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सौर ऊर्जा संवार सकती है बांग्लादेशी महिलाओं की जिंदगी

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सोमवार, 28 नवंबर 2022 (17:28 IST)
-केके/एनआर (रॉयटर्स)
 
बांग्लादेश में कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर जोर दिया जा रहा है लेकिन इससे होने वाले फायदों, नौकरियों से महिलाएं अछूती हैं। अगर इसके विस्तार में महिलाओं की भागीदारी बढ़े तो बड़ा बदलाव आ सकता है। बांग्लादेश की शेफाली खातून जब पति से अलग हुईं तो उनकी सबसे बड़ी चिंता थी कि वह अपने छोटे बेटे को कैसे संभालेंगी और बिना नौकरी के अपने घर के खर्चें कैसे चलाएंगी?
 
फिर उन्होंने बांग्लादेश में ग्रीन एनर्जी पर काम के बारे में सुना। इसमें महिलाओं को सौर ऊर्जा तंत्र बनाना और ठीक करना सिखाया जाता है। इंजीनियरिंग, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अनुभव न होने के बावजूद वह उससे जुड़ गईं। 5 साल बाद खातून अब सौर उपकरण बनाने का काम करती हैं और महीने में करीब 10,000 टका कमाती हैं, जो उनके परिवार की जरूरतें पूरा करने और बेटे को स्कूल भेजने के लिए पर्याप्त है।
 
मैमनसिंह के अपने घर पर उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इस काम ने मेरी किस्मत बदल दी और मुझे आत्मनिर्भर बनने में मदद की। मैंने जाना कि महिलाएं भी आत्मनिर्भर और सक्षम हो सकती हैं और अपने परिवार की मदद कर सकती हैं।
 
महिलाओं के लिए खुलते रोजगार के मौके
 
बांग्लादेश में क्लीन एनर्जी उद्योग फल-फूल रहा है। सरकार का कहना है कि अक्षय ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने और पहले से ही कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के बावजूद इस पर रोक लगाने के लिए यह अहम है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इससे हजारों नए रोजगार और ज्यादा महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने के मौके तैयार हो रहे हैं।
 
पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ढाका विश्वविद्यालय के एनर्जी इंस्टीट्यूट में मास्टर्स प्रोग्राम में नामांकन लेने वाली महिला छात्रों की हिस्सेदारी 2019 से 2021 के बीच 17% से बढ़कर 27% हो गई है।
 
जलवायु कार्यकर्ताओं और जेंडर विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में क्लीन एनर्जी को लेकर बदलाव में अब भी महिलाएं पीछे हैं। कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर ध्यान देने से उसका जो फायदा महिलाओं को हो सकता है, उस पर सरकार और कंपनियां पर्याप्त काम नहीं कर रही हैं। जबकि महिलाएं जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
 
ब्राइट ग्रीन एनर्जी फाउंडेशन एक गैरसरकारी संस्था है जिसने खातून को प्रशिक्षित किया। इस संस्था ने 5,000 से ज्यादा महिलाओं की मदद की है। इसके अध्यक्ष दीपल बरुआ कहते हैं, अगर 2041 तक बांग्लादेश खुद से 40% बिजली पैदा करने के लक्ष्य तक पहुंचाना चाहता है तो इसके लिए और ज्यादा महिलाओं की जरूरत है। ऐसा इसलिए ताकि ज्यादातर क्लीन एनर्जी की आपूर्ति करने वाले सिस्टम स्थापित करने और बनाए रखने वाले कार्यबल का निर्माण हो। वे आगे कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का विस्तार महिलाओं को शामिल किए बिना अकल्पनीय है।
 
कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रयासों ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनियाभर में करीब 12.7 मिलियन नौकरियां दी हैं। अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2050 तक ये संख्या करीब चौगुनी हो सकती है।
 
अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे बड़े नियोक्ता सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) सेक्टर में विश्वस्तर पर 40% महिलाओं की भागीदारी है। उनमें से ज्यादातर प्रशासनिक नौकरियों में हैं। जब बात आती है पीवी सेक्टर में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) से संबंधित पदों की तो वहां एक तिहाई से भी कम महिलाएं हैं।
 
इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वे बांग्लादेश में कंपनियों में यही पैटर्न देखते हैं। बांग्लादेश में परियोजना विकास के प्रमुख इमरान चौधरी बताते हैं, जब चीन की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी सनग्रो ने ढाका के पास मानिकगंज में पिछले साल सौर बिजली संयंत्र बनाया तो 200 कर्मचारियों वाले कार्यबल में एक दहाईं हिस्सेदारी ही महिलाओं को मिली। फील्ड लेवल की नौकरियां, जैसे संचालन और रखरखाव, ज्यादा व्यावहारिक अनुभव और प्रमोशन के ज्यादा मौके देते हैं। लेकिन ये मौके कम उपलब्ध हैं और इसके लिए स्किल की जरूरत होती है, जो ज्यादातर महिला आवेदकों में नहीं होती।
 
यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे कंसल्टिंग फर्म देवताले पार्टनर्स के चीफ इम्पैक्ट ऑफिसर आरिफ रेहान माही निपटने की कोशिश कर रहे हैं। यह फर्म ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आने वाली इच्छुक महिला इंजीनियरों को प्रशिक्षित करता है और उन्हें तकनीकी और नेतृत्व वाली भूमिका निभाने के लिए बढ़ावा देता है।
 
माही कहते हैं कि कई महिलाओं के लिए पारिवारिक जिम्मेदारियों और सीमित औपचारिक शिक्षा का अक्सर ये मतलब होता है कि उनके पास इन भूमिकाओं के लिए अनुभव या समय नहीं है।
 
महिलाओं के लिए सीमित अवसर
 
सौर ऊर्जा बांग्लादेश के ग्रीन एनर्जी सेक्टर का सिर्फ एक उदाहरण है, जहां महिलाएं सीमित नौकरी के अवसरों के साथ संघर्ष कर रही हैं। जत्री रानी बर्मन एक ऐसी नौकरी की तलाश में थी, जो उन्हें एक स्थिर आय दे और उनके पारिवारिक जीवन के अनुकूल हो। वे इलेक्ट्रिक तिपहिया 'ईजी बाइक' चलाना जानती थीं जिससे उन्हें मदद मिली। ये काम के लचीले घंटे और अच्छे भुगतान वाला काम था। इसे दिनभर करने के लिए शारीरिक ताकत की जरूरत नहीं थी।
 
हालांकि 32 साल की बर्मन को दोस्तों के विरोध का सामना करना पड़ा। परिवार ने भी उनसे कहा कि यह औरतों का काम नहीं है। फिर भी उन्होंने ये काम करने का फैसला लिया। अब वह पश्चिम-उत्तर इलाके में ईजी बाइक चलाने वालीं एकमात्र महिला हैं।
 
जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में जलवायु और जेंडर विशेषज्ञ शर्मिंद नीलोर्मी कहती हैं, समस्या सबसे ऊपर से शुरू होती है। ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने पर बढ़ावा देने के लिए ज्यादा महिलाओं को शामिल करने का महत्व सरकार अभी तक नहीं समझ पाई है।
 
जलवायु विशेषज्ञ लंबे समय से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में बताते आ रहे हैं। यह महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित करता है, जो सामाजिक और आर्थिक स्थिति की वजह से मौसम की मार पड़ने पर ज्यादा नुकसान उठाती हैं।
 
महिलाओं की आजीविका ज्यादा असुरक्षित
 
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर और संयुक्त राष्ट्र महिला की अगस्त में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में कृषि के क्षेत्र में करीब 60% महिलाएं काम कर रही हैं और बाढ़, सूखा और तूफान में उनकी आजीविका ज्यादा असुरक्षित है। इस रिपोर्ट की प्रमुख लेखक नीलोर्मी कहती हैं कि बांग्लादेश की नई जलवायु कार्ययोजना इसे स्वीकार करती है कि फसल बीमा में सब्सिडी देने या खेतों को बाढ़ से बचाने के लिए बैरियर निर्माण जैसे अनुकूलन उपायों को सफल बनाने के लिए महिलाओं की जरूरतों को संबोधित करना महत्वपूर्ण है।
 
हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार ये देखने की पर्याप्त कोशिशें नहीं कर रही है कि क्लीन एनर्जी का विस्तार करके ताप उत्सर्जन को कम करने से महिलाओं को आजीविका मुहैया कराई जा सकती है। ऊर्जा को अक्सर तकनीकी मुद्दे के रूप में देखा जाता है, लेकिन सामाजिक और लैंगिक पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
 
जलवायु और जेंडर पर काम कर रहीं स्वतंत्र शोधकर्ता फराह अंजुम कहती हैं क्लीन एनर्जी कंपनियों और कार्बन-कटिंग परियोजनाओं का पहला कदम न सिर्फ ज्यादा महिलाओं की भर्ती करना हो, बल्कि यह भी सुनिश्चित हो कि उनके पास समान वेतन, लचीले काम के घंटे और उत्पीड़न या भेदभाव से निपटने के लिए तंत्र हो। वे कहती हैं कि अगर हम महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, सक्षम जगह मुहैया कराते हैं, तो वे क्लीन एनर्जी के क्षेत्र से निकलीं नौकरियों और अवसरों का फायदा उठा सकती हैं।
 
Edited by: Ravindra Gupta

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