अयोध्या सुनवाई के 16 दिन, हिंदू पक्ष की सुप्रीम कोर्ट में यह खास दलीलें

रविवार, 1 सितम्बर 2019 (10:28 IST)
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद पर रोजाना सुनवाई चल रही है। इसके 16 दिन बीत चुके हैं।  शुक्रवार को हिंदू पक्ष की दलीलों का आखिरी दिन था। हिंदू पक्ष की तरफ से निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान ने पक्ष रखा। अब तक हिंदू पक्ष के विभिन्न वकीलों ने राम जन्मभूमि के पक्ष में क्या-क्या कहा यहां विस्तार से पढ़ें... 
 
1. सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़े ने 2.77 एकड़ जमीन पर दावा जताते हुए कहा कि 1934 से किसी भी मुस्लिम को विवादित ढांचे में प्रवेश नहीं मिला है। अखाड़े के वकील ने कहा कि ढांचे का भीतरी बरामदा और राम जन्मस्थान सैकड़ों बरसों से निर्मोही अखाड़े के पास है। बाहरी बरामदे में स्थित सीता रसोई, चबूतरा, भंडार गृह भी हमारे पास हैं। यह कभी किसी मामले में विवाद का हिस्सा नहीं रहा।
 
2. मुख्य पक्षकारों में से एक रामलला विराजमान की ओर से सुनवाई के दूसरे दिन दलील दी गई कि भक्तों की अटूट आस्था इस बात का प्रमाण है कि विवादित स्थल ही राम का जन्मस्थान है। सदियों बाद इसका सबूत कैसे दे सकते हैं? जब अदालत ने रेवेन्यू रिकॉर्ड की बात कही तो जवाब में निर्मोही अखाड़े की ओर से कहा गया कि 1982 में हई एक डकैती में सारे रिकॉर्ड गायब हो गए।
 
ALSO READ: इतिहास के आईने में अयोध्या, तब से अब तक
3. तीसरे दिन अदालत ने पूछा कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है? इस पर रामलला के वकील ने कहा कि जन्मस्थली भी कानूनी व्यक्ति की तरह है, वह वादी हो सकता है। जब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 16 दिसंबर 1949 को आखिरी बार नमाज पढ़ी गई और क्या इसके बाद वहां मूर्तियां रखी गईं? जवाब में वकील के. परासरण ने कहा कि मुस्लिमों को वहां प्रवेश नहीं था।
 
4. अयोध्या मामले की सुनवाई के चौथे दिन रामलला विराजमान के वकील के. परासरन ने हिंदू धर्म में भगवान के होने की अहमियत  के बारे में बताया। उन्होंने मूर्ति पूजा से लेकर परिक्रमा तक कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। वकील ने कहा कि अयोध्या का राम जन्मस्थान इसी मान्यता के तहत पवित्र और पूज्य है कि सदियों से वहां पूजा होती रही है।
 
ALSO READ: क्या सचमुच अयोध्या हिन्दुओं के लिए मक्का की तरह है?
5. सुप्रीम कोर्ट में 5वें दिन रामलला विराजमान की ओर से दलील दी गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट अपने फैसले में पहले ही कह चुका है कि अयोध्या में पहले मंदिर था। मंदिर के अवशेषों पर ही मस्जिद बनी थी। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अगर जमीन पर आपका हक मुस्लिम पक्षकार के साथ साझा है, तब आपका एकाधिकार कैसे है? इस पर, हिन्दू पक्ष ने कहा कि जमीन कुछ समय के लिए वक्फ बोर्ड के पास जाने से वह मालिक नहीं हो जाता।
 
6. सुनवाई के छठे दिन हिन्दू पक्ष की ओर से ऐतिहासिक किताबों, विदेशी यात्रियों के यात्रा वृत्तांतों, वेद एवं स्कंद पुराण की दलीलें कोर्ट में पेश की गईं। 
 
7. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के 7वें दिन रामलला विराजमान के वकील ने दावा किया कि एएसआई की रिपोर्ट में साफ है कि वहां नीचे विशाल मंदिर का ढांचा था। उसमें कई पिलर और स्तंभ हैं, जो ईसा पूर्व 200 साल पहले के हैं। जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को साबित करने की बात कही। 
 
8. अयोध्या मामले में 8वें दिन रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथ ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें जज ने खुद लिखा है कि भगवान राम का मंदिर गिराकर मस्जिद बनाइ गई। उन्होंने कहा कि एएसआई के निष्कर्षों से भी पता चलता है कि वहां विशाल मंदिर था। वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित स्थल पर मस्जिद या तो मंदिर के अवशेष पर बनी थी या मंदिर को गिराकर बनाई गई थी। 
 
9. रामलला की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने 9वें दिन कहा कि हिन्दुओं ने राम जन्म स्थान पर हमेशा पूजा-अर्चना के अधिकार का दावा किया है। अत: यह प्रतिकूल कब्जे का मामला नहीं हो सकता। इसके अलावा उन्होंने विवादित भूमि पर मुस्लिम पक्ष और निर्मोही अखाड़े के दावे को भी खारिज कर दिया।
 
10. सुनवाई के 10वें दिन पुजारी गोपाल दास की ओर से वकील रंजीत कुमार ने कहा कि मूल पक्षकार होने के नाते उन्हें जन्मस्थान पर पूजा करने का अधिकार है, यह हक उनसे नहीं छीना जा सकता। वकील ने कहा कि 1934 के बाद वहां नमाज नहीं पढ़ी गई, लेकिन  मस्जिद बनने के बाद भी वहां हिंदुओं ने पूजा करना नहीं छोड़ा था। 
 
11. 11वें दिन निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि हम देवस्थान के मैनेजर यानी देखरेख करने वाले दावेदार हैं। अत: हमारा अधिकार है। हमसे जन्मस्थान का पजेशन ले लिया गया, जो कि हमारे अधिकार में दखल है। उन्होंने कहा कि 1934 से वहां मुस्लिम नहीं आते थे और न ही रोजाना नमाज पढ़ते थे। अयोध्या बहुत बड़ा शहर है। जन्मस्थान रामपुर में स्थित है। मंदिर भी रामपुर में ही है।
 
12. निर्मोही अखाड़े के वकील ने 12वें दिन सुनवाई के दौरान कहा कि हम हम देव स्थान का प्रबंधन करते हैं और पूजा का अधिकार  चाहते हैं। अखाड़े के वकील ने कहा कि जन्मस्थान जन्मस्थान के कर्ता-धर्ता को ही दिया जा सकता है और निर्मोही अखाड़ा इसकी  देखरेख करता है। 
 
13. अयोध्या मामले की सुनवाई के 13वें दिन श्रीराम जन्म भूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने स्कंद पुराण और अयोध्या  महात्म्य जैसे शास्त्रों का उल्लेख कर अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं और न ही उसने मस्जिद का निर्माण करवाया। मिश्रा ने यह भी कहा कि तीन गुंबद वाले ढांचे को मस्जिद नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें मस्जिद की विशेषताएं नहीं थीं। 
 
14. सुनवाई के 14वें दिन हिन्दू पक्ष ने दलील दी कि अयोध्या में मंदिर मीर बांकी ने नहीं बल्कि औरंगजेब ने तोड़ा और वहां मस्जिद  बनवाई। वकील ने कहा कि बाबरनामा में कहीं भी उल्लेख नहीं है कि मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी।
 
15. सुनवाई के 15वें दिन एक हिन्दू संस्था की ओर से कोर्ट से मांग की गई कि करीब 500 साल के बाद इस बात की न्यायिक तरीके से छानबीन की जाए कि क्या मुगल शासक बाबर ने अयोध्या में विवादित ढांचे को ‘अल्लाह’ को समर्पित किया था ताकि यह इस्लाम के तहत वैध मस्जिद बन सके। अदालत ने इस मांग को समस्या वाला बताया। पीठ ने कहा कि मुसलमान दावा करते रहे हैं कि वे 400 साल से ज्यादा समय से नमाज अदा कर रहे हैं और हिंदू कहते हैं कि वे पिछले 2000 साल से पूजा करते आ रहे हैं।
 

वेबदुनिया पर पढ़ें

अगला लेख देश के कइ राज्य बाढ़ से बेहाल, मणिपुर में सूखे जैसे हालात