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महाभारत काल में थे ये 8 पुत्र सबसे ज्यादा चर्चित

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Mahabharata war
महाभारत काल में यहा युद्ध में कौरव, पांडव या अन्य के कुछ पुत्र बहुत चर्चा में रहे हैं। आज भी उन पुत्रों की चर्चा होती है। आओ जानते हैं उन्हीं में से 8 पुत्रों का परिचय।
 
 
1. घटोत्कच : भीम पुत्र घटोत्कच की चर्चा उनके विशालकाय शरीर को लेकर और युद्ध में कोहराम मचाने को लेकर होती है। भीम की असुर पत्नी हिडिम्बा से घटोत्कच का जन्म हुआ था। महाभारत के युद्ध में वह कर्ण के द्वारा मारा गया था।
 
 
2.बर्बरीक : भीम पुत्र घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक दानवीर था। बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। अर्जुन और कर्ण से भी बड़े धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। यह बात जानकर श्रीकृष्ण से उससे दान में उसका शीश मांग लिया। बाद में श्रीकृष्‍ण ने कहा कि कलयुग में तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे। वर्तमान में उन्हें खाटू श्याम कहते हैं।
 
 
3. अभिमन्यु : अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की चर्चा आज भी की जाती है। अभिमन्यु को चक्रव्यूह भेदना याद था लेकिन उससे बाहर निकलना नहीं याद था। दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध करने के बाद अभिमन्यु चक्रव्यूह घुस गया और वहां दुर्योधन, जयद्रथ आदि 7 महारथियों ने उसे घेर निर्ममता पूर्वक मार दिया। अभिमन्यु का पुत्र परीक्षित था और परीक्षित का पुत्र जनमेजय था।
 
 
4. साम्ब : भगवान श्रीकृष्ण और जाम्बवती का पुत्र साम्ब था। साम्ब के कारण ही यादव कुल का नाश हो गया था। इसी के कारण महाभारत के अंत में मौसुल का युद्ध हुआ था। साम्ब ने दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से प्रेम विवाह किया था। तब भी दुर्योधन का बलराम के साथ युद्ध हुआ था। दरअसल, साम्बा ने दुर्वासा ऋषि सहित कई ऋषियों का मजाक उड़ाया था जिसके चलते ऋषियों ने यदुकुल के आपस में लड़कर नाश हो जाने का श्राप दे दिया था।
 
 
5. प्रद्युम्न : श्रीकृष्‍ण का पुत्र प्रद्युम्न अति सुंदर था। प्रद्युम्न को कामदेव का अवतार माना जाता था। दरअसल, कामदेव के भस्म होने के बाद रति के अनुरोध पर शिवजी ने उन्हें श्रीकृष्ण की पत्नि रुक्मिणी के गर्भ से जन्म लेने का वरदान दिया और कहा कि तेरे पति तुझे संभासुर के यहां मिलेगा। इसीलिए रति संभासुर के यहां मायावती नाम से दासी बनकर रहने लगी। जब संभासुर को यह पता चला कि मेरी मृत्यु का कारण श्रीकृष्ण का पुत्र होगा तो वह प्रद्युम्न का हरण करके ले गया। वहां मायावती ने उसके पालण पोषण किया। जब वह बड़ा हुआ तो मायावती उसे बड़े भाव और कामुक दृष्टि से देखती थी। फिर प्रद्युम्न ने संभासुर का वध कर दिया। मायावती प्रद्युम्न को लेकर द्वारिकापुरी पहुंची।
 
 
6. अनिरुद्ध : प्रद्युम्न का पुत्र अनिरुद्ध था। अनिरुद्ध की पत्नी उषा शोणितपुर के राजा वाणासुर की कन्या थी। अनिरुद्ध और उषा आपस में प्रेम करते थे। उषा ने अनिरुद्ध का हरण कर लिया था। वाणासुर को अनिरुद्ध-उषा का प्रेम पसंद नहीं था। उसने अनिरुद्ध को बंधक बना लिया था। वाणासुर को शिव का वरदान प्राप्त था। भगवान शिव को इसके कारण श्रीकृष्ण से युद्ध करना पड़ा था। अंत में देवताओं के समझाने के बाद यह युद्ध रुका था।
 
 
7. धृष्टद्युम्न : राजा द्रुपद और द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न। द्रोणाचार्य से बदला लेने के लिए राजा द्रपुद ने एक यज्ञ का आयोजन किया। उनके यज्ञ से अग्निदेव प्रकट हुए जिन्होंने एक शक्तिशाली पुत्र दिया जो संपूर्ण आयुध और कवच युक्त था। फिर उन्होंने एक पुत्री दी जो श्यामला रंग की थी। उसके उत्पन्न होते ही एक आकाशवाणी हुई कि इस बालिका का जन्म क्षत्रियों के संहार और कौरवों के विनाश के हेतु हुआ है। बालक का नाम धृष्टद्युम्न एवं बालिका का नाम कृष्णा रखा गया। यही कृष्णा द्रुपद पुत्री होने के कारण द्रौपदी कहलाई।
 
 
महाभारत के युद्ध के 11वें दिन द्रोण अपने पुत्र अश्‍वत्थामा का वध होने जाने का झूठा समाचार सुनकर अस्त्र-शस्त्र त्याग देते हैं। द्रोणाचार्य को निहत्था देखकर श्रीकृष्ण के इशारे पर द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न ने तलवार से उनका सिर काट डाला।
 
 
8. अश्‍वत्थामा : गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र और कृपाचार्य के भानजे अश्‍वत्थामा रुद्र के अंशावतार थे। अपने पिता के छल से वध किए जाने के बाद युद्ध के अंतिम दिन अश्वत्थामा पांडवों के वध की प्रतिज्ञा लेता है। सेनापति अश्‍वत्थामा और कृपाचार्य कृतवर्मा के साथ मिलकर रात्रि में पांडव शिविर पर हमला कर देते हैं। अश्‍वत्थामा शिविर में सो रहे सभी पांचालों, द्रौपदी के पांचों पुत्रों, धृष्टद्युम्न तथा शिखंडी आदि का वध कर देता है। वह घोर पाप करता है।
 
 
यह जानकर अर्जुन अश्वत्थामा का वध करने के लिए उसके पीछे दौड़ते हैं लेकिन एक मौके पर अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर देते हैं। वेद व्यास उसे ब्रह्मास्त्र वापस लेने का कहते हैं लेकिन वह उसको वापस लेने नहीं जानता था अत: वह उत्तरा के गर्भ में पल रहे पुत्र (परीक्षित) को मारने का प्रयास करता है जिसके चलते श्री कृष्ण उसे 3 हजार वर्षों तक कोढ़ी के रूप में जीवित रहने का शाप दे देते हैं।

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