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'ठुकरा के मेरा प्यार', टेस्ट टीम से हटे तो गुस्सा हुए पेसर मुकेश कुमार

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Mukesh Kumar
मुकेश कुमार को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले 5 टेस्ट मैचों की सीरीज में भारतीय दल में नहीं शामिल किया गया है। ऐसे में उन्होंने कर्मा का उल्लेख कर यह लिखा कि कर्मा ना किसी को छोड़ता है और हमेशा सूद समेत हिसाब पूरा करता है। अब मुकेश कुमार यह किस के लिए कह रहे हैं यह तो फैंस समझ सकते हैं। लेकिन इनकी इंस्टा स्टोरी काफी वायरल हो गई।
6 साल पहले हुआ था पिता का निधन

उनके पिता काशीनाथ सिंह उनके क्रिकेट खेलने के खिलाफ थे और वे चाहते थे कि वह सीआरपीएफ से जुड़े। 2019 में उनके पिता का निधन हो गया। मुकेश दो बार सीआरपीएफ की परीक्षा में विफल रहे और बिहार की अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका क्रिकेट करियर भी आगे नहीं बढ़ रहा था।

उन्होंने फिर बंगाल में ‘खेप’ क्रिकेट खेलने का फैसला किया। वह टेनिस बॉल क्रिकेट में गैर मान्यता प्राप्त क्लबों का प्रतिनिधित्व करते जिसमें उन्हें प्रत्येक मैच में 500 रूपये से लेकर 5000 रूपये मिलते।

मुकेश कुमार जूझे कुपोषण से

मुकेश कुपोषण से जूझ रहे थे और उन्हें ‘बोन एडीमा’ भी था जिसमें उनके घुटने में अत्यधिक पानी इकट्ठा हो जाता था जिससे वह मैच नहीं खेल पाते। पर बंगाल के पूर्व तेज गेंदबाज राणादेब बोस ने उनकी जिंदगी बदल दी।

बंगाल क्रिकेट संघ के ‘विजन 2020’ कार्यक्रम में बोस ने मुकेश की प्रतिभा देखी। हालांकि वह ट्रायल्स में विफल रहे लेकिन बोस ने तब के कैब सचिव सौरव गांगुली को मनाया।

जिसके बाद संघ ने उनके खाने पीने का पूरा ध्यान रखा और उनका एमआरआई करवाया, उनके मेडिकल खर्चे का इंतजाम किया।फिर मुकेश ने 2015-16 में हरियाणा के खिलाफ बंगाल के लिए पदार्पण किया। 

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