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चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब तक होगा समाप्त, इसके बाद करें ये 3 कार्य

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lunar eclipse 2026 Sutak kal period 2026: The picture shows the moon, a puja plate, and a woman offering water to Tulsi.
sutak 3 march 2026: संपूर्ण भारत में खग्रास अर्थात पूर्ण चंद्र ग्रहण नजर आएगा। 03 मार्च 2026 दोपहर 03 बजकर 21 मिनट पर चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा जो शाम को 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसका सूतक काल सुबह 06 बजकर 36 मिनट पर प्रारंभ होकर शाम को 06 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा। सूतक काल की समाप्ति के बाद कौनसे 3 महत्वपूर्ण कार्य करना चाहिए जानिए।
 

ग्रहण की मुख्य बातें:

  • ग्रहण दिनांक: 03 मार्च, मंगलवार
  • ग्रहण शुरू: (Penumbral Phase)- दोपहर 02:14 बजे तक।
  • आंशिक ग्रहण शुरू: (Partial Begins)- दोपहर 03:21 बजे तक।
  • पूर्ण ग्रहण शुरू: (Totality Begins)- शाम 04:34 बजे तक।
  • अधिकतम ग्रहण: (Maximum Eclipse)- शाम 05:03 बजे तक।
  • पूर्ण ग्रहण समाप्त: (Totality Ends)- शाम 06:46 बजे तक।
  • सूतककाल: (Sutak kaal)- सुबह 06:36 से शाम 06:46 बजे तक।
  • सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पूर्व लग जाता है।
 

1. शुद्धिकरण एवं स्वच्छता (Purification)

ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए घर और स्वयं की शुद्धि सबसे पहला कदम है:
घर की सफाई: पूरे घर की साफ-सफाई करें और वातावरण को पवित्र करने के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।
स्नान: ग्रहण समाप्ति के बाद गंगा स्नान या पानी में औषधि मिलाकर स्नान करना चाहिए।
देव-शुद्धि: घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियों को भी जल से स्नान कराकर उन्हें शुद्ध करना चाहिए।
 

2. खान-पान के नियम (Food & Water)

ग्रहण के दौरान और बाद में भोजन की शुद्धता बनाए रखना अनिवार्य माना गया है:
सामग्री का संरक्षण: ग्रहण लगने से पहले ही दूध, दही, घी, अचार, चटनी और मुरब्बा जैसी चीजों में कुशा या तुलसी दल डाल देना चाहिए ताकि वे दूषित न हों।
ताजा भोजन: ग्रहण के बाद पुराना भोजन न करें, बल्कि शुद्ध और ताजा भोजन बनाकर ही ग्रहण करें।
जल का सेवन: ग्रहण के पश्चात पानी में तुलसी दल डालकर ही उसे पीना चाहिए।
 

3. दान और पुण्य (Charity & Alms)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद दान करने से कई गुना अधिक फल मिलता है:
जीव-जंतुओं की सेवा: स्नान के बाद गाय को घास खिलाना और पक्षियों को अन्न डालना शुभ होता है।
जरूरतमंदों की सहायता: गरीब या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र और अन्न का दान करना चाहिए।
विशेष दान (छाया दान): कांसे की कटोरी में घी भरकर और तांबे का सिक्का डालकर उसमें अपना मुंह देखकर दान करने से विशेष लाभ मिलता है।
 

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