सियासत में सादगी के पुरोधा थे मनोहर पर्रिकर, रक्षा मंत्री रहते दुश्मनों पर करवाया था सर्जिकल स्ट्राइक

रविवार, 17 मार्च 2019 (21:20 IST)
सियासत में सादगी और ईमानदारी की मिसाल मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) ने लंबी बीमारी के बाद रविवार को अंतिम सांस ली। पर्रिकर मार्च 2017 में रक्षा मंत्री का पद छोड़कर चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री बने थे। मनोहर पर्रिकर के रक्षा मंत्री रहते हुए भारतीय सेना ने दो बड़े ऑपरेशन (म्यांमार और ‍सर्जिकल स्ट्राइक 1) को अंजाम दिया। पर्रिकर का राजनीतिक जीवन बेदाग रहा।
 
सार्वजनिक जीवन में पर्रिकर के समर्पण, लगन और गोवा के मुख्यमंत्री तथा देश के रक्षा मंत्री के रूप में उनकी सेवाओं को देश हमेशा याद रखेगा। बेहद सरल और सादगी से जीवन जीने वाले मनोहर पर्रिकर का जुड़ाव हमेशा जनता से रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले मनोहर पर्रिकर का जन्म 13 दिसंबर 1955 के मापुसा में हुआ था।
 
मनोहर पर्रिकर का पूरा नाम मनोहर गोपालकृष्णन प्रभु पर्रिकर था। पर्रिकर ने 1978 में आईआईटी मुंबई से ग्रेजुएशन किया। मनोहर पर्रिकर भारत के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने आईआईटी ग्रेजुएशन किया था।
 
मनोहर पर्रिकर को 2001 में आईआईटी मुंबई ने विशिष्ट भूतपूर्व छात्र की उपाधि प्रदान की थी। मनोहर पर्रिकर गोवा में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने थे। 24 अक्टूबर 2000 को वे गोवा के पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन सरकार 27 फरवरी 2002 तक ही चल पाई। जून 2002 में वे दोबारा सभा के सदस्य बने और 5 जून 2002 को एक बार फिर गोवा के सीएम बने।
 
छोटी उम्र में ही संघ से जुड़े : पर्रिकर ने बहुत छोटी उम्र से आरएसएस से रिश्ता जोड़ लिया था। वे स्कूल के अंतिम दिनों में आरएसएस के ‘मुख्य शिक्षक’ बन गए थे। पर्रिकर ने संघ के साथ अपने जुड़ाव को लेकर कभी भी किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं की। उनका संघ द्वारा आयोजित ‘संचालन’ में लिया गया एक फोटोग्राफ इसकी पुष्टि करता है, जिसमें वे संघ के गणवेश और हाथ में लाठी लिए नजर आते हैं। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 26 साल की उम्र में मापुसा में संघचालक बन गए।
 
सौंपी रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी : मनोहर पर्रिकर की साफ सुथरी छवि को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्र में रक्षा मंत्री बनाया था। मनोहर पर्रिकर के रक्षा मंत्री रहते हुए भारतीय सेना ने दो बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था।
 
नवंबर 2017 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करते हुए कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इस ऑपरेशन में पैरा स्पेशल फोर्स के 25 कमांडो एमआई-17 हेलिकॉप्टरों में सवार होकर पीओके में तीन किलोमीटर अंदर तक गए थे। देश के जांबाजों ने दुश्मन के ठिकानों को बड़े पैमाने पर तबाह किया और सकुशल स्वदेश वापसी की।

वेबदुनिया पर पढ़ें

अगला लेख मनोहर पर्रिकर का निधन, देशभर के नेताओं ने जताया शोक