अफसर कर रहे विधायकों का विशेषाधिकार हनन, गोपाल भार्गव ने की कार्रवाई की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर अफसरशाही को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंत्रियों के दिए उत्तर को लेकर जमकर सियासत हुई थी।
 
मंदसौर गोलीकांड, नर्मदा किनारे पेड़ लगाने और सिंहस्थ को लेकर विधायकों के लगाए गए सवाल के जवाब के बाद कमलनाथ सरकार के मंत्री खुद अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए थे। मंत्रियों के जवाब से सदन में सरकार की खूब किरकिरी भी हुई, जिसके बाद आनन-फानन में मंत्रियों को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा था।
वहीं अब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के विधानसभा अध्यक्ष को लिखे गए एक पत्र ने फिर इस मुद्दे को हवा दे दी है। विधानसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में गोपाल भार्गव ने कई विभागों के सचिव और प्रमुख सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अफसर बिना विभागीय मंत्रियों के अनुमोदन के विधानसभा में सीधे उत्तर भेज रहे हैं, जबकि संबंधित विभाग के मंत्रियों के नाम से प्रश्न उत्तर पुस्तिका में इसका उल्लेख किया गया है।
 
गोपाल भार्गव ने इस पूरी स्थिति को अत्यंत आपत्तिजनक और असंवैधानिक बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले में विशेषाधिकार हनन समिति को सौंपने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का कहना है कि विधायकों के पूछे गए प्रश्न का उत्तर केवल संबंधित मंत्री ही दे सकते हैं।

ऐसे में ये पूरा मामला सीधे तौर पर विधायकों के विशेषाधिकार से जुड़ा है, इसलिए इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। अपने पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं होती तो विधायकों के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए कोर्ट में जनहित याचिका लगाएंगे।

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