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एक्सप्लेनर: राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाना जरूरी या मजबूरी?

राहुल गांधी फिर से संभाल सकते है पार्टी की कमान

हमें फॉलो करें एक्सप्लेनर: राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाना जरूरी या मजबूरी?
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विकास सिंह

, मंगलवार, 5 जनवरी 2021 (18:00 IST)
देश की 136 साल पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्णकालिक अध्यक्ष को लेकर एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने दावा किया हैं कि राहुल गांधी फिर से कांग्रेस पार्टी की कमान संभालेंगे। मीडिया से बात करते हुए अनिल चौधरी ने कहा कि नए साल में राहुल गांधी फिर कांग्रेस की कमान संभालंगें। वहीं दूसरी ओर मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक कांग्रेस के पूर्णकालिक अध्यक्ष को लेकर शनिवार को सोनिया गांधी के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के बड़े नेताओं की मौजदूगी में राहुल गांधी ने फिर से पार्टी की कमान संभालने को लेकर हामी भर दी है।
पिछले दिनों कांग्रेस के स्थापना दिवस से ठीक एक दिन पहले राहुल गांधी का इटली जाने का मुद्दा खूब सुर्खियों में रहा था। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत भाजपा के कई नेताओं ने राहुल गांधी के विदेश जाने पर तंज कसा था। ऐसे में अगर राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस का पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाया जा रहा है तो उसके क्या मायने है और कांग्रेस के लिए राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना क्यों क्यों जरूरी है। इसको समझने के लिए 'वेबदुनिया' ने कांग्रेस मुख्यालय की सियासत पर चर्चित किताब 24,Akbar Road लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई से खास बातचीत की।
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नेहरू-गांधी परिवार को बेहद करीबी से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कांग्रेस में सोनिया गांधी के बाद फिर राहुल गांधी के अध्यक्ष बनाए जाने पर साफ तौर पर कहते है कि आज यह सोचने और समझने का बात है कि  नेहरू-गांधी परिवार से नहीं आने वाला कांग्रेस अध्यक्ष,क्या कांग्रेस को वोट दिला सकता है,क्या ऐसा व्यक्ति नरेंद्र मोदी की काट बन सकता है,आज मतदाताओं में राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दो (धारा 370, राममंदिर, लवजिहाद) को लेकर जो आर्कषण पैदा हुआ या प्रभावित है वह क्या कांग्रेस को इसलिए वोट देने लगेगा कि कांग्रेस का अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार का सदस्य नहीं है। पहले हमें इस प्रश्न का जवाब हमें पहले खोजना चाहिए।  
 
रशीद किदवई आगे कहते हैं कि यह सच है कि आज कांग्रेस एक बुरे दौर से गुजर रही है,लेकिन एक विडंबना यह भी है कि जो नेहरू-गांधी परिवार के विरोधी भी हैं वह भी आज नेहरू परिवार की तरफ ही देख रहे हैं कि वह आगे की दिशा और दशा बताएं। पार्टी में विरोध के सुर उठाने वालों का भी मानना हैं कि वह नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य को ही कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए। ऐसे में आज विरोधी भी नेहरू-गांधी परिवार को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है।

वहीं गांधी परिवार के अलावा किसी व्यक्ति के कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा पर रशीद किदवई कहते हैं कि ये बातें पूरी स्थिति को हास्यास्पद बना देता है कि जिसकी पार्टी पर पूरी कमान है वह क्यों छोड़ेगा और वह छोड़ेगा भी तब जब उसको चुनौती दी जाएगी लेकिन चुनौती देने वाले तो कह रहे हैं कि आप अपने (गांधी परिवार) विवेक से करें जो आपको अच्छा लगे और हम वह मानेंगे और यहीं वह पूरा विरोधाभास जिससे कांग्रेस का पूरा अध्याय पूरा भरा हुआ है।
 

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