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27 साल बाद टेंट से बाहर आएंगे रामलला,संतों ने की टेंट से आजादी दिलाने की मांग

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विकास सिंह

, मंगलवार, 12 नवंबर 2019 (16:24 IST)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अयोध्या में भव्य राममंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। मंदिर निर्माण को लेकर केंद्र सरकार को तीन महीने में एक ट्रस्ट का गठन करना है जिसको लेकर मंथन का दौर शुरु हो गया है वहीं दूसरी ओर अब अयोध्या में रामलला को अस्थाई टेंट से निकालने की मांग तेज हो गई है। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद अस्थाई मंदिर का निर्माण किया गया था और तब से अब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टेंट में विराजमान रामलला की पूजा होती आ रही है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों ने मांग की है कि रामलला को जल्द अस्थाई टेंट से निकाला जाए। संतों का कहना हैं कि भव्य राममंदिर के निर्माण में चूंकि समय लगेगा इसलिए तब तक रामलला के एक अस्थाई मंदिर का निर्माण किया जाए, जिससे की रामलला की पूजा पूरे विधि विधान और भव्यता के साथ शुरु हो सके।
 
वेबदुनिया से बातचीत में अयोध्या के निष्काम सेवा ट्रस्ट के प्रमुख महंत रामचंद्र दास कहते हैं कि अब अगर इतने लंबे इंतजार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी रामलला उसी प्रकार से टेंट में रहे जैसे 27 सालों से रह रहे है तो फैसले का क्या फायदा। उन्होंने कहा कि अभी भव्य राममंदिर बनने में समय में लगेगा इसलिए जरुरी है कि तब तक रामलला के लिए तत्काल एक सुंदर और भव्य व्यवस्था का निर्माण हो जिसके की आने वाले श्रद्धालु भी भगवान राम के दर्शन कर प्रसन्न हो सके।
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वह कहते हैं अब सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद वहां पर किसी पर प्रकार की रोक नहीं है इसलिए जितना जल्द ही भगवान राम को टेंट से निकाला कर व्यवस्थित रुप से स्थापित किया जाए। रामलला को टेंट से निकालने की अयोध्या के हर व्यक्ति की इच्छा को देखते हुए वह जल्द ही प्रशासन के अधिकारियों और स्थानीय सांसद और विधायकों से मिलेंगे। 
 
वहीं सांधु संतों की इस मांग का अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी भी समर्थन करते है। वेबदुनिया से बातचीत में वह कहते हैं कि अयोध्या में अब जितना जल्दी हो सके भव्य राममंदिर का निर्माण होना चाहिए,जिसके की रामलला टेंट को टेंट से बाहर निकाला जा सके। वह अस्थाई मंदिर निर्माण की साधु संतों की मांग का समर्थन करते है। 
 
अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के समर्थक और पूरे मुद्दें पर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने वाले आचार्य किशोर कुणाल भी कहते हैं अब रामलला की पूजा कहां करना है इस निर्णय को पूरी तरह अयोध्या के संतों पर ही छोड़ देना चाहिए। वह कहते हैं कि रामलला की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से होनी चाहिए वह चाहे जहां भी हो।      
 

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