Publish Date: Tue, 11 Sep 2018 (19:33 IST)
Updated Date: Tue, 11 Sep 2018 (23:36 IST)
आधार की सुरक्षा पर चर्चा के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि आधार के सॉफ्टवेयर को हैक कर लिया गया है। इससे आपकी निजता पर खतरा बढ़ गया है।
हफिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि आधार कार्ड का सॉफ्टवेयर हैक किया जा चुका है और भारत के करीब एक अरब लोगों की निजी जानकारी दांव पर लगी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर में एक पैच है जिसकी मदद से एक सॉफ्टवेयर के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी के भी नाम से वास्तविक आधार कार्ड बना सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसने तीन महीने की जांच के बाद इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में दुनियाभर के 5 एक्सपर्ट की मदद ली गई है। अभी भी इस सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।
दरअसल इस सॉफ्टवेयर की मदद से आधार के सिक्योरिटी फीचर को बंद किया जा सकता है और नया आधार तैयार किया जा सकता है। आधार कार्ड हैक करने वाला यह सॉफ्टवेयर 2,500 रुपए में व्हाट्सएप पर बेचा जा रहा है। इसके जरिए किसी भी व्यक्ति के आधार में परिवर्तन किया जा सकता है।
आधार के डेटाबेस में एक अरब से ज्यादा लोगों की निजी जानकारियां और बायॉमीट्रिक्स डीटेल दर्ज हैं। विशेषज्ञों ने पता लगाया है कि पैच के जरिए यूजर महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर्स को दरकिनार कर सकता है, जिससे गैरकानूनी तरीके से वह आधार नंबर जनरेट कर सकता है।
कांग्रेस ने एक ट्वीट में कहा, 'आधार नामांकन सॉफ्टवेयर के हैक हो जाने से आधार डेटाबेस की सुरक्षा खतरे में आ सकती है। हमें उम्मीद है कि अधिकारी भावी नामांकनों को सुरक्षित करने और संदिग्ध नामांकन की पुष्टि के लिए उचित कदम उठाएंगे।'
यूआईडीएआई का दावा, हैक नहीं हुई वेबसाइट : यूआईडीएआई ने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति बायोमेट्रिक ब्योरा नहीं देता है, कोई भी परिचालक आधार नहीं बना सकता या उसे अद्यतन नहीं कर सकता। प्राधिकरण ने रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया कि आधार साफ्टवेयर को कथित रूप से ‘हैक’ किया गया है।