महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध, जानिए दोनों के बीच क्या है खास 13 बातें

भारत में अधिकतर हिन्दू महावीर स्वामी की मूर्ति देखते हैं तो वे उसे बुद्ध की मूर्ति मान बैठते हैं। हिन्दुओं को तो ज्यादा शिक्षा की जरूरी है क्योंकि वे खुद के ही धर्म और समाज को ही अच्छी तरह नहीं जानते हैं। तभी उनकी बुद्धि में ज्यादा विरोधाभास और भ्रम रहता है। इसके कई कारण है जिसमें राजनीतिक कारण ज्यादा है। खैर.. आप जानिए भगवान महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध के संबंध में 10 रोच बातें।
 
 
1.गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पू और भगवान महावीर का जन्म 599 ई.पू. हुआ था। मतलब यह कि भगवान महावीर का जन्म बुद्ध के जन्म के पूर्व हुए था और वे दोनों ही एक ही काल में विद्यमान थे। भगवान महावीर ने चैत्र शुक्ल की तेरस को जन्म लिया जबकि गौतम बुद्ध ने वैशाख पूर्णिमा के दिन जन्म लिया था।
 
2.भगवान महावीर स्वामी का जन्म स्थान क्षत्रिय कुण्ड ग्राम (कुंडलपुर-वैशाली) बिहार है जबकि गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी वन में रुक्मिनदेई नामक स्थान पर हुआ था।
 
3.गौतम बुद्ध ने वैशाख पूर्णिमा के दिन वटवृक्ष के नीचे संबोधि (निर्वाण) प्राप्त की थी। आज उसे बोधीवृक्ष कहते हैं जो कि बिहार के गया में स्थित है। महावीर स्वामी ने वैशाख शुक्ल 10 को बिहार में जृम्भिका गांव के पास ऋजुकूला नदी-तट पर स्थित साल वृक्ष ने नीचे कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था।
 
4.महावीर स्वामी को लगभग 72 वर्ष से अधिक आयु में कार्तिक कृष्ण अमावस्या-30 को 527 ई.पू. पावापुरी उद्यान (बिहार) में महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था। अर्थात उन्होंने देह छोड़ दी थी। जबकि वैशाख पूर्णिमा के दिन स्वयं की पूर्व घोषणा के अनुसार गौतम बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में जुड़वां शाल वृक्षों की छाया तले 80 वर्ष की उम्र में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया।
 
5.गौतब बुद्ध का जन्म नाम सिद्धार्थ था जबकि उनके पिता का नाम शुद्धोधन और माता का नाम महामाया देवी था। इधर भगवान महावीर स्वामी का जन्म नाम वर्द्धमान था जबकि उनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था।
 
6.गौतम बुद्ध शाक्य क्षत्रिय वंशी थे जबकि महावीर स्वामी ज्ञातृ क्षत्रिय वंशीय नाथ थे। मतलब यह कि दोनों ही छत्रियवंश से संबंध रखते थे।
 
7.दोनों ही का जन्म राज परिवार में हुआ था। दोनों ने ही सत्य को जानने के लिए गृह का त्याग कर दिया था। दोनों ही इस दौरान तपस्या करते और प्रकृति की गोद में, जंगल में वृक्ष की छाया में ही अपना जीवन बिताते थे।
  
 
8.बुद्ध दर्शन के मुख्‍य तत्व ये हैं- चार आर्य सत्य, आष्टांगिक मार्ग, प्रतीत्यसमुत्पाद, अव्याकृत प्रश्नों पर बुद्ध का मौन, बुद्ध कथाएं, अनात्मवाद और निर्वाण। जबकि महावीर स्वामी का दर्शन पंच महाव्रत, अनेकांतवाद, स्यादवाद और त्रिरत्न में सिमटा हुआ है। इसमें समानता यह है कि दोनों ही धर्म में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र, तप और ध्यान, अनिश्‍वरवाद आदि विद्यमान हैं। दोनों की ही विचारधारा अहिंसा पर आधारित थी और दोनों ने ही अहिंसा पर ज्यादा बल दिया।
 
9.बुद्ध ने अपने उपदेश पाली भाषा में दिए, जो त्रिपिटकों में संकलित हैं। महावीर स्वामी ने अपने उपदेश खासकर प्राकृत भाषा में दिए हैं जबकि वे अर्धमगधी और पाली का उपयोग भी करते थे।
 
10.उल्लेखनीय है कि दोनों के ही जीवन में सिद्धार्थ, साल वृक्ष, क्षत्रिय, तप, अहिंसा और बिहार की समानता रही। दोनों की ही कर्मभूमि बिहार ही रही है। 
 
11. महावीर और बुद्ध के कई राजा महाराजा शिष्य थे। गौतम बुद्ध के शिष्यों ने ही बौद्ध धर्म को आगे बढ़ाया। इनमें से प्रमुख थे- आनंद, अनिरुद्ध (अनुरुद्धा), महाकश्यप, रानी खेमा (महिला), महाप्रजापति (महिला), भद्रिका, भृगु, किम्बाल, देवदत्त, और उपाली (नाई) आदि। जबकि महावीर के प्रमुख तीन शिष्य गौतम, सुधर्म और जम्बू ने महावीर के निर्वाण के पश्चात जैन संघ का नायकत्व संभाला।
 
12.दुनियाभार में भगवान महावीर और गौतम बुद्ध की ही मूर्तियां अधिक पाई जाती हैं। बुद्ध और महावीर के काल में उनकी बहुत तरह की मूर्तियां बनाकर स्तूप या मंदिर में स्थापित की जाती थी। दोनों की ही मूर्तियां को तप या ध्यान करते हुए दर्शाया गया हैं। महावीर स्वामी की अधिकतर मूर्तियां निर्वस्त्र है जबकि गौतम बुद्ध की मूर्तियां वस्त्र पहने हुए होती हैं।
 
13.महावीर स्वामी जैन तीर्थंकरों की कड़ी के अंतिम तीर्थंकर थे। जबकि हिन्दू गौतम बुद्ध को विष्णु का नौवां अवतार मानते हैं। जबकि पालि ग्रंथों में 27 बुद्धावतारों जिक्र मिलता है जिसमें गौतम बुद्ध 24वें अवतार माने जाते हैं। कुछ लोग उन्हें शिव का अवतार मानते हैं।
 

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी

विज्ञापन
जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

अगला लेख क्यों किया जाता है प्रदोष का व्रत? पढ़ें प्राचीन कथा