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दलाई लामा से लेकर नारायण मूर्ति तक दुनिया की इन शीर्ष शख्‍स‍ियतों ने उठाई बच्‍चों के लिए न्‍याय की मांग

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भारत की धरती से अफ्रीकी बच्‍चों के लिए आवाज उठी है। नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्‍यार्थी की पहल पर प्रसिद्ध आध्‍यात्मिक नेता दलाई लामा, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, दिग्गज उद्योगपति नारायण मूर्ति सहित दुनियाभर के 86 नोबेल पुरस्‍कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं ने एकजुट होकर “लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन” के बैनर तले अफ्रीकी बच्‍चों के लिए “प्रत्‍यक्ष सामाजिक सुरक्षा’’ देने का आह्वान किया।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लिमाह जबोई की अध्यक्षता में यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर हुई अफ्रीकी नेताओं के साथ बैठक के बाद एक बयान जारी कर यह मांग की गई।

उल्लेखनीय है कि अफ्रीकी बच्चे कोविड-19 महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और चार सालों में दुनिया में बाल श्रमिकों की संख्या में 16 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

जिनमें आधे से अधिक (यानी 8 करोड़ 86 लाख) बाल श्रमिक उप-सहारा अफ्रीका में कार्यरत हैं। यह अफ्रीका के खिलाफ नस्लीय और व्‍यवस्‍थागत भेदभाव का परिणाम है।

इस अवसर पर लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन के संस्‍थापक नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी ने वैश्विक नेताओं से अपील करते हुए कहा, ‘‘अफ्रीका के बच्चों को हमारी जरूरत है। अफ्रीका में दुनिया के आधे से अधिक बाल श्रमिक हैं।

हम दुनिया के प्रत्येक नेता से अपने बच्चों के अधिकारों, सपनों और भविष्य को पूरा करने के लिए उनके साथ खड़े होने और कार्य करने का आह्वान करते हैं।’’

श्री सत्‍यार्थी ने कहा, “हर बच्चे को स्‍कूल पहुंचाने के लिए पर्याप्त धन है। इसके बावजूद बच्‍चों को जिंदा रहने के लिए काम करना पड़ता है। इस स्थिति में यह सवाल पैदा होता है कि हम उस धन को कैसे और किनके लिए खर्च करना चाहते हैं? मैं दुनिया की सरकारों से आग्रह करता हूं कि वे इस पर ध्यान दें और इस दिशा में उचित कार्रवाई करें। इसके लिए हमें अफ्रीका से शुरुआत करनी चाहिए।’’ 

बैठक की अध्‍यक्षता करते हुए लिमाह जबोई ने कहा,‘‘अफ्रीका को बदला जा सकता है। यह हम पर निर्भर करता है कि अफ्रीका को एक समावेशी और जन-केंद्रित वास्तविकता में फिर से आकार देकर अपने पूर्वजों को गौरवान्वित करें। बच्चे इस महाद्वीप की जान और भविष्य हैं। हम उनका शोषण करके, उनके योगदान को प्राप्‍त नहीं करने की भूल नहीं कर सकते।’’

अफ्रीका के सभी बच्‍चों के लिए प्रत्‍यक्ष सामाजिक सुरक्षा के बयान पर नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, प्रसिद्ध उद्योगपति श्री नारायण मूर्ति, मशहूर आध्‍यात्मिक नेता दलाई लामा, माता अमृतानंदमयी, नोबेल शांति विजेता लिमाह जबोई और डेनिस मुकवेगे सहित 86 नोबेल विजेताओं और वैश्विक नेताओं ने हस्‍ताक्षर किए।

अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और यूनिसेफ ने जून 2021 में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (2016-2019) के पहले चार वर्षों के दौरान दो दशकों में दुनियाभर में बाल श्रमिकों की संख्या में चौंकाने वाली वृद्धि की घोषणा की थी।

उल्‍लेखनीय है कि महामारी की शुरुआत में ही जब दुनिया की आमदनी में 10 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई, वहीं बाल मजदूरों की संख्या बढ़कर 16 करोड़ (160 मिलियन) हो गई। जिनमें आधे से अधिक (यानी 8 करोड़ 86 लाख) बाल श्रमिक उप-सहारा अफ्रीका में कार्यरत हैं। यह अफ्रीका के खिलाफ नस्लीय और व्‍यवस्‍थागत भेदभाव का परिणाम है।

अफ्रीका में लाखों बच्चों का जीवन दांव पर है। कोविड-19 के आगमन के साथ इन असमानताओं ने नए आयाम ग्रहण किए हैं। वे तेजी से बढ़ रहे हैं। कोविड से बचाव के लिए दी जा रही वैक्‍सीन के वितरण में जिस तरह का भेदभाव बरता जा रहा है वह शर्ममाक है। जिसका सामना अफ्रीका के सबसे गरीब और हाशिए के बच्‍चे कर रहे हैं।
स्थिति की भयावहता तब और बढ़ जाती है जब अफ्रीका में सामाजिक सुरक्षा के मद में सबसे कम धन आवंटित किए जाते हैं। शिक्षा, स्‍वास्‍थय, महिलाओं और बच्‍चों को लाभ, बेरोजगारी संरक्षण और पेंशन लाभ तक वहां के लोगों की सबसे कम पहुंच है।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर महामारी से राहत के रूप में जारी किए गए 12 ट्रिलियन डॉलर का केवल 0.13 प्रतिशत ही कम आय वाले देशों को बहुपक्षीय वित्त पोषण के लिए आवंटित किया गया था। बाकी धन का इस्‍तेमाल बड़े कॉरपोरेट घरानों को मंदी से उबारने में किया गया था।

आपातकालीन आईएमएफ विशेष ड्राइंग राइट्स ने प्रति यूरोपीय बच्चे को 2,000 डॉलर और प्रति अफ्रीकी बच्चे को 60 डॉलर दिए। अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय का यह दोहरा रवैया भयानक है जिसे समाप्‍त किया जाना चाहिए।
लेकिन अफ्रीकी बच्‍चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करके हम उनको किसी भी प्रकार के संकट से उबार सकते हैं। सामाजिक सुरक्षा अत्यधिक गरीबी और असमानता को समाप्त करती है और यह लाखों बच्‍चों को बाल श्रम में धकेलने से रोकती है।

इसका उपयोग दशकों से किया जा रहा है और अमीर देशों में यह सरकारी खर्च की सबसे बड़ी मद है। गरीब देशों में सालाना खर्च किया जाने वाला एक छोटा सा अंश कम आय वाले देशों में सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा और अत्यधिक गरीबी को काफी हद तक कम करेगा। सामाजिक सुरक्षा का वैश्वीकरण एक ऐतिहासिक विचार और कदम है, जिसको लागू करने का समय आ गया है।

लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन के बारे में लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन की स्‍थापना नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा 2016 में किया गया।

यह नोबेल पुरस्‍कार विजेताओं और समाज के विभिन्‍न क्षेत्रों में काम करने वाले प्रभावशाली दूरदर्शी नेताओं का एक संगठन है। संगठन अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय में करुणा का वैश्विकरण करके दुनिया के सबसे कमजोर बच्चों के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है।

नोबेल पुरस्‍कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं ने सभी बच्‍चों को स्‍वतंत्र, सुरक्षित और शिक्षित करने के विचारों के प्रचार-प्रसार और उस पर कार्रवाई के उद्देश्‍य से पूरी दुनिया में अपना नेटवर्क विकसित किया है। लॉरियेट्स एंड लीडर्स कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (अमेरिका) की एक अनूठी और महती पहल है।

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