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आसियान का ऐलान : किसी के युद्ध का मैदान नहीं हैं हम

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सोमवार, 14 नवंबर 2022 (12:03 IST)
चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती जोरआजमाइश के बीच आसियान देशों ने कहा है कि वे इन शक्तियों का खिलौना बनने को तैयार नहीं हैं। आसियान सम्मेलन के दौरान इस बात पर चर्चा हुई। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया को नए शीतयुद्ध का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा।

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते कूटनीतिक व भोगौलिक तनाव के चलते दोनों ही शक्तियां आसियान देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में लगी हैं। ऐसे में एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस की अध्यक्षता संभालते हुए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति विडोडो ने कहा कि यह संगठन किन्हीं भी शक्तियों का छद्म नहीं बनेगा।

हिंद-प्रशांत में बढ़ रहे हैं शीतयुद्ध के आसार
विडोडो ने कहा कि 10 देशों का यह संगठन कुल मिलाकर 70 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो एक गरिमापूर्ण क्षेत्र होना चाहिए और जिसे ‘मानवीय व लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान' करना चाहिए। आसियान के लिए म्यांमार और कंबोडिया के रूप में इन मूल्यों के सम्मान की बड़ी चुनौतियां हैं। दोनों ही देशों पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं।

विडोडो ने कहा, आसियान को एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बनना है जो वैश्विक स्थिरता के लिए काम करे, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करे और किसी का छद्म रूप बनकर ना रहे। आसियान को मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को अपने क्षेत्र में शीत युद्ध में तब्दील नहीं होने देना है।

चीन और अमेरिका का मुकाबला
हाल के सालों में चीन ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए हर तरह का तरीका आजमाया है। दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ उसने बड़े समझौते किए हैं जिनमें व्यापारिक और सैन्य सहयोग भी शामिल है। इसके जवाब में अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दीहै।

कंबोडिया की राजधानी फ्नोम पेन में जब सप्ताहांत पर हुई आसियान देशों की बैठक चल रही थी, तब ताइवान के पूर्व में फिलीपीन सागर में क्वॉड देश– अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया सैन्य अभ्यास कर रहे थे।

उसी दौरान शनिवार को चीन की सेना के 36 लड़ाकू विमानों ने ताइवान के आसपास के आसमान में चक्कर लगाए। ताइवानी अधिकारी बताते हैं कि इनमें से दस तो ताइवान खाड़ी में उस काल्पनिक रेखा के करीब तक आए, जो चीन और ताइवान के बीच समुद्र को बांटती है।

साथ-साथ ईस्ट एशिया समिट भी
रविवार को ही ईस्ट एशिया समिट भी हुई, जिसमें अमेरिका और चीन दोनों के राष्ट्रपति शामिल हुए। इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जोर देकर कहा कि आवाजाही की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वी चीन और दक्षिणी-चीन सागर में उड़ान के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

बाइडेन ने कहा कि अमेरिका संपर्क और संवाद के रास्ते खुले रखते हुए चीन के साथ प्रतिद्वन्द्वता जारी रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि यह प्रतिद्वन्द्विता किसी तरह के विवाद में ना बदल जाए। उन्होंने कहा कि ताइवान की खाड़ी में शांति और स्थिरता उनकी प्राथमिकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इसी हफ्ते इंडोनेशिया के शहर बाली में जी20 में शामिल होंगे, जहां वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मिलेंगे। जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा ने भी आसियान के नेताओं से मुलाकात की और चीन को लेकर चर्चा की।

जापानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक किशिदा ने इन नेताओं के सामने आर्थिक जोर-जबरदस्ती के जरिए पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की। बयान के मुताबिक किशिदा ने आसियान के संयम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और ताइवान खाड़ी में शांति और स्थिरता की अहमियत पर जोर दिया।
- वीके/सीके (रॉयटर्स, एपी, एएफपी)

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