चुनावी दंगल में 10 बागियों का दिखेगा दम, भाजपा की बढ़ेगी मुश्किल

विशेष प्रतिनिधि

गुरुवार, 15 नवंबर 2018 (18:47 IST)
भोपाल। चुनावी दंगल में इस बार भाजपा के बगियों ने जिस तरह ताल ठोंकी है उससे भाजपा के प्रत्याशियों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। सूबे में भाजपा के दस प्रत्याशी ऐसे हैं जिन्हें देखकर ये कहा जा सकता है कि अब भाजपा का भी दम फूल रहा है।
 
रामकृष्ण कुसमारिया : दंगल 2018 में भाजपा के सबसे बड़े बागी नेता के रूप में चुनावी मैदान में उतरे पांच बार के सांसद और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया ने भाजपा के साथ ही वित्त मंत्री जयंत मलैया की मुसीबत बढ़ा दी है। दमोह और पथरिया सीट से मैदान में उतरने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया का क्षेत्र के कुर्मी वोटों के साथ ही अन्य वर्ग में अच्छा प्रभाव माना जाता है।
 
पांच बार के सांसद और दो बार विधायक रहे कुर्मी समाज के बड़े नेता कुसमारिया शिवराज कैबिनेट में कृषि मंत्री भी रहे हैं। वर्तमान में कुसमारिया बुंदेलखंड विकास प्रधिकरण के अध्यक्ष भी थे। कुसमारिया को मनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से लेकर प्रभात झा तक सभी ने कोशिश की, लेकिन कुसमारिया नहीं माने।
 
सरताज सिंह : शिवराज कैबिनेट में लंबे समय तक मंत्री रहे भाजपा के दिग्गज नेता सरताजसिंह भी अब बागी होकर कांग्रेस के टिकट पर होशंगाबाद से चुनाव लड़ रहे हैं। सरताज के चुनाव लड़ने से होशंगाबाद से ही चुनाव लड़ रहे विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं सिंह के कांग्रेस में जाने से सिवनी मालवा सहित आसपास की कई सीटों पर सियासी समीकरण बदल गए हैं।

केएल अग्रवाल : शिवराज कैबिनेट में मंत्री रहे केएल अग्रवाल टिकट न मिलने पर गुना की बमौरी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे हैं। अग्रवाल को मुख्यमंत्री शिवराज के करीबी नेताओं में माना जाता था। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री चौहान ने अग्रवाल को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन वो नहीं माने।
 
समीक्षा गुप्ता : भाजपा के बड़े नेता नरेंद्रसिंह तोमर के घर में इस बार भाजपा को बड़ी बगावत को सामना करना पड़ रहा है।  ग्वालियर दक्षिण से इस बार शहर की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता ने ताल ठोंक दी है। शहर की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता ने भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरकर भाजपा की मुश्किल बढ़ा दी है। समीक्षा ग्वालियर दक्षिण से भाजपा से टिकट की मांग कर रही थीं, लेकिन पार्टी ने इस सीट से नारायणसिंह कुशवाह को अपना उम्मीदवार बनाया जिसके बाद समीक्षा बागी हो गई हैं। 
 
धीरज पटेरिया : भाजपा के लिए जबलपुर से सबसे बड़ी बगावत भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया ने की। टिकट न मिलने से धीरज पटेरिया ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया, जिससे पार्टी के बड़े नेता सकते में आ गए। खुद प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के घर में हुई इस बगावत को रोकने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन धीरज पटेरिया नहीं माने।
 
नरेंद्रसिंह कुशवाह : भिंड से भाजपा के मौजूदा विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाह का पार्टी ने टिकट काट दिया। इसके बाद नरेंद्र कुशवाह बागी होकर सपा के टिकट पर मैदान में उतरकर बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं। नरेंद्रसिंह तोमर के समर्थक माने जाने वाले कुशवाह  के चुनाव लड़ने से पार्टी संगठन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 
 
ब्रह्मानंद रत्नाकर : भोपाल के बैरसिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले ब्रह्मानंद रत्नाकर को मनाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन ब्रह्मानंद रत्नाकर नहीं माने और अब वो पार्टी के मौजूदा उम्मीदवार विष्णु खत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। 
 
राजकुमार मेव : महेश्वर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार और पार्टी के बड़े नेता राजकुमार मेव को भी पार्टी नहीं मना सकी।
 
जेपी मंडलोई : शाजपुर सीट से बीजेपी के बागी उम्मीदवार जेपी मंडलोई भी बागी उतरकर पार्टी के लिए मुसीबत बन गए हैं।

मनोज डहेरिया : बैतूल की आमला सीट बागी उम्मीदवार मनोज डहेरिया भी पार्टी के लिए चुनाव में मुश्किल का सबब बन सकते हैं।

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