Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

क्या शाकाहारियों को कोविड का खतरा कम होता है?

webdunia

DW

सोमवार, 21 जून 2021 (16:58 IST)
रिपोर्ट : लुइजा राइट
 
महामारी में पोषण से जुड़ी बहुत सी सलाहें दी जा रही हैं। लेकिन क्या कोई ऐसा अकेला खाना है जो कोविड-19 के गंभीर संक्रमण पर काबू पा सके? वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का कहना है कि मिलाजुला संतुलित आहार ही आखिरकार काम करेगा।
 
खाने को लेकर हमारी रुचियों का सीधा असर हमारे शरीर की सेहत, उसके कामकाज, और हमारी प्रतिरोध प्रणाली पर पड़ता है। कोरोनावायरस से संक्रमण फैला हुआ है और लोग जानना चाहते हैं कि वो उससे बचाव के लिए घर में रहते हुए क्या कर सकते हैं। प्रतिरोध प्रणाली को मजबूत बनाने वाले पोषणयुक्त आहार से अच्छी शुरुआत की जा सकती है। वैज्ञानिकों ने आहार और कोविड-19 संक्रमण के बीच जुड़ाव देखना शुरू किया है। उनका एक प्रमुख बिंदु हैः सेहतमंद शरीर और प्रतिरोध प्रणाली के लिए विभिन्न किस्म के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। ब्रिटेन की साउथाम्प्टन यूनिवर्सिटी में न्यूट्रीश्नल इम्युनोलॉजिस्ट फिलिप कैल्डर कहते हैं, "कोविड 19 से बचाव की इकलौती जादुई गोली की तरह कोई एक पोषक तत्व नहीं बना है।
 
सिर्फ आहार ही काफी नहीं
 
फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका में 2,884 स्वास्थ्यकर्मियों पर एक अध्ययन किया गया था जो मई में बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ था। उसमें पाया गया कि शाकाहारी लोगों में और सागपात, फल-सब्जी के साथ-साथ सीफूड भी लेने वाले लोगों में औसत से गंभीर कोविड संक्रमण होने का खतरा उन लोगों की अपेक्षा कम था जिन्होंने उक्त आहार नहीं लिया था।
 
शाकाहारियों में औसत से गंभीर कोविड संक्रमण के मौके 73 प्रतिशत कम थे, शाकाहार और सीफूड खाने वालों में 59 प्रतिशतत कम मौके थे। निम्न कार्बोहाइड्रेट, अधिक प्रोटीन वाली डाइट में औसत से गंभीर संक्रमण का खतरा शाकाहारियों की तुलना में 3 गुना ज्यादा था।
 
वैज्ञानिकों ने वैसे उम्र, लिंग, जातीयता, मेडिकल खासियत, बॉडी मास इंडेक्स, मेडिकल कंडीशन और धूम्रपान और व्यायाम जैसे जीवनशैली से जुड़े फैक्टरों को भी मद्देनजर रखकर अध्ययन किया था। फिर भी, इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। 70 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागी पुरुष थे और 95 प्रतिशत डॉक्टर थे।
 
स्टडी में दूसरे प्रभावकारी फैक्टरों को शामिल नहीं किया गया था जैसे दबाव, तनाव और नींद। कैल्डर कहते हैं कि बहुत सी चीजें लोगों के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती हैं और डाइट उनमें से सिर्फ एक चीज है। न तो वो सब कुछ है और न ही उसके साथ सबकुछ खत्म हो जाता है।
 
अध्ययन में शामिल 568 कोविड मामलों में सिर्फ 298 का पीसीआर या एंटीबॉडी टेस्ट पॉजिटिव आया था। बाकी मामलों में कोविड के सामान्य लक्षण पाए गए थे। जब अध्ययन सिर्फ पॉजिटिव मामले वाले रोगियों तक सीमित रखा गया तो छोटे सैंपल आकार का मतलब था कि आगे उसकी कोई अहमियत नहीं रहनी थी। वैसे भी ये संबंध मुख्य नतीजों जैसा ही था। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की स्क्रीनिंग के जरिए ये सुनिश्चित किया था कि वे कोविड-19 से अच्छे-खासे प्रभावित रोगी हों। लेकिन प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी के संक्रमण के एक्सपोजर को कितना रखें, इस पर नियंत्रण रखने में वे असमर्थ थे।
 
कैसा भोजन चाहिए
 
अध्ययन की सीमाएं रही हैं, लेकिन उसके नतीजे कमोबेश विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की आहार की सिफारिशों जैसे ही थे। इंसानों को माइक्रोन्यूट्रीएन्ट और मैक्रोन्यूट्रीएन्ट- दोनों की जरूरत होती है। ये ज्यादातर पोषक तत्व हमें शाकाहारी खाने में मिल जाते हैं।
 
माइक्रोन्यूट्रीएन्ट में शामिल हैं विटामिन और मिनरल यानी खनिज। ये चीजें हमारे शरीर के सहज संचालन, और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने में काम आती हैं। मैक्रोन्यूट्रीएन्ट हमें ऊर्जा देते हैं जिससे हम अपनी शारीरिक गतिविधियां चला सकें। उन्हें मोटे तौर पर 3 समूहों में बांटा जा सकता हैः कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट यानी वसा।
 
डब्लूएचओ, विभिन्न किस्मों के फल, सब्जी, फली, नट्स, ब्राउन राइस, ओट्स, बाजरा, ज्वार और जानवरों से हासिल चीजों से मिलीजुली डाइट की सिफारिश करता है। लोगों को हर रोज कम से कम चार सौ ग्राम फल और सब्जी खानी चाहिए। यूं आलू, चुकंदर और कसावा जैसी जड़ वाली स्टार्चयुक्त सब्जियां स्वास्थ्यप्रद होती हैं लेकिन उनकी गिनती आपके एक दिन में 5 वाले खाने में नहीं होती।
 
ये भी देखा जाना चाहिए कि क्या नहीं खाना है?
 
दिन में 12 चम्मच चीनी से ज्यादा न ली जाए। वैसे आदर्श रूप से स्वास्थ्य लाभ के लिए सिर्फ 6 चम्मच काफी हैं। इसमे वो तमाम शुगर शामिल है जो आप खाने या पेय पदार्थों के जरिए लेते हैं या जो शहद, जूस या सिरप में मिलती है। फलों और सब्जियों में मिलने वाली शुगर इसमे शामिल नहीं हैं। नमक का सेवन दिन में सिर्फ एक चम्मच जितना होना चाहिए।
 
ओमेगा-3 खाने से कोविड का कहर कम?
 
कोविड-19 संक्रमण के खतरे को कम करने में एक और पोषक तत्व का योगदान है और वो है ओमेगा-3 फैटी एसिड। 3 तरह के ओमेगा की दरकार इंसानों को रहती हैः एएलए, डीएचए और ईपीए।
 
एएलए मुख्य रूप से पौधों के तेल और बीजों में पाया जाता है, जैसे चिया, अलसी और कनोला तेल। डीएचए और ईपीए सिर्फ मछलियों और कुछ किस्म के एल्जी यानी शैवालों में मिलते हैं। शाकाहारी और वीगन डाइट लेने वाले लोग एल्जी से बने सप्लीमेंट लेकर ओमेगा की ये जरूरत पूरी कर सकते हैं। मछलियां शैवाल को खाती हैं और इसीलिए उनमें ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में होता है।  
 
ईरान के शोधकर्ताओं ने पाया है कि ओमेगा-3 कोविड-19 के खिलाफ अहम रोल अदा करते हैं। रैंडम तौर पर नियंत्रित एक ट्रॉयल के नतीजे इस साल मार्च में जर्नल ऑफ ट्रांसलेश्नल मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं। उनके मुताबिक गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 के जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दो सप्ताह तक 400 मिलीग्राम ईपीए और 200 मिलीग्राम डीएचए वाली 1000 मिलीग्राम ओमेगा-3 सप्लीमेंट की खुराक दी गयी, उनमें एक महीने बाद 21 प्रतिशत का सरवाइवल रेट पाया गया। उनकी तुलना में कंट्रोल ग्रुप का सरवाइवल रेट 3 प्रतिशत था।
 
इस खुराक से कोविड के गंभीर मरीजों के शरीर में श्वसन और गुर्दे संबंधी कार्यों से जुड़े कुछ चिन्हों में सुधार भी देखा गया। लेकिन लेखकों का कहना है कि इस बारे में और अध्ययन की जरूरत है।   
 
सिर्फ मुहावरा नहीं है पेट पालना
 
जब आप भोजन करते हैं तो आप अपने शरीर में रहने वाले माइक्रोबायोम यानी जीवाणुओं और फंगस, परजीवियों, और वायरसों जैसे सूक्ष्मजीवियों को भी खाना खिला रहे होते हैं। इनमें से सबसे अधिक संख्या में सूक्ष्मजीवी हमारे गट यानी पेट में रहते हैं। ब्रिटेन की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में इम्युनोलॉजिस्ट शीना क्रुइकशांक कहती हैं, "ये सूक्ष्मजीवी कई काम करते हैं। खाना पचाने में मदद करते हैं, बहुत काम के विटामिन तैयार करते हैं, इन्फेक्शन से बचाते हैं और हमारी प्रतिरोध प्रणाली को शिक्षित करते हैं।
 
क्रुइकशांक बताती है कि माइक्रोबायोम पेट के बाहरी किनारों की कोशिकाओं को मजबूत बैरियर के रूप में ढालकर वहां पनपने वाले कीटाणुओं से हमारी हिफाजत करते हैं। बाहरी कीटाणुओं से भी हमें वे मुस्तैदी से बचाते हैं। आपका आहार ये तय करने में भी अहम भूमिका निभाता है कि किस किस्म के सूक्ष्मजीवी आपकी आंतों में रहते हैं।
 
रेसिस्टेंट स्टार्च जैसे फाइबर- उदाहरण के लिए पके हुए लेकिन ठंडे आलू और चावल, बीन्स या दालें- अच्छे बैक्टीरिया का भोजन जुटाने में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक फूड में जीवित लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं और वे भी मदद कर सकते हैं। खमीरयुक्त भोजन में केफिर, दही, किमची, मीजो, बंदगोभी का अचार, अन्य सब्जियों का अचार, टेम्पेह और कम्बूचा टी जैसी चीजें शामिल हैं। ये तमाम भोजन आपके पेट को स्वस्थ बनाए रखते हैं। और फिर उसी स्वस्थ पेट की मदद से कोविड-19 के खिलाफ आपका इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

कोरोना की दूसरी लहर से भारत ने क्या सबक लिया?