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शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को CM डॉ. मोहन यादव का तोहफा, चौथे कार्यमान वेतनमान की दी सौगात, डेढ़ लाख शिक्षकों को मिलेगा फायदा

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CM Dr. Mohan Yadav's gift to teachers on Teachers' Day
भोपाल। शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षकों को बड़ा तोहफा दिया है। आज भोपाल में शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात देते हुए कहा कि सरकार शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च शिक्षक, नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षकों को चतुर्थ कार्यमान वेतनमान दिया जाएगा। इससे प्रदेश के 1 लाख 50 हजार शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और 2025-26 से शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात मिलेगी। इससे सरकार पर 117 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा।

इस अवसर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक सम्मान समारोह में सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के खातों में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 330 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं। हमारे सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है। यह परिणाम 15 साल में सबसे अच्छा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सरकारी शिक्षक देश में  मौजूद हर बोर्ड को सीधी टक्कर दे रहे है यहीं कारण है कि हमारे सरकारी स्कूलों के  बच्चे कठिन परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे है।   

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। दुश्मन से रक्षा के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने आधुनिक सुदर्शन चक्र विकसित कर सेना को सौंपा है। भारत ने दुनिया को हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम, जियो और जीने का संदेश दिया है। भारत ने विश्वगुरु रहते हुए शिक्षा के माध्यम से संस्कार दिए हैं। एआई के युग में आप मशीनें तो अच्छी से अच्छी बना सकते हैं, लेकिन संस्कार केवल गुरु ही दे सकते हैं।

बच्चों को बड़ी भूमिका के लिए करें तैयार-कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में पारिवारिक माहौल भी बदल रहा है। ऐसे में बच्चों को अनुशासित रखना आवश्यक है। शिक्षक स्कूल में और अभिभावक घर में अनुशासन का ध्यान रखें। इससे बच्चों के मन में बड़ों के प्रति आदर का भाव आएगा। समाज में शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए। पिछले दिनों राजधानी में शिक्षकों की एक गोष्ठी हुई। इसमें बच्चों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने जैसे गंभीर विषय पर विचार-विमर्श हुआ। पति-पत्नी बच्चों के सामने झगड़ा न करें। हमारे शिक्षक और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को ऐसा माहौल दें, जिससे वे भावनात्मक रूप से मजबूत हों। जीवन में छोटी-मोटी कठिनाइयां आने पर हार न मानें और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

 

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