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भारत में कोविड-19 टीके को लेकर संशय जारी

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मंगलवार, 19 जनवरी 2021 (17:27 IST)
रिपोर्ट : चारु कार्तिकेय
 
करीब 4 लाख लोगों को टीका लगने के बाद भारत बायोटेक ने कहा है कि टीका बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को नहीं लगाया जाना चाहिए। सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे में इस टीके को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल रखना कितना सही है?
 
केंद्र सरकार ने सोमवार, 18 जनवरी को बताया कि टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक 3,81,305 लोगों को टीका लग चुका है। हालांकि सरकार यह जानकारी नहीं दे रही है कि कितनों को सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड लगाई गई है और कितनों को भारत बायोटेक की कोवैक्सीन? लेकिन केंद्र सरकार के अस्पतालों में सिर्फ कोवैक्सीन ही लगाई जा रही है। लाखों लोगों को टीका लग जाने के बाद सोमवार को भारत बायोटेक ने कहा कि उसका टीका सबके लिए नहीं है।
 
कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर एक 'फैक्ट-शीट' जारी की जिसमें बताया गया है कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोवैक्सीन नहीं लेनी चाहिए। इसके अलावा जिन्हें कोई एलर्जी हो, बुखार हो, खून बहने से संबंधित कोई बीमारी हो, जिनकी इम्युनिटी कमजोर हो और इनके अलावा और कोई स्वास्थ्य संबंधी गंभीर शिकायत हो, उन्हें कोवैक्सीन नहीं दी जानी चाहिए।
 
कंपनी के इस बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह जानकारी टीकाकरण शुरू करने से पहले सरकार के पास थी और क्या कोवैक्सीन देने के लिए अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को चुनते समय इन बिंदुओं का ख्याल रखा गया था? सरकार ने अभी इस विषय में कुछ नहीं कहा है। सरकार ने बस इतना कहा है कि इनमें से सिर्फ 580 लोगों में कुछ दुष्प्रभाव देखे गए, लेकिन कोई भी मामला गंभीर नहीं है।
 
7 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। टीका लगने के बाद 2 लोगों की मौत भी हो गई, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उनकी मौत का टीके से कोई संबंध नहीं है। लेकिन टीकाकरण अभियान की रफ्तार अब धीमी पड़ रही है। देश के कई हिस्सों में कर्मचारी उतनी संख्या में टीकाकरण केंद्रों में नहीं आ रहे हैं जितनी अधिकारियों को उम्मीद थी।
 
मीडिया में आईं कुछ खबरों के अनुसार दिल्ली के 81 केंद्रों पर सोमवार को तय लाभार्थियों में से सिर्फ 44 प्रतिशत लोग आए। लोकनायक अस्पताल में कार्यक्रम में 3 घंटों की देर हुई, क्योंकि वहां सिर्फ 2 लाभार्थी ही टीका लेने आए। एम्स दिल्ली के रेजीडेंट डॉक्टर्स संगठन के पूर्व अध्यक्ष हरजीत सिंह भट्टी ने दावा किया है कि एम्स में भी सिर्फ 8 लाभार्थी कोवैक्सीन लेने आए जबकि तय था 100 लोगों का आना। मांग उठ रही है कि सरकार जल्द इन आशंकाओं को संबोधित करे और इस बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से दे।

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