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चारा घोटाले में 40 महीने से जेल में बंद लालू यादव की रिहाई का आदेश

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गुरुवार, 29 अप्रैल 2021 (19:59 IST)
रांची। चारा घोटाले के तीन विभिन्न मामलों में सजा पाने के बाद 23 दिसंबर 2017 से जेल में बंद राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरुवार शाम न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया।
 
जमानत बांड और 1-1 लाख रुपए मूल्य के दो निजी मुचलके यहां केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत में प्रस्तुत किए गए जिसने लालू की रिहाई के आदेश दिए। यद्यपि लालू अभी भी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाजरत हैं इसलिए अस्पताल से उनकी छुट्टी के बारे में अब एम्स प्रशासन को निर्णय लेना है।
 
झारखंड के कारागार महानिरीक्षक वीरेन्द्र भूषण ने बताया कि विशेष सीबीआई अदालत के रिहाई के आदेश के बाद आज लालू यादव को शाम को न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया।
 
उन्होंने बताया कि लालू की रिहाई के आदेश की प्रति रांची स्थित बिरसा मुंडा जेल के अधिकारियों ने आज नयी दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक एवं वहां के अन्य अधिकारियों को मेल कर दी तथा वहां स्थित सुरक्षा अधिकारियों को भी इसकी सूचना दे दी गई।
 
भारतीय विधिज्ञ परिषद् ने बुधवार को जारी अपने निर्देश में कहा था कि अदालतों से जमानत पाने के बाद भी न्यायिक हिरासत में किसी कैदी का बंद रहना न्याय विरुद्ध है। लिहाजा उसने देश की सभी विधिज्ञ परिषदों को निर्देश दिया था कि वे जमानत प्राप्त लोगों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने की अधिवक्ताओं को अनुमति दें जिससे ऐसे लोगों की रिहाई सुनिश्चित कराई जा सके।
 
परिषद् के इस दिशा निर्देश के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद समेत जेल में बंद सैकड़ों लोगों को आज राहत मिली। चारा घोटाले के दुमका कोषागार से गबन के मामले में 17 अप्रैल को झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव अब तक न्यायिक हिरासत से रिहा नहीं हो सके थे क्योंकि झारखंड राज्य अधिवक्ता परिषद झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पूरे राज्य के अधिवक्ताओं को 2 मई तक सभी प्रकार के न्यायिक कार्यों से दूर रहने का निर्देश जारी किया था जिसके चलते सीबीआई की विशेष अदालत से जमानत बांड भरने और लालू की रिहाई के आदेश निर्गत करने आदि की कार्यवाही पूरी नहीं की जा सकी थी।
 
लालूप्रसाद यादव 23 दिसंबर, 2017 को देवघर कोषागार से लगभग 89 लाख रुपए की राशि के गबन के आरोप में यहां सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से जेल में थे। चारा घोटाले के अन्य तीन मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।
 
झारखंड उच्च न्यायालय में सत्रह अप्रैल को सीबीआई की ओर से केन्द्र सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव सिन्हा ने लालू यादव को फिलहाल जमानत देने का यह कह कर विरोध किया था कि दुमका कोषागार मामले में लालू को सीबीआई की अदालत ने कुल चैदह वर्ष की जेल की सजा सुनायी है लिहाजा जमानत के लिए आधी सजा पूरी करने का आधार तभी माना जाएगा जब लालू इस मामले में न्यायिक हिरासत में सात वर्ष की अवधि पूरी कर लेंगे।
 
लेकिन लालू के लिए दिल्ली से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीबीआई की इस दलील का विरोध किया और कहा कि 19 फरवरी को लालू यादव की इस मामले में दाखिल पहली जमानत याचिका को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने स्वयं माना था कि लालू को जमानत देने के लिए सिर्फ एक माह, 17 दिनों की न्यायिक हिरासत की अवधि और पूरी करनी है।
 
सिब्बल ने कहा कि लालू ने दुमका मामले में तय सात वर्ष की कैद की सजा की आधी अवधि छह अप्रैल को ही पूरी कर ली है। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने भी इस मामले में सीबीआई की दलील को खारिज कर दिया था और कहा था कि लालू को इस मामले में सीबीआई अदालत से भारतीय दंड संहिता के तहत मिली सात वर्ष  की कैद की सजा एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मिली सात वर्ष की कैद की सजा एक साथ भुगतनी है अथवा एक के बाद एक भुगतनी है, इस मुद्दे पर अपील पर सुनवाई के दौरान बहस की जा सकेगी।
 
पीठ ने यह भी कहा था कि 19 फरवरी के न्यायालय के आदेश को सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती भी नहीं दी है लिहाजा अब तक की परंपरा के अनुसार चारा घोटाले के किसी मामले में सजा की आधी अवधि न्यायिक हिरासत में पूरी कर लेने के चलते लालू को दुमका कोषागार से गबन के मामले में जमानत दी जाती है। न्यायालय ने जमानत देने के आदेश में लालू की 73 वर्ष की उम्र एवं बीमारियों का भी जिक्र किया।
 
न्यायालय ने लालू यादव को जमानत के लिए दुमका मामले में जुर्माने की साठ लाख रुपए की राशि में से दस लाख रुपए की रकम निचली अदालत में जमा करवाने और एक-एक लाख रुपए के दो निजी मुचलके देने के भी निर्देश दिए थे। लालू यादव के खिलाफ डोरंडा कोषागार से गबन के एक अन्य मामले में अभी सीबीआई की विशेष अदालत में रांची में बहस जारी है और इस मामले में फैसला आना अभी बाकी है। (भाषा)

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