Publish Date: Mon, 30 Apr 2018 (18:31 IST)
Updated Date: Mon, 30 Apr 2018 (20:07 IST)
एक तरफ चीन के सामान भारत में छाए हुए हैं, तो दूसरी तरफ चीन के बाजार में प्रवेश की भारतीय निर्यातकों की लालसा लंबे समय से पूरी नहीं हो पा रही है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 27-28 अप्रैल को वुहान में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिले तब इस मसले पर बातचीत के बाद कुछ ठोस नतीजे की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आइए देखते हैं कि भारत के कौन से सामान पूरी दुनिया खरीदती है, लेकिन चीन ने नो एंट्री लगा रखी है...
चावल : भारत दुनियाभर में 5.3 अरब डॉलर (करीब 3 खरब 33 अरब रुपए) का चावल निर्यात करता है, लेकिन चीन भारत से चावल आयात नहीं करता। ध्यान रहे कि चीन हर साल 1.5 अरब डॉलर (करीब 99 अरब रुपए) का चावल विदेशों से खरीदता है।
भैंस का मांस : भारत हर साल 3.68 अरब डॉलर (करीब 2 खरब 45 अरब रुपए) की कीमत के भैंसों का मांस निर्यात करता है, लेकिन चीन भारत से भैंसे का मांस आयात नहीं करता। हालांकि, अन्य देशों से वह 2.45 अरब डॉलर (करीब 1 खरब 63 अरब रुपए) कीमत का भैंसे का मांस आयात करता है।
दवाइयां : भारत में बनीं दवाइयां दुनियाभर में निर्यात होती हैं। हर साल भारत को दवाइयों के निर्यात से 10 करोड़ 95 लाख डॉलर (करीब 7 अरब 29 करोड़ रुपए) का राजस्व प्राप्त होता है। वहीं, चीन भी हर साल 62 करोड़ 50 लाख डॉलर (करीब 41 अरब 63 करोड़ रुपए) की दवाइयां विदेशों से खरीदता है, लेकिन भारत से वह एक रुपए की भी दवाई नहीं मंगवाता।
एल्युमिनियम एलॉय : भारत सालाना 12 करोड़ 10 लाख डॉलर (करीब 8 अरब रुपए) मूल्य के एल्युमिनियम एलॉय का निर्यात करता है जबकि चीन अपने 87 करोड़ 40 लाख डॉलर (करीब 58 अरब रुपए) मूल्य के एल्युमिनियम एलॉय के आयात में से भारत से सिर्फ 2 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपए) का ही आयात करता है। यानी यहां भी लगभग नाकाबंदी।
बढ़ता व्यापार घाटा : चीन की इसी बेरुखी की वजह से उसके साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा बढ़कर 71.45 अरब डॉलर (करीब 47 खरब 60 अरब रुपए) तक पहुंच गया। भारत ने चीन को जहां 10.17 अरब डॉलर (करीब 6 खबर 77 अरब रुपए) मूल्य का सामान निर्यात किया तो चीन से यहां 61.28 अरब डॉलर (करीब 40 खरब 82 अरब रुपए) मूल्य का सामान आया।