रीज़ पर थे और उन्होंने छलांग लगाते हुए अपना दूसरा रन पूरा किया था।

धर्मसेना ने कहा था कि उनका यह संयुक्त फैसला था और उन्होंने इसके लिए ऑनफील्ड अंपायर साथी मरायस इरासमस से सलाह की थी जिसे बाकी मैच अधिकारियों ने भी सुना था। ICC के महाप्रबंधक क्रिकेट ज्यॉफ एलार्डिस ने क्रिकइंफो से कहा कि इस डिलीवरी के बाद वे सबने मिलकर यह फैसला किया था। मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि इसके लिए सही प्रक्रिया का पालन किया गया था।

किसी मैच अधिकारी के लिए फैसला लेने की कोई तय समय-सीमा नहीं है, ऐसे में एलार्डिस ने कहा कि मैच के दौरान परिस्थितियां ऐसी नहीं थीं कि थर्ड अंपायर या रेफरी को इसमें हस्तक्षेप करना पड़े।

उन्होंने कहा कि जब वे इस बात पर फैसला कर रहे थे कि बल्लेबाज़ ने लाइन पार की है या नहीं तो वे नियमों से अच्छी तरह वाकिफ थे। इस तरह का फैसला थर्ड अंपायर या रेफरी के पास नहीं जाता है। मैच रेफरी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता है जब मैदानी अंपायर खुद कोई फैसला कर रहा होता है। यह नियम है।

उन्होंने साथ ही कहा कि आईसीसी की क्रिकेट समिति पूरे फाइनल मैच पर गौर कर रही है जिसकी अध्यक्षता अनिल कुंबले के हाथों में है। हालांकि यह समिति 2020 के पहली तिमाही से पूर्व बैठक नहीं करने वाली है।

आईसीसी अधिकारी ने साथ ही बताया कि विश्वकप के संयुक्त विजेता के प्रश्न पर गत सप्ताह लंदन में आईसीसी की सालाना बैठक में भी चर्चा की गई थी और सभी का मानना है कि इतने बड़े टूर्नामेंट का विजेता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी की सर्वसम्मति है कि विश्व कप फाइनल में विजेता होना चाहिए। सुपर ओवर का नियम भी पुराना है जो 2011, 2015 और 2019 तीनों विश्वकप में लागू किया गया ताकि विजेता का फैसला हो सके।

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