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आईसीसी ने 'स्पॉट फिक्सिंग' के आरोपों को गंभीरता से लिया

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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017 (23:58 IST)
पर्थ। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच चल रही प्रतिष्ठित एशेज़ सीरीज़ का गुरुवार से शुरू हुआ तीसरा महत्वपूर्ण टेस्ट मैच खिलाड़ियों के मैदान पर उतरने से पहले ही स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों से घिर गया। इस बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन साथ ही माना कि मैच को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है।
 
 
इंग्लैंड के लिए गुरुवार से पर्थ में शुरू हुआ तीसरा मैच सीरीज़ में बने रहने के लिहाज़ से जहां अहम है तो वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए यह 3-0 से सीरीज़ कब्ज़ाने का सुनहरा मौका। दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण इस मैच को लेकर जहां काफी रोमांच था वह इसके शुरू होने से ठीक पहले अखबार 'सन' की उस रिपोर्ट से फीका हो गया जिसमें दावा किया गया है कि इस मैच को लेकर सट्टेबाज़ों की सक्रियता थी।
 
 
अखबार ने दावा किया है कि उसके पास उन सट्टेबाज़ों की विस्तृत जानकारी है जिन्होंने एक निश्चित समय के दौरान स्पॉट फिक्सिंग के लिए संपर्क साधने का प्रयास किया था। रिपोर्ट के अनुसार दो सट्टेबाज़ों ने अखबार के खुफिया पत्रकारों से स्पॉट फिक्सिंग के लिए सट्टा बाज़ार की कीमत के आधार पर एक लाख 87 हजार डॉलर की मांग की थी। यह कीमत प्रति ओवर एक निश्चित रन बनाने के लिए थी। हालांकि अखबार ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी टीम के खिलाड़ी या टीम प्रबंधन के नाम का जिक्र नहीं किया है।

ब्रिटिश अखबार सन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि यह सट्टेबाज़ भारत से थे और उन्होंने अखबार के गुप्त पत्रकारों को पर्थ में हो रहे ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड टेस्ट मैच में स्पॉट फिक्सिंग की जानकारी बेचने का भी प्रस्ताव दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, सट्टेबाज़ों ने पत्रकारों को यह भी बताया कि वह इससे पहले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में और ऑस्ट्रेलिया की चर्चित बिग बैश ट्वंटी 20 क्रिकेट लीग में भी सट्टेबाज़ी कर चुके हैं। हालांकि अखबार के इन दावों की जांच होने तक इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।

लेकिन स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के कारण आईपीएल का 2013 सत्र काफी दागदार हुआ था और इस कारण से इसकी दो टीमों चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को निलंबन तक झेलना पड़ा था। वहीं राजस्थान के तीन खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया था जिसके बाद उन्हें जेल की सज़ा हुई थी तथा आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया था।

इस बीच क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अखबार की इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है जबकि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने भी कहा कि भले ही रिपोर्ट में किसी भी इंग्लिश खिलाड़ी का नाम नहीं है लेकिन वह इन आरोपों को लेकर चिंतित हैं।

अखबार ने यह भी कहा है कि उसने वैश्विक संस्था आईसीसी को अपने सभी सबूत दे दिए हैं और उसकी भ्रष्टाचार निरोधक शाखा इस मामले की जांच करेगी। आईसीसी की एसीयू इकाई के महाप्रबंधक एलेक्स मार्शल ने कहा, अखबार सन की रिपोर्ट और हमारी अपनी खुफिया तंत्रों से मिली जानकारी के हिसाब से शुरुआती जांच में साफ है कि वाका में होने वाले मौजूदा मैच में किसी तरह का भ्रष्टाचार नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, इस स्तर पर अभी जो शुरुआती जांच है उसके हिसाब से भ्रष्टाचार या किसी भी खिलाड़ी के फिक्सरों से संपर्क में होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इस तरह के आरोप कई देशों में क्रिकेट के हर प्रारूप में देखने को मिलते हैं जिसमें ट्वंटी 20 टूर्नामेंट भी हैं। हम मिली जानकारी पर करीब से काम कर रहे हैं।

हालांकि इस मामले के सामने आने से आईसीसी और दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड में हड़कंप मच गया है। मामले के सामने आने के बाद सीए के मुख्य कार्यकारी जेम्स सदरलैंड ने मार्शल के साथ कॉन्‍फ्रेंस कॉल कर मामले पर चर्चा की जिसमें आईसीसी के प्रमुख डेव रिचर्डसन भी शामिल हुए।

सदरलैंड ने बताया कि आईसीसी एसीयू के महाप्रबंधक मार्शल ने साफ किया है कि ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड के किसी भी खिलाड़ी को लेकर फिलहाल किसी तरह के सबूत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी का नाम इसमें शामिल है या नहीं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के चार खिलाड़ियों को इंग्लैंड में लार्ड्स टेस्ट 2010 में स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया था और वर्ष 2011 में उन्हें जेल की सज़ा सुनाई गई थी जो टेस्ट इतिहास में फिक्सिंग और भ्रष्टाचार का काफी चर्चित मामला था। (वार्ता)

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