Publish Date: Sun, 05 Nov 2017 (07:35 IST)
Updated Date: Sun, 05 Nov 2017 (12:43 IST)
इंदौर। कैथोलिक ईसाई समुदाय की सिस्टर रानी मारिया को उनकी हत्या के 22 साल बाद जब रविवार को यहां 'धन्य' घोषित किया गया, तब हजारों लोगों की भीड़ में उनका हत्यारा समंदर सिंह चेहरे पर पछतावे के भाव के साथ वहां मौजूद था।
यहां आयोजित एक बड़े समारोह में पोप फ्रांसिस के प्रतिनिधि कार्डिनल एंजेलो अमातो ने कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु के भेजे पत्र को पढ़ा और सिस्टर रानी मारिया को औपचारिक रूप से 'धन्य' घोषित किया। समारोह के दौरान समंदर सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि मुझमें शैतानी बुद्धि आ गई थी जिसके कारण मैंने वह काम (नन की हत्या) किया। अब मैं इस संबंध में कुछ भी कहना नहीं चाहता।
अदालत ने समंदर सिंह को सिस्टर रानी मारिया की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन नन के परिजनों ने उसे माफ कर दिया था। सिस्टर मारिया की बहन सिस्टर सेल्मी ने जेल में बंद समंदर सिंह को राखी भी बांधी थी और तब से हर साल वे उसे राखी बांधती आ रही हैं।
वर्ष 2006 में जेल से छूटे समंदर सिंह ने कहा कि मेरा जीवन बदल गया है। अब संसार के सब लोग मेरे परिवार का हिस्सा हैं। सिस्टर सेल्मी और उनके परिजन भी मेरे परिवार में शामिल हैं। उनके स्नेह और प्रेम ने मेरे जीवन को बदल दिया है। मध्यप्रदेश के देवास जिले के उदयनगर में समंदर सिंह ने 25 फरवरी 1995 को सिस्टर रानी मारिया की चाकू से कई वार कर हत्या कर दी थी।
सिस्टर रानी मारिया उदयनगर में आदिवासियों, गरीबों और भूमिहीन कृषि मजदूरों के हितों के लिए काम कर रही थीं। गरीबों को सूदखोरों के चंगुल से छुड़ाने के लिए सिस्टर रानी मारिया के सेवा कार्यों से कुछ धनी और ताकतवर लोग नाराज थे। माना जाता है कि इसी नाराजगी के चलते भाड़े के हमलावर के जरिए उनकी साजिशन हत्या करा दी गई। (भाषा)
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Publish Date: Sun, 05 Nov 2017 (07:35 IST)
Updated Date: Sun, 05 Nov 2017 (12:43 IST)