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सर पांव जल रहे हैं, रोड़ क्रॉस करवा दो : ट्रैफिक पुलिस रंजीत सिंह की इस पोस्ट से भावुक हो जाएंगे आप

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ईशु शर्मा 
 
'इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल' ये गाना आप सभी को याद होगा जिसे मशहूर सिंगर मुकेश ने गाया था। ये गाना आज के समय में इंदौर के मशहूर ट्रैफिक पुलिस रंजीत सिंह पर बहुत फिट होता है। रंजीत सिंह यादव जो न सिर्फ इंदौर के डांसिंग ट्रैफिक पुलिस के नाम से जाने जाते हैं बल्कि अपने नेक कामों के लिए भी ये काफी प्रसिद्ध हैं। रंजीत सिंह ने अपने कई कामों के ज़रिए इंदौर में मानवता की छाप छोड़ी है। हाल ही में रंजीत सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक बहुत भावुक करने वाली पोस्ट शेयर की है।
 
दो गरीब बच्चे चुभती-जलती गर्मी में सिग्नल बंद होते समय रोड क्रॉस कर रहे थे। जब रंजीत ने जब उन्हें रोका तो गर्मी के कारण बच्चे के पांव जलने लगे तो उसने रणजीत सिंह से कहा कि 'सर पांव जल रहे हैं, रोड क्रॉस करवा दो।' ये सुनते ही रंजीत सिंह ने कहा कि 'जब तक ट्रैफिक रुकता नहीं, मेरे पैर पर पैर रख लो।'
 
इसके बाद रंजीत सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर उनकी और बच्चों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि 'जैसे ही उस बच्चे ने मेरे पैरों पर पांव रखा, मुझे ऐसा लगा जैसे भगवान ने मेरे ऊपर पांव रख दिए। मैंने चप्पल खरीद के दे तो दी, पर आज का ये एहसास ज़िंदगीभर याद रहेगा।' आज के समय में इस तरह की मानवता को देखना बहुत मुश्किल है। आज के दौर में हम सभी सिर्फ खुद के बारे में सोचते हैं। इस भयानक गर्मी के मौसम में न जाने कितने नंगे पांव इन अंगारों पर अपनी परीक्षा देते होंगे।
 
हम इस गर्मी के मौसम में सभी प्रकार की सुविधाएं होने के बाद भी शिकायत करते हैं। पर हमारे आस-पास ऐसे कई लोग हैं जिनके पास इस गर्मी से बचने के लिए न तो छत है और न ही पीने के लिए साफ़ पानी। सभी धर्मों से बढ़कर मानव धर्म होता है, जो इस बदलते ज़माने में कहीं खो-सा गया है। पर आज भी रंजीत सिंह जैसे लोगों ने इस मानवता को कहीं-न-कहीं संरक्षित किया हुआ है। रंजीत सिंह आज के समय में हमारे लिए एक बेहतरीन मिसाल हैं।
 
कोई नेक काम करने के लिए आपको बहुत पैसे और समय की ज़रूरत नहीं है। रंजीत सिंह ने भी अपनी ड्यूटी के दौरान उन बच्चों के जलते पैरों की फिक्र की। किसी भी नेक काम को करने के लिए आपके नेक इरादे और ईमानदारी ज़रूरी होती है। इस कलयुगी समय को हमने ही कलयुग बनाया है। आज के समय में हम सिर्फ यहसोचकर भलाई नहीं करते हैं कि 'भलाई का ज़माना नहीं है।'
 
इस भलाई के ज़माने को भी हमने ही लुप्त किया है। मुकेशजी ने ये गाना 1975 में गाया था, पर आज के 21वीं सदी में भी ये गाना भली-भांति फिट बैठता है। इस संसार से जाने के बाद भी हमारे काम और हमारी बातों को ही याद किया जाता है और याद किया जाएगा। दुनिया में पहचान बनाने के लिए आपको कोई सेलिब्रिटी बनने की ज़रूरत नहीं है। आप रंजीत सिंह जैसे आम इंसान बनकर भी लोगों का दिल जीत सकते हैं।
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